नई दिल्ली: भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और एविएशन सेक्टर में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है। महाराष्ट्र सरकार ने देश का पहला अपतटीय (Offshore) हवाई अड्डा विकसित करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना महाराष्ट्र के पालघर जिले के कोरे बीच के पास प्रस्तावित है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह एयरपोर्ट केवल एक नया विमानन केंद्र नहीं होगा, बल्कि वधावन बंदरगाह, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, नए एक्सप्रेसवे और समुद्री संपर्क परियोजनाओं के साथ मिलकर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेश, उद्योग, रोजगार और रियल एस्टेट सभी क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।
क्या होता है अपतटीय (Offshore) हवाई अड्डा?
ऑफशोर एयरपोर्ट ऐसा हवाई अड्डा होता है जिसे समुद्र के भीतर कृत्रिम द्वीप (Artificial Island) या विशेष प्लेटफॉर्म पर बनाया जाता है। इसका उद्देश्य बड़े शहरों में जमीन की कमी की समस्या को दूर करना और बढ़ते हवाई यातायात को संभालना होता है।
दुनिया के कई विकसित देशों ने इस मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया है। जापान का कंसाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दक्षिण कोरिया का इंचियोन एयरपोर्ट इसके प्रमुख उदाहरण हैं। अब भारत भी इसी दिशा में पहला कदम बढ़ाने जा रहा है।
पालघर के कोरे बीच के पास बनेगा एयरपोर्ट
प्रस्तावित एयरपोर्ट महाराष्ट्र के पालघर जिले में कोरे बीच के पास विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के साथ-साथ उत्तान-विरार सी लिंक के विस्तार की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि मुंबई से एयरपोर्ट तक सीधी और तेज़ कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सके।
प्रारंभिक योजना के अनुसार यह एयरपोर्ट हर साल लगभग 9 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता वाला हो सकता है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।
वधावन बंदरगाह के साथ बनेगा नया आर्थिक हब
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे प्रस्तावित वधावन बंदरगाह के साथ जोड़ा जा रहा है। यह बंदरगाह भविष्य में भारत के सबसे बड़े डीप-सी पोर्ट्स में शामिल हो सकता है।
एयरपोर्ट और बंदरगाह के एक साथ विकसित होने से—
- लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
- निर्यात-आयात गतिविधियां तेज होंगी।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार आसान होगा।
- औद्योगिक निवेश बढ़ेगा।
- सप्लाई चेन और माल परिवहन की लागत कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी भारत को वैश्विक व्यापार का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे
वधावन बंदरगाह और उससे जुड़ी औद्योगिक परियोजनाओं से लगभग 10 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
इन नौकरियों के कारण क्षेत्र में—
- नए आवासीय प्रोजेक्ट विकसित होंगे।
- होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का विस्तार होगा।
- रिटेल और कमर्शियल मार्केट विकसित होंगे।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग बढ़ेगी।
- स्थानीय कारोबार को नई गति मिलेगी।
इससे पालघर और आसपास के क्षेत्रों का आर्थिक विकास तेज़ हो सकता है।
रियल एस्टेट बाजार को मिलेगा बड़ा फायदा
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े एयरपोर्ट हमेशा आसपास के क्षेत्रों की संपत्ति कीमतों को प्रभावित करते हैं।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां एयरपोर्ट निर्माण शुरू होने से पहले ही उल्वे, पनवेल और खारघर जैसे इलाकों में जमीन और मकानों की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी।
ऐसी ही संभावनाएं अब पालघर और विरार क्षेत्र में भी दिखाई दे रही हैं।
डेवलपर्स को क्यों दिख रहा बड़ा अवसर?
नवानी ग्रुप के निदेशक श्रवण नवानी का कहना है कि इस क्षेत्र का विकास लंबे समय से तय माना जा रहा था। उनके अनुसार, सवाल केवल यह था कि यह विकास कब और किस स्तर पर होगा।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में कई सरकारी एजेंसियों ने इस क्षेत्र को लेकर बड़े फैसले लिए हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- CIDCO द्वारा वधावन बंदरगाह से जुड़ी औद्योगिक भूमि के लिए निविदाएं जारी करना।
- MMRDA को 446 गांवों के लिए विशेष योजना प्राधिकरण नियुक्त करना।
- राज्य सरकार द्वारा ऑफशोर एयरपोर्ट की DPR प्रक्रिया शुरू करना।
- समुद्री संपर्क परियोजनाओं को आगे बढ़ाना।
इन सभी परियोजनाओं से निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
उत्तान-विरार सी लिंक बढ़ाएगा कनेक्टिविटी
सरकार उत्तान-विरार सी लिंक का विस्तार कर एयरपोर्ट को सीधे मुंबई से जोड़ने पर भी विचार कर रही है।
यदि यह योजना पूरी होती है तो—
- मुंबई से यात्रा समय कम होगा।
- एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होगी।
- लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा।
- उद्योगों और निवेशकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
नया विकास गलियारा तैयार होगा
एयरपोर्ट, वधावन बंदरगाह, बुलेट ट्रेन और हाईवे परियोजनाओं के साथ मिलकर उत्तरी मुंबई महानगर क्षेत्र में एक नया आर्थिक गलियारा तैयार हो सकता है।
इससे—
- औद्योगिक निवेश बढ़ेगा।
- नए स्मार्ट शहर विकसित हो सकते हैं।
- निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
- पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अभी DPR चरण में है परियोजना
फिलहाल यह परियोजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार किए जाने के चरण में है। इसके बाद पर्यावरणीय मंजूरी, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय स्वीकृति और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने में अभी समय लग सकता है, लेकिन राज्य सरकार की पहल यह संकेत देती है कि भारत समुद्र आधारित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है।
भारत के लिए क्यों है यह परियोजना महत्वपूर्ण?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में आधुनिक एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क भविष्य की आर्थिक जरूरत बन चुके हैं।
यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो—
- भारत को पहला ऑफशोर एयरपोर्ट मिलेगा।
- पश्चिमी भारत का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा।
- मुंबई पर एयर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
- लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता और मजबूत होगी।
यही कारण है कि महाराष्ट्र का यह प्रस्तावित अपतटीय हवाई अड्डा केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।


