Vande Bharat Update: रेलवे उठा सकता है बड़ा कदम
Vande Bharat Update: वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले समय में सीटों के डिजाइन में बदलाव देखने को मिल सकता है। रेलवे के सीनियर इंजीनियरों ने ट्रेन के एग्जीक्यूटिव क्लास में मिलने वाली 180 डिग्री रोटेटिंग सीटों को हटाने का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव के तहत सीटों को घूमने वाली व्यवस्था के बजाय स्थायी रूप से फिक्स करने की सिफारिश की गई है। रेलवे का मानना है कि इससे सीटों की मजबूती बढ़ाने, रखरखाव आसान करने और कोच के अंदर उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू करने को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
क्यों हटाई जा सकती हैं 180 डिग्री घूमने वाली सीटें?
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों ने रोटेटिंग सीटों में इस्तेमाल होने वाले मैकेनिज्म को लेकर कुछ व्यावहारिक समस्याएं सामने रखी हैं।
मौजूदा वंदे भारत एक्सप्रेस के एग्जीक्यूटिव क्लास में यात्रियों को सीट का रुख बदलने की सुविधा मिलती है। सीट को ट्रेन की दिशा में या दूसरी दिशा में घुमाया जा सकता है। इसके अलावा सीट में रिक्लाइनिंग की सुविधा भी मौजूद है।
इस व्यवस्था के लिए सीट के नीचे और आसपास अतिरिक्त मैकेनिकल कंपोनेंट्स और क्लीयरेंस की जरूरत होती है। इंजीनियरों के मुताबिक, यही मैकेनिज्म लंबे समय में पुर्जों के घिसने या ढीले होने जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
इसका सीधा असर ट्रेन के मेंटेनेंस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर पड़ सकता है।
रेलवे इंजीनियरों की बैठक में उठा मुद्दा
रोटेटिंग सीटों को हटाने का सुझाव हाल ही में आयोजित प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स के सम्मेलन में चर्चा का विषय बना।
बैठक में कोच उत्पादन इकाइयों की तरफ से सुझाव दिया गया कि एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटों को घूमने वाली व्यवस्था के बजाय पूरी तरह फिक्स किया जाए। इसके लिए शताब्दी जैसी पारंपरिक प्रीमियम ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली फिक्स्ड सीट व्यवस्था को एक विकल्प के तौर पर देखा गया।
रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए सम्मेलन के मिनट्स में भी इस सुझाव का उल्लेख किया गया है। इसमें वंदे भारत के एग्जीक्यूटिव क्लास कोचों में सीटों को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए रोटेशन फीचर को समाप्त करने की संभावना पर विचार करने की बात कही गई है।
इस प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई के प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर को दी गई है।
फिक्स सीटों से बढ़ सकती है यात्रियों की क्षमता
रोटेटिंग सीटों को हटाने के पीछे केवल मजबूती और मेंटेनेंस ही वजह नहीं है। रेलवे के लिए कोच की क्षमता बढ़ाना भी एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।
घूमने वाली सीटों के मैकेनिज्म के कारण सीटों के आसपास कुछ अतिरिक्त जगह छोड़नी पड़ती है। अगर सीटों को फिक्स कर दिया जाता है तो इस जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंजीनियरों के सुझाव के अनुसार, पंक्तियों के बीच उपलब्ध जगह को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करके एग्जीक्यूटिव क्लास कोच में एक अतिरिक्त सीट रो जोड़ने की संभावना बन सकती है।
अगर ऐसा होता है तो एक कोच में यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। बड़ी संख्या में वंदे भारत ट्रेन सेटों में यह बदलाव लागू होने पर रेलवे की यात्री क्षमता और टिकट से होने वाली कमाई, दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
सीटों को फिक्स करने से क्या फायदे होंगे?
प्रस्तावित बदलाव के पीछे रेलवे को कई संभावित फायदे दिखाई दे रहे हैं।
पहला फायदा सीटों की मजबूती से जुड़ा है। सीट को फर्श के साथ स्थायी रूप से फिक्स करने से उसका स्ट्रक्चर ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है।
दूसरा फायदा मेंटेनेंस का हो सकता है। रोटेशन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले अतिरिक्त मैकेनिकल पार्ट्स कम होने से टूट-फूट और खराबी की संभावना घट सकती है।
तीसरा फायदा जगह के बेहतर इस्तेमाल के रूप में सामने आ सकता है। सीट घुमाने के लिए जरूरी अतिरिक्त स्पेस बचने से कोच के लेआउट को ज्यादा प्रभावी तरीके से डिजाइन किया जा सकता है।
चौथा फायदा रेलवे के राजस्व से जुड़ा हो सकता है। यदि प्रत्येक कोच में अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाती हैं, तो लंबी अवधि में अधिक यात्रियों को यात्रा की सुविधा देने के साथ रेलवे की कमाई भी बढ़ सकती है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
अगर प्रस्ताव लागू होता है तो यात्रियों को एक सुविधा का नुकसान जरूर हो सकता है। मौजूदा एग्जीक्यूटिव क्लास में यात्री अपनी सीट को 180 डिग्री तक घुमा सकते हैं। फिक्स्ड सीट होने के बाद यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
हालांकि, इसके बदले रेलवे सीटों को ज्यादा मजबूत और मेंटेनेंस के लिहाज से आसान बनाने पर जोर दे सकता है। यानी बदलाव का मुख्य उद्देश्य प्रीमियम सुविधा के बजाय विश्वसनीयता, क्षमता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्राथमिकता देना होगा।
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ
यह ध्यान रखना जरूरी है कि रोटेटिंग सीट हटाने का फैसला फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। रेलवे बोर्ड और संबंधित उत्पादन इकाइयों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बदलाव को मंजूरी मिलती है या नहीं।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो भविष्य में बनने वाले वंदे भारत कोचों के एग्जीक्यूटिव क्लास में फिक्स्ड सीटों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वंदे भारत के मौजूदा प्रीमियम डिजाइन में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, रेलवे का यह संभावित कदम यात्रियों को मिलने वाली फ्लेक्सिबिलिटी को कम कर सकता है, लेकिन इसके बदले सीटों की मजबूती, आसान रखरखाव और कोच की क्षमता बढ़ाने पर फोकस किया जा सकता है।


