Adani US Case: अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े आपराधिक मामले के स्थायी रूप से खारिज होने के बाद अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने पहली बार विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि करीब दो साल तक चली इस कानूनी प्रक्रिया ने कानून के शासन और न्याय व्यवस्था में उनके विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति को अपने सत्य पर विश्वास रखने के साथ-साथ उसके लिए मजबूती से खड़ा होना भी जरूरी है।
अमेरिका की न्यूयॉर्क ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा अमेरिकी न्याय विभाग के मामले को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के दो दिन बाद गौतम अदाणी ने समूह के कर्मचारियों और साझेदारों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कानूनी लड़ाई, हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद के दौर, निवेशकों के भरोसे और अदाणी समूह के कर्मचारियों के योगदान पर खुलकर बात की।
हालांकि, अमेरिकी मामले के खारिज होने के बाद अदाणी समूह के शेयरों में तेजी की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन बुधवार के कारोबारी सत्र में समूह के अधिकतर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। ऐसे में अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले सत्रों में बाजार इस घटनाक्रम को किस तरह लेता है।
करीब दो साल चली कानूनी प्रक्रिया
गौतम अदाणी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के तहत आयोजित ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में समूह के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों और साझेदारों को संबोधित किया। ये लोग देश और दुनिया में अदाणी समूह के 700 से अधिक स्थानों से जुड़े हुए हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने करीब दो साल तक चले इस पूरे घटनाक्रम को याद किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा आसान नहीं थी और इस दौरान कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका भरोसा न्याय व्यवस्था और कानून के शासन में बना रहा।
उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने उनके विश्वास को और मजबूत किया है कि व्यक्ति को अपने सत्य पर भरोसा रखना चाहिए और उसके लिए खड़ा होना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी मुश्किल परिस्थिति में निडरता के साथ अपने पक्ष पर कायम रहना जरूरी है।
गौतम अदाणी का संदेश सिर्फ इस कानूनी मामले तक सीमित नहीं था। उन्होंने इस पूरे दौर को नेतृत्व, धैर्य और जिम्मेदारी की परीक्षा के रूप में भी पेश किया।
‘सत्य के लिए खड़ा भी होना पड़ता है’
गौतम अदाणी ने कहा कि सत्य पर विश्वास करना पर्याप्त नहीं है। जब मुश्किल समय आए तो उसके लिए मजबूती से खड़ा होना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगभग दो साल तक चली और उनके लिए यह कठिन और पीड़ादायक यात्रा रही। लेकिन इसी दौरान कानून के शासन और न्याय व्यवस्था में उनका विश्वास पहले से ज्यादा मजबूत हुआ।
उनके मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए मुश्किल समय एक तरह की परीक्षा होता है। ऐसे समय में धैर्य, निरंतरता और अपने मूल्यों पर टिके रहना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
16 साल की उम्र में शुरू हुई थी सफर की कहानी
गौतम अदाणी ने अपने शुरुआती जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 16 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर मुंबई आने और वहां से कारोबार की शुरुआत करने के अनुभव ने उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें सिखाईं।
उन्होंने कहा कि विश्वास किसी व्यक्ति को मांगने से नहीं मिलता और न ही इसे विरासत में हासिल किया जा सकता है। विश्वास चरित्र, निरंतरता और अपने वादे को पूरा करने से अर्जित होता है।
उन्होंने भारतीय पौराणिक कथा ‘समुद्र मंथन’ का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति, संस्थान या राष्ट्र की महत्वपूर्ण यात्रा अक्सर कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरती है। इन्हीं चुनौतियों के बीच वास्तविक क्षमता और मजबूती सामने आती है।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद FPO वापस लेने का फैसला
गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद समूह द्वारा उठाए गए कदम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय अदाणी समूह के पास कानूनी रूप से अपने करीब 20,000 करोड़ रुपये के पूरी तरह सब्सक्राइब्ड फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी FPO को आगे बढ़ाने का विकल्प था।
इसके बावजूद समूह ने निवेशकों का पैसा वापस लौटाने का फैसला किया था।
गौतम अदाणी के मुताबिक, यह फैसला सिर्फ कानूनी अधिकारों के इस्तेमाल का मामला नहीं था, बल्कि निवेशकों के भरोसे को प्राथमिकता देने से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि निवेशकों का विश्वास किसी भी कानूनी अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, यह सोच उन्हें अपने पिता से मिली थी कि भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है। यही कारण था कि समूह ने निवेशकों की पूंजी लौटाने का फैसला किया।
अमेरिकी मामले के निष्कर्ष पर क्या बोले अदाणी?
अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े मामले के स्थायी रूप से खारिज होने के बाद गौतम अदाणी ने इसे केवल कानूनी घटनाक्रम के रूप में नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें कानून के शासन, धैर्य और जिम्मेदारी की अहमियत को और गहराई से समझने का मौका दिया।
उनका कहना था कि इस दौरान अदालत की कार्यवाही से ज्यादा जिस चीज ने उन्हें प्रभावित किया, वह अदाणी समूह से जुड़े कर्मचारियों और साझेदारों का समर्पण था।
जब यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में था, तब भी समूह के इंजीनियर, कर्मचारी, श्रमिक, आपूर्तिकर्ता, ठेकेदार, विक्रेता और अन्य साझेदार अपने काम में जुटे रहे। उन्होंने परियोजनाओं की गति बनाए रखी और अलग-अलग कारोबारों का संचालन जारी रखा।
गौतम अदाणी ने इसे समूह की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया।
1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स
अदाणी समूह ने इस कठिन दौर के बावजूद अपने कारोबार में निवेश जारी रखा। गौतम अदाणी के मुताबिक, समूह का पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स पिछले वर्ष करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह निवेश बंदरगाह, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, पावर ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया गया।
अदाणी ने हालांकि यह भी कहा कि किसी संगठन की पूरी कहानी केवल उसके वित्तीय आंकड़ों से नहीं समझी जा सकती। उनके लिए संगठन की असली ताकत उसके साथ जुड़े लोगों, उनके भरोसे और मुश्किल समय में उनके व्यवहार से तय होती है।
उन्होंने समूह से जुड़े लाखों लोगों को ‘अदाणी परिवार’ बताते हुए कहा कि यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि और गर्व का विषय है।
आम लोगों के समर्थन को भी किया याद
गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में उन आम लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका समर्थन किया।
उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें ऐसे कई लोग मिले, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। इसके बावजूद इन लोगों ने उनसे मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया, हाथ मिलाया या किसी अन्य तरीके से अपना समर्थन जताया।
उनके मुताबिक, ऐसे छोटे-छोटे अनुभव किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और कठिन समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
आलोचना ने दिया आत्ममंथन का मौका
अदाणी समूह के चेयरमैन ने आलोचकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कठिन सवालों और आलोचनाओं ने समूह को आत्ममंथन का अवसर दिया।
उनके मुताबिक, आलोचना ने संगठन को और अधिक जिम्मेदार बनने और जमीन से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने संकेत दिया कि किसी संस्था के लिए आलोचना से बचने के बजाय उससे सीखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कर्मचारियों और साझेदारों से यह सवाल भी पूछा कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारी पीढ़ी को किस बात के लिए याद किया जाएगा?
उनका मानना है कि भारत का मूल्यांकन सिर्फ सड़कों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर नहीं होगा। देश की असली उपलब्धि उन अवसरों, मजबूत समुदायों और संस्थागत मूल्यों से भी तय होगी, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए तैयार किया जाएगा।
अब अदाणी शेयरों में आएगी तेजी?
अमेरिकी आपराधिक मामले के खारिज होने की खबर अदाणी समूह के लिए निश्चित रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। किसी बड़े कानूनी विवाद से जुड़ी अनिश्चितता कम होने से निवेशकों के सेंटीमेंट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि बाजार में यह चर्चा तेज है कि क्या अब अदाणी समूह के शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि, केवल किसी एक खबर के आधार पर शेयरों में तेजी की गारंटी नहीं दी जा सकती।
बुधवार को अदाणी समूह के अधिकतर शेयर गिरावट में बंद हुए। इससे साफ है कि बाजार किसी खबर को सिर्फ सकारात्मक या नकारात्मक तरीके से नहीं देखता, बल्कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, बाजार की स्थिति, निवेशकों की धारणा और अन्य कारोबारी कारकों को भी ध्यान में रखता है।
इसलिए निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी अदाणी शेयर में निवेश का फैसला केवल अमेरिकी मामले के खारिज होने की खबर के आधार पर न लें।
‘संस्थान की पहचान संकट से होती है’
अपने संबोधन के अंत में गौतम अदाणी ने कहा कि किसी संस्था की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि उसने कितने संकटों का सामना किया। असली पहचान इस बात से बनती है कि संकट के दौरान उसने किन मूल्यों की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में देश की सबसे बड़ी विरासत सिर्फ भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होगी। ऐसे संस्थान भी इस विरासत का हिस्सा होंगे जो भरोसा अर्जित करें, कठिन परिस्थितियों का सामना करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करें।
अदाणी समूह के लिए अमेरिकी मामले का यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब समूह अपनी अलग-अलग कारोबारी परियोजनाओं और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। अब आने वाले समय में निवेशकों की नजर समूह के शेयरों के प्रदर्शन, कारोबारी नतीजों और नए निवेश पर रहेगी।
फिलहाल गौतम अदाणी का संदेश साफ है—मुश्किल समय में भरोसा, धैर्य और अपने मूल्यों पर कायम रहना ही किसी व्यक्ति या संस्था की सबसे बड़ी ताकत है।


