NHAI New Guidelines: हाईवे पर सड़क दुर्घटना होने के बाद घायलों को जल्द से जल्द मेडिकल सहायता मिल सके, इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दुर्घटना प्रबंधन व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद उसे तुरंत स्वीकार करना, कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस को रवाना करना और निर्धारित समय के भीतर घटनास्थल तक पहुंचना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
NHAI ने बदला दुर्घटना प्रबंधन का सिस्टम
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाईवे पर दुर्घटनाओं के दौरान इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए अपने पुराने Emergency Response System-Computer Aided Dispatch (ERS-CAD) को अपग्रेड किया है। अब इसे NHAI Care System के जरिए संचालित किया जा रहा है।
नए सिस्टम का उद्देश्य दुर्घटना की सूचना मिलने से लेकर एम्बुलेंस के घटनास्थल पर पहुंचने और घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने तक पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी करना है। इसके लिए हाईवे पर तैनात एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है।
NHAI परियोजनाओं पर तैनात सभी ऑन-रोड यूनिट्स में AIS-140 मानकों के अनुरूप GPS उपकरण लगाए गए हैं। इससे अधिकारियों को संबंधित वाहन की लोकेशन और उसकी गतिविधि की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी।
10 मिनट में दुर्घटनास्थल तक पहुंचना होगा जरूरी
NHAI के नए नियमों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की गई है। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित एजेंसी को उसे जल्द से जल्द सिस्टम पर स्वीकार करना होगा।
नए SLA और KPI के अनुसार:
- दुर्घटना की सूचना या टिकट को 1 मिनट के भीतर स्वीकार करना होगा।
- टिकट स्वीकार होने के बाद एम्बुलेंस को 2 मिनट के भीतर रवाना होना होगा।
- 10 किलोमीटर के दायरे में दुर्घटना होने पर एम्बुलेंस को 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना होगा।
- दुर्घटना पीड़ित को टिकट स्वीकार किए जाने के समय से 1 घंटे के भीतर निकटतम अस्पताल पहुंचाना जरूरी होगा।
यदि दुर्घटनास्थल 10 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, तो निर्धारित समय दूरी के अनुपात में बढ़ाया जा सकता है।
24 घंटे चलेगा कॉल सेंटर, डॉक्टर भी रहेंगे उपलब्ध
नए NHAI Care System में रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए 24 घंटे चलने वाला कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। इसका मकसद दुर्घटना से संबंधित जानकारी को तेजी से संबंधित ऑन-रोड यूनिट तक पहुंचाना और पूरे रिस्पॉन्स की निगरानी करना है।
इस व्यवस्था में डॉक्टरों की टीम की सहायता भी उपलब्ध रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर दुर्घटना पीड़ितों के लिए शुरुआती मेडिकल मार्गदर्शन दिया जा सके।
नए सिस्टम के जरिए अधिकारियों को यह भी पता चल सकेगा कि किसी दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित एम्बुलेंस ने कितनी देर में टिकट स्वीकार किया, कब रवाना हुई और कितने समय में घटनास्थल पर पहुंची।
पुराने सिस्टम में सामने आई थी देरी की समस्या
NHAI के अनुसार, पहले इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम में कई स्तरों पर प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं होने की समस्या सामने आई थी। इसका सीधा असर दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाली सहायता पर पड़ सकता था।
इसी वजह से अब NHAI Care System का इस्तेमाल ऑन-रोड यूनिट्स के लिए अनिवार्य किया गया है। एम्बुलेंस, क्रेन और गश्ती वाहनों के साथ-साथ संबंधित घटना प्रबंधकों को भी नए डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा।
लापरवाही पर लगेगा भारी जुर्माना
नए नियमों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समय सीमा या सिस्टम संबंधी आवश्यकताओं का पालन नहीं करने पर संबंधित एजेंसी या ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
खास बात यह है कि कई मामलों में जुर्माने की गणना सिस्टम के जरिए अपने आप की जाएगी और इसे संबंधित एजेंसी के मासिक भुगतान से काटा जा सकता है। निर्धारित प्रावधानों के तहत अधिकतम जुर्माना ₹2.5 लाख प्रति माह तक हो सकता है।
किस गलती पर कितना जुर्माना?
| नियम/लापरवाही | निर्धारित अनुपालन | जुर्माना |
|---|---|---|
| सड़क पर तैनात यूनिट द्वारा NHAI Care ऐप का इस्तेमाल नहीं करना | सिस्टम की प्रतिदिन 99% से अधिक उपलब्धता | ₹2,500 प्रतिदिन |
| घटना प्रबंधक द्वारा NHAI Care ऐप का इस्तेमाल नहीं करना | सिस्टम की प्रतिदिन 99% से अधिक उपलब्धता | ₹2,500 प्रतिदिन |
| AIS-140 GPS उपलब्ध नहीं होना | ऑन-रोड यूनिट में GPS अनिवार्य | ₹2,500 प्रतिदिन |
| IMS Care Dashboard पर एम्बुलेंस दिखाई नहीं देना | एम्बुलेंस हर समय डैशबोर्ड पर उपलब्ध दिखनी चाहिए | ₹2,500 प्रतिदिन |
| दुर्घटना टिकट स्वीकार करने में देरी | 1 मिनट से कम | ₹5,000 प्रति अतिरिक्त मिनट या उसके हिस्से पर |
| आपातकालीन टिकट को रिजेक्ट करना | किसी भी इमरजेंसी टिकट को अस्वीकार नहीं किया जा सकता | ₹10,000 प्रति घटना |
| एम्बुलेंस रवाना होने में देरी | टिकट स्वीकार होने के 2 मिनट के भीतर मूवमेंट | ₹5,000 प्रति अतिरिक्त मिनट या उसके हिस्से पर |
| घटनास्थल पर पहुंचने में देरी | 10 किमी के दायरे में 10 मिनट के भीतर पहुंचना | ₹10,000 प्रति घटना |
| अस्पताल पहुंचाने में देरी | टिकट स्वीकार होने से 1 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाना | ₹10,000 प्रति घटना |
| उपकरण, दवा या स्टाफ की कमी | सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध होना अनिवार्य | ₹10,000 प्रति निरीक्षण |
| दैनिक ड्राई रन/मॉक ड्रिल नहीं करना | हर 24 घंटे में कम से कम 5 किमी का ड्राई रन | मासिक भुगतान में कटौती/₹10,000 मासिक जुर्माना |
एम्बुलेंस के लिए रोजाना मॉक ड्रिल भी जरूरी
NHAI ने एम्बुलेंस की तैयारियों को लेकर भी नियम कड़े किए हैं। इसके तहत प्रत्येक एम्बुलेंस को हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना होगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुर्घटना की स्थिति में एम्बुलेंस तत्काल रवाना होने और मौके तक पहुंचने के लिए तैयार रहे।
हालांकि, अगर किसी दिन एम्बुलेंस वास्तविक दुर्घटना के मामले में 5 किलोमीटर से अधिक चल चुकी है, तो उस दिन अलग से मॉक ड्रिल की आवश्यकता नहीं होगी।
एम्बुलेंस में दवाएं और कर्मचारी उपलब्ध रहना जरूरी
नियमों में सिर्फ समय पर पहुंचने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि एम्बुलेंस की तैयारियों की भी निगरानी की जाएगी। निरीक्षण के दौरान यदि जरूरी उपकरण या दवाएं उपलब्ध नहीं मिलती हैं, तो संबंधित एजेंसी पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा एम्बुलेंस में निर्धारित ड्राइवर और EMT (Emergency Medical Technician) की उपलब्धता भी जरूरी होगी। यानी दुर्घटना के समय एम्बुलेंस केवल लोकेशन पर मौजूद ही न हो, बल्कि मरीज को तत्काल सहायता देने के लिए जरूरी संसाधनों और कर्मचारियों से लैस भी हो।
GPS से होगी वाहनों की रियल-टाइम निगरानी
NHAI ने ऑन-रोड यूनिट्स की निगरानी के लिए AIS-140 कंप्लायंट GPS को जरूरी किया है। इसके जरिए एम्बुलेंस और अन्य संबंधित वाहनों की लोकेशन को ट्रैक किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से यह पता लगाना आसान होगा कि:
- वाहन दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद कहां था।
- टिकट स्वीकार करने में कितना समय लगा।
- एम्बुलेंस कितनी देर में रवाना हुई।
- घटनास्थल तक पहुंचने में कितना समय लगा।
- मरीज को अस्पताल पहुंचाने में कितना समय लगा।
इस तरह किसी भी स्तर पर देरी होने पर उसकी पहचान की जा सकेगी और संबंधित एजेंसी से जवाब मांगा जा सकेगा।
दुर्घटना टिकट को रिजेक्ट करने पर ₹10,000 का जुर्माना
नए नियमों में इमरजेंसी टिकट को अस्वीकार करने को लेकर भी सख्त प्रावधान है। किसी भी आपातकालीन टिकट को संबंधित ऑन-रोड यूनिट द्वारा रिजेक्ट नहीं किया जा सकेगा।
अगर कोई एजेंसी या यूनिट किसी घटना के टिकट को अस्वीकार करती है, तो प्रत्येक घटना पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसी तरह टिकट स्वीकार करने में निर्धारित एक मिनट से ज्यादा की देरी होने पर अतिरिक्त समय के प्रत्येक मिनट या उसके हिस्से के लिए ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
अस्पताल पहुंचाने की समय सीमा भी तय
दुर्घटना के बाद सिर्फ घटनास्थल तक एम्बुलेंस पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना भी नए सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नियम के अनुसार दुर्घटना का टिकट स्वीकार किए जाने के समय से एक घंटे के भीतर पीड़ित को निकटतम अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य है। इसमें देरी होने पर प्रति घटना ₹10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस व्यवस्था से दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने और गोल्डन ऑवर के महत्व को ध्यान में रखते हुए रिस्पॉन्स टाइम कम करने की कोशिश की गई है।
अधिकारियों को नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश
NHAI ने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों और प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स को नए नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही को अब डिजिटल सिस्टम के जरिए ट्रैक किया जा सकेगा।
सड़क सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों में भी दुर्घटना के बाद आपातकालीन सेवाओं के समय पर पहुंचने को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में NHAI का नया सिस्टम हाईवे पर दुर्घटना के बाद रिस्पॉन्स टाइम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तकनीकी परेशानी के लिए हेल्पलाइन और ईमेल सपोर्ट
NHAI Care ऐप या IMS Care System का इस्तेमाल करते समय यदि किसी एजेंसी या कर्मचारी को तकनीकी समस्या आती है, तो उसके समाधान के लिए सपोर्ट व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।
सिस्टम से जुड़ी तकनीकी शिकायतें ccc@hllhlfppt.com पर दर्ज की जा सकती हैं।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
NHAI के इन नए नियमों का सबसे बड़ा असर हाईवे पर सफर करने वाले लोगों और दुर्घटना पीड़ितों पर पड़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया को सिर्फ कागजी प्रक्रिया के बजाय डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा।
यदि सिस्टम को निर्धारित तरीके से लागू किया जाता है, तो दुर्घटना के बाद एम्बुलेंस के रवाना होने, घटनास्थल तक पहुंचने और मरीज को अस्पताल ले जाने में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, NHAI Care System के जरिए हाईवे पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स को अधिक जवाबदेह, तेज और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने की कोशिश की गई है। 10 किलोमीटर के दायरे में दुर्घटना होने पर 10 मिनट के भीतर पहुंचने का लक्ष्य और देरी पर जुर्माने का प्रावधान इस नई व्यवस्था की सबसे अहम विशेषताओं में शामिल है।


