Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे इलाके के पास फंस गए थे। मुश्किल हालात में एक कपल ने सूझबूझ दिखाई और साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल कर फंसी महिलाओं को सुरक्षित निकालने में मदद की।
नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। तेज पानी के बहाव में सड़कें, पुल और घरों को नुकसान पहुंचा, जबकि कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए। इसी प्राकृतिक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री भी नेपाल के तिमुरे इलाके के पास फंस गए।
मुश्किल वक्त में एक कपल ने जिस तरह सूझबूझ दिखाई, उसकी चर्चा हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली ने फंसी महिलाओं को सुरक्षित जगह तक पहुंचाने में मदद की। इसके लिए पूंगुझाली की साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया। साड़ी और वहां मौजूद लोहे की केबल के सहारे महिलाओं को कीचड़ भरी और खड़ी ढलान से ऊपर खींचकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।
अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन में फंसे तीर्थयात्री
26 अगस्त को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे क्षेत्र के पास थे। इसी दौरान भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई। पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
बताया गया कि तीर्थयात्रियों की गाड़ी एक सुरक्षित स्थान पर रुक गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, आसपास तेजी से पानी और मलबा बहने के कारण यात्रियों ने वाहन से बाहर निकलकर ऊंची और सुरक्षित जगह की ओर जाने का फैसला किया।
लेकिन पहाड़ी पर चढ़ना आसान नहीं था। रास्ते में कीचड़ और फिसलन होने के कारण कई लोगों को ऊपर पहुंचने में परेशानी हो रही थी।
साड़ी बनी सहारा, महिलाओं को ऐसे निकाला गया
रिपोर्ट्स के अनुसार, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए थे। इसी दौरान उन्होंने नीचे फंसी कुछ महिलाओं को देखा, जो कीचड़ और फिसलन के कारण ऊपर नहीं आ पा रही थीं।
महिलाओं की मदद करने के लिए पूंगुझाली ने अपनी साड़ी उतारकर उसे नीचे की ओर पहुंचाया। इसके बाद साड़ी को वहां मौजूद लोहे की केबल के साथ सहारे के तौर पर इस्तेमाल किया गया। ऊपर मौजूद लोगों ने साड़ी और केबल की मदद से महिलाओं को धीरे-धीरे खींचकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
इस तरह संकट की घड़ी में कपड़े का एक साधारण टुकड़ा लोगों के लिए जीवन बचाने वाला सहारा बन गया। इस पूरे रेस्क्यू में स्थानीय स्तर पर मौजूद लोगों की मदद और आपसी सहयोग भी अहम रहा।
दो दिनों तक बेहद मुश्किल हालात में रहे यात्री
बाढ़ और भूस्खलन के बाद तीर्थयात्रियों को करीब दो दिनों तक कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ा। आसपास का रास्ता प्रभावित होने के कारण उनके लिए तुरंत सुरक्षित स्थान तक पहुंचना मुश्किल था।
इस दौरान स्थानीय लोगों ने तीर्थयात्रियों को खाने-पीने का सामान और पानी उपलब्ध कराया। अधिकारियों की ओर से भी लगातार उनसे संपर्क बनाए रखने की कोशिश की गई।
बाद में भारतीय दूतावास, नेपाल आर्मी और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों के समन्वय से राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। फंसे हुए तीर्थयात्रियों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की गई और उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान
नेपाल में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से कई इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार तक आपदा में 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि करीब 4,247 लोग लापता बताए गए।
चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और गोरखा समेत कई जिलों में राहत और बचाव अभियान चलाया गया। प्रभावित इलाकों से शव बरामद करने और लापता लोगों की तलाश का काम भी जारी रहा।
प्राकृतिक आपदा के बीच तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का फंसना भी बेहद चिंताजनक स्थिति थी। हालांकि, समय रहते स्थानीय लोगों की मदद, अधिकारियों के प्रयास और रत्नाकुमार-पुंगुझाली की सूझबूझ से सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली। इस दौरान एक साड़ी का इस्तेमाल जिस तरह किया गया, वह इस मुश्किल रेस्क्यू की सबसे खास घटनाओं में से एक बन गया।


