नई दिल्ली। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी ITC लिमिटेड ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव पुरी के वेतन का ब्योरा जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में संजीव पुरी का कुल वेतन 6.8 प्रतिशत घटकर 23.91 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने बताया कि इस कमी की मुख्य वजह परफॉर्मेंस-बेस्ड बोनस और लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव/कमीशन में आई गिरावट रही।
बोनस और इंसेंटिव घटने से कम हुआ वेतन
वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में संजीव पुरी को कुल 23.91 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला। इसमें—
- बेसिक/कंसोलिडेटेड सैलरी: 3.85 करोड़ रुपये
- अन्य सुविधाएं (Perquisites): 88 लाख रुपये
- परफॉर्मेंस बोनस एवं लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव/कमीशन: 19.17 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2025 में उनका कुल वेतन 25.66 करोड़ रुपये था। उस दौरान उन्हें 3.53 करोड़ रुपये की बेसिक सैलरी, 73 लाख रुपये की अन्य सुविधाएं और 21.39 करोड़ रुपये का परफॉर्मेंस बोनस एवं लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव मिला था। इसी बोनस में कमी आने के कारण कुल वेतन में 6.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
शेयरहोल्डिंग और स्टॉक ऑप्शन
31 मार्च 2026 तक संजीव पुरी के पास ITC के 3,00,591 इक्विटी शेयर (प्रत्येक ₹1 अंकित मूल्य) थे। इसके अलावा उन्हें 1,01,000 स्टॉक ऑप्शन भी आवंटित किए गए।
वहीं, 31 मार्च 2025 तक उनके पास अकेले या संयुक्त रूप से 4,52,843 शेयर थे और उस वर्ष उन्हें 1,34,500 स्टॉक ऑप्शन प्रदान किए गए थे।
FY26 में ITC का प्रदर्शन कैसा रहा?
ITC ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू 10.1 प्रतिशत बढ़कर 80,867.49 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, टैक्स के बाद शुद्ध लाभ (PAT) 20,286.42 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी के विभिन्न व्यवसायों में वृद्धि का असर नॉन-सिगरेट एफएमसीजी कारोबार पर भी देखने को मिला। FY26 के दौरान इस सेगमेंट का वार्षिक उपभोक्ता खर्च 37,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है।
30 से अधिक भारतीय ब्रांड्स का मजबूत पोर्टफोलियो
ITC ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि कंपनी के पास 30 से अधिक वर्ल्ड-क्लास भारतीय ब्रांड्स का पोर्टफोलियो है। ये ब्रांड मुख्य रूप से ऑर्गेनिक ग्रोथ रणनीति और विभिन्न व्यवसायों के बीच तालमेल (Synergies) के जरिए विकसित किए गए हैं।
कंपनी के अनुसार, इन ब्रांड्स का संयुक्त वार्षिक उपभोक्ता खर्च 37,000 करोड़ रुपये से अधिक है और ये देशभर के लगभग 28 करोड़ परिवारों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं।
क्या संकेत देती है वेतन में कटौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कॉरपोरेट्स में शीर्ष अधिकारियों के वेतन का एक बड़ा हिस्सा प्रदर्शन आधारित होता है। ऐसे में यदि बोनस या लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव घटता है तो कुल पारिश्रमिक पर सीधा असर पड़ता है। ITC के मामले में भी बेसिक वेतन में बढ़ोतरी हुई, लेकिन बोनस और इंसेंटिव में कमी के कारण कुल वेतन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कम रहा।
हालांकि, कंपनी का राजस्व और नॉन-सिगरेट एफएमसीजी कारोबार दोनों मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदर्शन आधारित भुगतान फिर से बढ़ने की संभावना बनी रह सकती है।


