Market Outlook: लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने राहत की सांस ली। IT और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते Sensex और Nifty बढ़त के साथ बंद हुए। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और Nvidia के मजबूत नतीजों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। अब बाजार की नजरें 31 अगस्त को खुलने वाले कारोबारी सप्ताह पर हैं।
शुक्रवार के कारोबार में Sensex 331 अंक यानी 0.43 फीसदी की बढ़त के साथ 77,264.51 अंक पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 85 अंक यानी 0.35 फीसदी चढ़कर 24,175.65 अंक पर पहुंच गया। बाजार में खरीदारी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दिखाई दिया। BSE 150 MidCap इंडेक्स 0.16 फीसदी और BSE 250 SmallCap इंडेक्स 0.33 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए।
IT और बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार
शुक्रवार की तेजी में IT सेक्टर की प्रमुख कंपनियों की अहम भूमिका रही। Nvidia के मजबूत तिमाही नतीजों और बेहतर आउटलुक के बाद दुनियाभर में टेक्नोलॉजी शेयरों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर भारतीय IT कंपनियों पर भी देखने को मिला।
Sensex की बढ़त में Infosys और HDFC Bank का योगदान प्रमुख रहा। दूसरी ओर, ICICI Bank ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया।
Sensex में TCS, Infosys, Tech Mahindra, HCL Tech और Titan प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं ICICI Bank, UltraTech Cement, Asian Paints और ITC में कमजोरी देखने को मिली।
Nvidia के नतीजों से IT शेयरों को मिला सपोर्ट
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, IT शेयरों में जोरदार खरीदारी के कारण भारतीय बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। Nvidia के शानदार नतीजों और बेहतर आउटलुक से AI से जुड़े निवेश को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
उनका मानना है कि Enterprise AI Deployment और Workflow Integration से जुड़ी कंपनियों को आगे भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, बाजार में खरीदारी व्यापक नहीं रही और निवेशक चुनिंदा शेयरों पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इसका एक बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितता है। निवेशकों की नजर जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर के बयान पर बनी हुई है। इससे अमेरिका में ब्याज दरों और वैश्विक लिक्विडिटी के भविष्य को लेकर तस्वीर कुछ साफ हो सकती है।
अब बाजार का फोकस Earnings Growth पर
घरेलू मोर्चे पर Q1FY27 के नतीजों का सीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में बाजार का ध्यान आने वाले समय में कंपनियों की Earnings Growth पर अधिक रहने की उम्मीद है।
विनोद नायर के अनुसार, घरेलू लिक्विडिटी की स्थिति फिलहाल बाजार को सहारा दे रही है। हालांकि, वेस्ट एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी बाजार के लिए प्रमुख जोखिम हैं।
महंगे क्रूड से भारत की महंगाई, चालू खाते और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए निवेशक मौजूदा स्तरों पर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
FII निवेश में दिख रहा धीरे-धीरे सुधार
ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शमी के मुताबिक, अमेरिकी 10-Year Treasury Yield 4.6-4.7 फीसदी के आसपास बनी हुई है, जो पिछले एक साल के ऊंचे स्तरों के करीब है। इसके बावजूद हाल के हफ्तों में FII निवेश का रुख थोड़ा सकारात्मक हुआ है।
आमतौर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रभावित होता है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में FII की स्थिति में सुधार यह संकेत देता है कि लंबे कंसोलिडेशन के बाद विदेशी निवेशकों का भारतीय इक्विटी की तरफ रुझान धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
घरेलू Retail Investors और DII की मजबूत खरीदारी भी बाजार में किसी बड़ी गिरावट को रोकने में मदद कर रही है।
Small और Midcap में वैल्यूएशन चुनौती
अश्विनी शमी के मुताबिक, बेंचमार्क इंडेक्स फिलहाल एक दायरे में कारोबार कर रहे हैं। Valuation के लिहाज से Smallcap और Midcap शेयरों में प्रीमियम काफी ज्यादा है।
Nifty 100 का P/E करीब 20 गुना है, जबकि Smallcap और Midcap इंडेक्स का P/E लगभग 34 गुना और 30 गुना बताया जा रहा है। इसका मतलब है कि इन सेगमेंट में स्टॉक चुनते समय निवेशकों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर में H2 Earnings, कच्चे तेल की कीमतें और RBI का Liquidity Stance शामिल रहेंगे।
उन्होंने अच्छे वैल्यूएशन वाले चुनिंदा BFSI और Financial Services शेयरों में अवसर की संभावना जताई है। इसके अलावा Infrastructure, Power और Business Services सेक्टर को भी Capex में सुधार और Operating Leverage से फायदा मिलने की उम्मीद है।
31 अगस्त को बाजार में रह सकती है Volatility
PL Capital के एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट के मुताबिक, दो लगातार सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को बाजार में रिकवरी देखने को मिली। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल संकेतों ने बाजार को सपोर्ट किया।
हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेड के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है।
मंथली एक्सपायरी के दौरान Closing Auction Session में आई तेज हलचल ने भी निवेशकों को सतर्क किया है। ऐसे में अगले कारोबारी सत्र में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Nifty के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम
रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP-Research अजीत मिश्रा के अनुसार, शुक्रवार को Nifty सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और अंत में 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ।
Sector-wise प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के मजबूत नतीजों के बाद Global Technology Stocks में आई तेजी के चलते IT सेक्टर सबसे मजबूत रहा। Pharma और Metal सेक्टर में भी मजबूती दिखी, जबकि FMCG और Auto शेयरों पर दबाव रहा।
Nifty के अहम Support और Resistance
टेक्निकल चार्ट के लिहाज से आने वाले सत्र में 24,100-24,000 का जोन Nifty के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र रहेगा।
- पहला सपोर्ट: 24,100-24,000
- अगला सपोर्ट: 23,800
- मजबूत सपोर्ट: 23,650
- पहला Resistance: 24,200
- अगला Resistance: 24,300-24,400
अगर Nifty 24,000 के नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है और इंडेक्स 23,800 से लेकर 23,650 तक फिसल सकता है। वहीं, 24,200 के ऊपर मजबूती मिलने पर 24,300-24,400 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बन सकता है।
31 अगस्त को निवेशकों की रणनीति क्या हो?
मौजूदा समय में बाजार कई घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ घरेलू लिक्विडिटी और IT शेयरों में मजबूती बाजार को सपोर्ट दे रही है, तो दूसरी ओर क्रूड ऑयल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, जियोपॉलिटिकल तनाव और फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता जोखिम बढ़ा रही है।
ऐसे माहौल में ट्रेडर्स के लिए Index में आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय महत्वपूर्ण Support और Resistance levels पर नजर रखना बेहतर हो सकता है। निवेशकों के लिए मजबूत Fundamentals वाले चुनिंदा शेयरों पर फोकस और उचित Risk Management महत्वपूर्ण रहेगा।
नोट: यह लेख बाजार विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों और उपलब्ध बाजार आंकड़ों पर आधारित है। किसी भी शेयर या निवेश में फैसला लेने से पहले अपनी रिस्क क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखें।
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