RBI Polymer Banknotes: भारत में जल्द ही पारंपरिक कागजी नोटों का विकल्प देखने को मिल सकता है। RBI की सब्सिडियरी BRBNMPL ने ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इसमें ब्रिटेन की De La Rue, ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure और भारत की Cosmo First जैसी कंपनियां रेस में शामिल हैं।
भारत में करेंसी नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Limited (BRBNMPL) ने पॉलीमर बैंक नोटों के लिए पॉलीमर सब्सट्रेट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है।
शुरुआती योजना के तहत ₹10 और ₹20 के नोटों को पॉलीमर यानी प्लास्टिक आधारित सब्सट्रेट पर छापने की संभावना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए जारी ग्लोबल टेंडर में विदेशी और भारतीय कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है।
पॉलीमर नोट दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल किए जाते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में पानी, नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली टूट-फूट को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं।
RBI को चाहिए 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट
रिपोर्ट के मुताबिक, BRBNMPL को बैंक नोटों की छपाई के लिए तत्काल 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की जरूरत है। एक रीम में 500 शीट होने की बात कही गई है।
टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों को पहले अपने पॉलीमर सब्सट्रेट के सैंपल उपलब्ध कराने होंगे। इन नमूनों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच की जाएगी। भारत में अलग-अलग इलाकों में तापमान, नमी और मौसम की परिस्थितियां काफी अलग होती हैं, इसलिए नोटों की टिकाऊपन क्षमता का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
सैंपल टेस्ट में सफल रहने वाली कंपनियों को ही आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
टेंडर में शामिल हैं दुनिया की बड़ी कंपनियां
पॉलीमर बैंक नोटों के लिए जारी इस प्रक्रिया में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हुई हैं। इनमें बैंक नोट सिक्योरिटी और पॉलीमर तकनीक से जुड़ी कंपनियों का अनुभव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Cosmo First और De La Rue की साझेदारी
भारतीय कंपनी Cosmo First ने ब्रिटेन की प्रसिद्ध बैंक नोट और सिक्योरिटी प्रोडक्ट कंपनी De La Rue को तकनीकी साझेदार बनाया है।
De La Rue को बैंक नोटों और सुरक्षा संबंधी तकनीक में लंबा अनुभव है। साझेदारी के तहत पॉलीमर सब्सट्रेट और उससे जुड़े सुरक्षा फीचर्स को लेकर तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure भी रेस में
ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल है। कंपनी पॉलीमर बैंक नोटों से जुड़ी तकनीक के क्षेत्र में काम करती है और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों के साथ काम करने का दावा करती है।
कंपनी के अनुसार, उसके पॉलीमर नोट पारंपरिक कॉटन आधारित बैंक नोटों की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकाऊ हो सकते हैं।
वियतनाम की Q&T High-Tech Polymer
वियतनाम की Q&T High-Tech Polymer ने भी भारतीय टेंडर के लिए बोली लगाई है। कंपनी ने पॉलीमर करेंसी के इस्तेमाल से लागत में बचत का दावा किया है।
इस तरह भारतीय बाजार के लिए पॉलीमर सब्सट्रेट की सप्लाई हासिल करने की दौड़ में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां आमने-सामने हैं।
चीन और पाकिस्तान को लेकर सख्त शर्त
टेंडर में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी कड़े प्रावधान रखे गए हैं। बोली लगाने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत में उनके ऑपरेशंस चीन और पाकिस्तान में मौजूद उनकी गतिविधियों से अलग रहें।
इसके लिए संबंधित कंपनियों से आवश्यक घोषणा और हलफनामा मांगा गया है।
करेंसी से जुड़ी तकनीक और उसके उत्पादन को बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सप्लाई चेन और तकनीकी प्रक्रियाओं पर नियंत्रण रखना इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।
पॉलीमर शीट में नहीं होगी जानवरों की चर्बी
टेंडर की एक और अहम शर्त एनिमल फैट से जुड़ी है। कंपनियों को प्रमाणित करना होगा कि भारत को सप्लाई की जाने वाली पॉलीमर शीट में जानवरों की चर्बी या उससे संबंधित DNA मौजूद नहीं होगा।
यह शर्त इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अलग-अलग देशों में करेंसी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर पहले विवाद सामने आ चुके हैं। भारत में करेंसी निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्लास्टिक के नोट कागजी नोटों से कैसे अलग होंगे?
पॉलीमर नोट दिखने में सामान्य नोटों जैसे ही हो सकते हैं, लेकिन इनके निर्माण में कागज की जगह एक विशेष प्रकार के पॉलीमर सब्सट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है।
इनकी कुछ प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:
1. ज्यादा टिकाऊ: पॉलीमर नोट पानी और नमी के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इनके जल्दी खराब होने की संभावना कम रहती है।
2. लंबी उम्र: पॉलीमर बैंक नोटों की उम्र सामान्य कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है। इसी वजह से लंबे समय में नोटों की रिप्लेसमेंट लागत कम होने की उम्मीद रहती है।
3. बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स: पॉलीमर नोटों में पारदर्शी विंडो, विशेष प्रिंटिंग और अन्य आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं। इससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो सकता है।
4. पानी से कम नुकसान: जेब या पर्स में रखा नोट बारिश या पानी के संपर्क में आने पर कागजी नोट की तुलना में बेहतर स्थिति में रह सकता है।
5. साफ-सफाई: पॉलीमर सतह को सामान्य कागजी नोट की तुलना में साफ रखना आसान माना जाता है। यही वजह है कि कई देशों ने इसे करेंसी के लिए अपनाया है।
क्या भारत में सभी नोट प्लास्टिक के हो जाएंगे?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शुरुआती स्तर पर ₹10 और ₹20 के नोटों के लिए पॉलीमर सब्सट्रेट की व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है।
टेंडर जारी होना और कंपनियों का बोली लगाना इस दिशा में शुरुआती कदम है। पहले सैंपल की जांच, तकनीकी मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होंगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारत में पॉलीमर नोटों की छपाई किस स्तर पर और कब शुरू होती है।
इसलिए अभी यह मानना सही नहीं होगा कि जल्द ही भारत के सभी कागजी नोट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। फिलहाल फोकस सीमित मूल्यवर्ग के नोटों के पॉलीमर विकल्प को लेकर दिखाई देता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
भारत में बैंक नोटों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। छोटे मूल्यवर्ग के नोट रोजाना लाखों-करोड़ों लेनदेन में इस्तेमाल होते हैं और तेजी से खराब भी होते हैं।
अगर पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलने में सफल रहते हैं, तो इससे नोटों की बार-बार छपाई और उन्हें बदलने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही पानी और नमी वाले क्षेत्रों में करेंसी की उपयोगिता भी बेहतर हो सकती है।
हालांकि, पॉलीमर नोटों की कीमत, छपाई की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव, सुरक्षा मानक और बड़े पैमाने पर उत्पादन की व्यवहारिकता जैसे पहलुओं का मूल्यांकन भी जरूरी होगा।
निष्कर्ष
RBI की सब्सिडियरी BRBNMPL का पॉलीमर सब्सट्रेट के लिए ग्लोबल टेंडर भारत की करेंसी व्यवस्था में संभावित बदलाव का संकेत देता है। ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरुआत की संभावना के बीच De La Rue, CCL Secure और अन्य कंपनियों की भागीदारी ने इस प्रक्रिया को खास बना दिया है।
अगर परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में भारत में ज्यादा टिकाऊ और आधुनिक पॉलीमर बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, अभी यह प्रक्रिया टेंडर और परीक्षण के चरण में है, इसलिए अंतिम फैसला और लागू होने की तारीख का इंतजार करना होगा।


