नई दिल्ली: दुनिया की अर्थव्यवस्था अगले साल सुस्ती के दौर में प्रवेश कर सकती है। Moody’s Analytics की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि (Global Growth) घटकर 2.5% रह सकती है। हालांकि, 2027 में इसके 2.8% तक सुधरने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा, लेकिन उसकी विकास दर भी कुछ हद तक धीमी पड़ सकती है।
‘Global Outlook: Running Hot, Running Cold‘ शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक बाधाएं, ऊंची महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही हैं।
Highlights
- 2026 में ग्लोबल ग्रोथ 2.5% रहने का अनुमान
- 2027 में 2.8% तक सुधार की संभावना
- भारत की आर्थिक वृद्धि में भी हल्की सुस्ती के संकेत
- AI निवेश से वैश्विक मंदी का असर सीमित हुआ
- मिडिल ईस्ट तनाव और महंगाई बने बड़ी चुनौती
- अमेरिका और चीन की विकास दर भी रहेगी दबाव में
ग्लोबल इकोनॉमी धीमी रफ्तार की ओर
मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल ऐसे दौर में पहुंच रही है जहां विकास की गति पहले के मुकाबले धीमी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बने भू-राजनीतिक संघर्ष, वैश्विक व्यापार में रुकावटें और महंगाई का दबाव निवेश और उपभोक्ता मांग दोनों पर असर डाल रहे हैं।
हालांकि दुनिया की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह मंदी में जाने की संभावना कम बताई गई है, लेकिन रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात तेजी से बदल सकते हैं और जोखिम अभी भी नीचे की ओर बने हुए हैं।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आने वाले वर्षों में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। इसके बावजूद वैश्विक मांग कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रफ्तार घटने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक निवेश धीमा पड़ता है या निर्यात प्रभावित होता है तो भारत की GDP ग्रोथ में हल्की नरमी देखी जा सकती है। हालांकि मजबूत घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भारत को अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में बनाए रख सकते हैं।
AI बूम बना सबसे बड़ा सहारा
रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि Artificial Intelligence (AI) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
AI से जुड़ी मांग बढ़ने के कारण दुनिया भर में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश तेजी से बढ़ा है। इससे खासतौर पर एशिया की टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्थाओं के निर्यात को मजबूती मिली है।
हालांकि यह फायदा सभी देशों को समान रूप से नहीं मिला।
‘K-शेप्ड’ वर्ल्ड इकोनॉमी का क्या मतलब?
मूडीज एनालिटिक्स ने मौजूदा वैश्विक स्थिति को “K-Shaped World Economy” बताया है।
इसका अर्थ है कि दुनिया के कुछ देश और उद्योग तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कई अन्य देश और सेक्टर पीछे छूटते जा रहे हैं।
टेक्नोलॉजी, AI, चिप निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े देशों को फायदा मिल रहा है, जबकि ऊर्जा लागत, कमजोर मांग और महंगाई से जूझ रहे उद्योग अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव और महंगाई बनी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसके चलते कच्चे तेल, गैस और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कई देशों में महंगाई फिर तेज हो सकती है।
इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता और व्यापारिक तनाव भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं।
सेंट्रल बैंकों के सामने कठिन फैसला
मूडीज का कहना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के सामने चुनौती यह है कि वे महंगाई पर नियंत्रण रखें या आर्थिक विकास को सहारा दें।
यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखी जाती हैं तो निवेश और उपभोक्ता मांग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं ब्याज दरों में जल्द कटौती करने से महंगाई फिर बढ़ने का खतरा बना रहेगा।
अमेरिका और चीन की अर्थव्यवस्था का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार—
- अमेरिका की GDP वृद्धि दर 2026 और 2027 में औसतन 2% रहने का अनुमान है।
- चीन की विकास दर इस वर्ष 4.6% और अगले वर्ष 4.2% रहने की संभावना जताई गई है।
यह संकेत देता है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी पहले जैसी तेज रफ्तार देखने को नहीं मिलेगी।
IMF और वर्ल्ड बैंक ने भी जताई चिंता
मूडीज की रिपोर्ट से पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी 2026 के लिए अपने वैश्विक विकास अनुमान को 3.1% से घटाकर 3% कर चुका है।
वहीं विश्व बैंक ने भी 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि का अनुमान घटाकर 2.5% कर दिया था। विश्व बैंक ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े जोखिमों को प्रमुख कारण बताया था।
क्या वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है?
मूडीज एनालिटिक्स का मानना है कि फिलहाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के पूरी तरह पटरी से उतरने की संभावना कम है। हालांकि, वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या व्यापारिक विवाद गहराते हैं तो आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह समय घरेलू मांग, निवेश और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखने का होगा ताकि वैश्विक सुस्ती का असर सीमित किया जा सके।


