नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने भारत की आयात पर निर्भरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता, आयात बिल में बढ़ोतरी और रुपये पर दबाव ने सरकार को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। अब केंद्र सरकार ऐसे उत्पादों की पहचान कर रही है जिन्हें देश में ही प्रतिस्पर्धी लागत पर तैयार कर विदेशी आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
सरकार ने मंत्रालयों को दिया बड़ा निर्देश
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कई प्रमुख मंत्रालयों को उन वस्तुओं की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है जिनके लिए भारत अभी भी बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। इन उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सब्सिडी, प्रोडक्शन इंसेंटिव और अन्य प्रोत्साहन योजनाओं पर विचार किया जा रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय 100 से अधिक ऐसे उत्पादों की सूची तैयार कर रहा है, जिनका निर्माण भारत में बढ़ाया जा सकता है। इनमें शामिल हैं—
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- केमिकल्स
- आवश्यक दवाएं (API)
- उर्वरक (फर्टिलाइजर)
- सेमीकंडक्टर
- ऑटोमोबाइल पार्ट्स
- मशीनरी और औद्योगिक उपकरण
इन क्षेत्रों में आयात कम कर घरेलू उद्योग को मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
ईरान युद्ध ने क्यों बढ़ाई चिंता?
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और रुपये की मजबूती पर पड़ता है।
हाल के महीनों में ऊर्जा आयात महंगा होने से रुपये पर दबाव बढ़ा और विदेशी मुद्रा खर्च भी तेजी से बढ़ा।
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री अभी भी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और कंपोनेंट्स के लिए विदेशों, विशेषकर चीन, पर निर्भर है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 775 अरब डॉलर मूल्य का आयात किया, जिसमें लगभग 20% हिस्सा अकेले चीन से आया। यदि किसी कारण सप्लाई चेन बाधित होती है तो इसका असर सीधे भारतीय उद्योगों पर पड़ता है।
बीते वर्षों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में ऐसी चुनौतियां देखने को मिली थीं, जब वैश्विक सप्लाई बाधित होने से उत्पादन प्रभावित हुआ।
1.9 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं को मिली मंजूरी
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार पहले ही कई बड़े फैसले ले चुकी है। हाल ही में कैबिनेट ने लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है।
इनका उद्देश्य है—
- सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना
- स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना
- इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में आत्मनिर्भरता
- उर्वरक उत्पादन क्षमता का विस्तार
सरकार का मानना है कि इससे रोजगार बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी।
शक्तिकांत दास की अगुवाई में तैयार हो रहा ब्लूप्रिंट
सूत्रों के मुताबिक पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में एक टास्क फोर्स इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन (Import Substitution) का विस्तृत रोडमैप तैयार कर रही है।
इसका उद्देश्य है—
- व्यापार घाटा कम करना
- विदेशी मुद्रा की बचत
- घरेलू उद्योग को मजबूत बनाना
- भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना
- चीन पर निर्भरता घटाना
सरकार निजी और विदेशी निवेशकों को नई फैक्ट्रियां लगाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर सकती है।
किन क्षेत्रों में आयात कम करना आसान नहीं?
सरकार का मानना है कि कुछ उत्पाद ऐसे हैं जिनमें आयात कम करना फिलहाल बेहद कठिन होगा। इनमें शामिल हैं—
- कच्चा तेल
- सोना
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
हालांकि कृषि सुधारों के जरिए दालों और खाद्य तेलों के आयात में कमी लाने की संभावनाएं तलाशने का काम जारी है।
फर्टिलाइजर आयात घटाने का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने अगले तीन वर्षों में उर्वरक आयात में 30% तक कमी लाने का लक्ष्य रखा है।
इसके लिए कई कदम प्रस्तावित हैं—
- बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को दोबारा शुरू करना
- नए प्लांट्स का निर्माण
- घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना
- अगले वर्ष तक कई परियोजनाओं को पूरा करना
यदि यह योजना सफल रहती है तो भारत की विदेशी निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक संकट बार-बार यह संकेत दे रहे हैं कि केवल आयात पर निर्भर रहना लंबी अवधि में जोखिम भरा हो सकता है। यदि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, केमिकल्स, उर्वरक और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सफल होता है, तो इससे न केवल आयात बिल घटेगा बल्कि रोजगार, निवेश और निर्यात को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


