IRFC Share Price: एक समय था जब रेलवे से जुड़े शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही थी और IRFC भी निवेशकों के पसंदीदा शेयरों में शामिल था। ₹200 के पार पहुंचने के बाद भी इस सरकारी कंपनी के शेयर में खरीदारी का उत्साह बना हुआ था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। ₹100 के नीचे पहुंचने के बाद भी शेयर में मजबूत खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं और यह अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 61% नीचे कारोबार कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में दबाव के बावजूद कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन में कई मजबूत संकेत दिखाई दिए हैं। जून 2026 तिमाही में IRFC का टोटल इनकम, नेटवर्थ और शुद्ध मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। कंपनी की एसेट क्वालिटी भी मजबूत बनी हुई है और इसका नेट NPA जीरो है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कंपनी के फंडामेंटल में कई अच्छी बातें हैं तो फिर शेयर लगातार दबाव में क्यों है? क्या ₹100 से नीचे IRFC निवेश का मौका बन रहा है या अभी और गिरावट की गुंजाइश है? आइए समझते हैं।
IRFC Share Price: दो बड़ी वजहों से दबाव में हैं शेयर
IRFC के शेयरों में कमजोरी के पीछे कई कारण हैं, लेकिन मौजूदा समय में दो प्रमुख फैक्टर निवेशकों के सेंटीमेंट पर सबसे ज्यादा असर डाल रहे हैं।
1. लेंडिंग बुक की रफ्तार हुई धीमी
IRFC का मुख्य कारोबार रेलवे और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करना है। ऐसे में कंपनी के लिए उसकी लोन बुक और मार्जिन काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
जून 2026 तिमाही के अंत में कंपनी का AUM करीब ₹4.79 लाख करोड़ था। मार्च 2026 के अंत में यह लगभग ₹4.85 लाख करोड़ था। यानी तिमाही आधार पर इसमें कमी देखने को मिली।
हालांकि ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 19.46% बढ़कर ₹8,261.11 करोड़ हो गया, लेकिन ब्याज से होने वाली कमाई में गिरावट चिंता का विषय रही। जून तिमाही में ब्याज से आय 23.36% घटकर ₹1,147.56 करोड़ रह गई।
कंपनी को इस दौरान लीज इनकम से काफी सपोर्ट मिला। लीज इनकम सालाना आधार पर 31.29% बढ़कर ₹7,094.47 करोड़ पहुंच गई।
यही बदलाव IRFC के बिजनेस मॉडल में एक महत्वपूर्ण संकेत भी देता है। कंपनी पारंपरिक लेंडिंग के अलावा रेलवे इकोसिस्टम के दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।
दूसरी तरफ, कंपनी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर 1.53% से घटकर 1.48% रह गया।
लेंडिंग बिजनेस करने वाली कंपनी के लिए लोन बुक में कमी और NIM का दबाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। हालांकि मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 के अंत तक NIM को 1.6% से ऊपर ले जाने और 2030 तक इसे 2% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
2. सरकार की हिस्सेदारी बनी बड़ी चिंता
IRFC के शेयरों पर दबाव की दूसरी बड़ी वजह सरकार की हिस्सेदारी से जुड़ी है।
जून 2026 तिमाही के अंत में कंपनी में भारत सरकार की हिस्सेदारी करीब 82.9% थी। सरकार ने जून में ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए अपनी कुछ हिस्सेदारी कम भी की थी।
यहीं से बाजार में भविष्य में और हिस्सेदारी बिक्री की आशंका पैदा होती है।
किसी भी लिस्टेड कंपनी में न्यूनतम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग की आवश्यकता होती है। ऐसे में IRFC में सरकार के पास अभी भी अपनी हिस्सेदारी घटाने की पर्याप्त गुंजाइश है।
निवेशकों के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर भविष्य में सरकार फिर से बड़ी हिस्सेदारी बाजार में बेचती है तो शेयर की सप्लाई बढ़ सकती है। मांग की तुलना में सप्लाई ज्यादा होने पर शेयर की कीमत पर दबाव आना स्वाभाविक है।
IRFC की कहानी में यह एक अहम अंतर है। 2021 में लिस्टिंग से पहले कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 100% थी। IPO के बाद यह हिस्सेदारी करीब 86.36% रह गई थी। अब यह घटकर करीब 82.9% है।
फिर IRFC के लिए अच्छी खबर क्या है?
शेयर में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के सभी फंडामेंटल कमजोर हो गए हैं। वास्तव में IRFC के कुछ ऐसे मजबूत पक्ष हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जीरो NPA सबसे बड़ा मजबूत पक्ष
IRFC की सबसे बड़ी ताकत इसकी एसेट क्वालिटी है। कंपनी का नेट NPA जीरो है।
एक वित्तीय कंपनी के लिए यह काफी महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि कंपनी के लोन पोर्टफोलियो में खराब कर्ज की समस्या फिलहाल बेहद नियंत्रित स्थिति में है।
रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स और सरकारी सपोर्ट वाले बिजनेस मॉडल की वजह से IRFC की क्रेडिट प्रोफाइल भी बाजार में अलग पहचान रखती है।
हालांकि निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि जीरो NPA अपने आप में शेयर खरीदने की गारंटी नहीं है। शेयर का प्रदर्शन वैल्यूएशन, ग्रोथ, मार्जिन, भविष्य की कमाई और बाजार के सेंटीमेंट समेत कई चीजों पर निर्भर करता है।
लीज इनकम में तेज ग्रोथ क्यों महत्वपूर्ण है?
IRFC धीरे-धीरे सिर्फ पारंपरिक लेंडिंग मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय रेलवे इकोसिस्टम से जुड़े मोबिलिटी और अलाइड सेक्टर्स में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है।
इसका असर कंपनी की लीज इनकम में दिखाई देता है।
जून 2026 तिमाही में लीज इनकम सालाना आधार पर 31% से ज्यादा बढ़ी। कंपनी के कुल रेवेन्यू को इस आय से काफी सपोर्ट मिला।
अगर आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी लीज और दूसरे कारोबारों से आय को लगातार बढ़ाने में सफल रहती है तो इससे पारंपरिक ब्याज आय पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
यही वजह है कि IRFC के लिए भविष्य की ग्रोथ का एक अहम ट्रिगर सिर्फ AUM बढ़ना नहीं, बल्कि कमाई के स्रोतों में विविधता और मार्जिन में सुधार भी है।
FY27 के लिए मैनेजमेंट का क्या लक्ष्य है?
कंपनी मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 के अंत तक ₹5 लाख करोड़ के AUM का लक्ष्य रखा है।
इसके साथ NIM को 1.6% से ऊपर ले जाने का भी लक्ष्य है।
अगर कंपनी इन लक्ष्यों को हासिल करती है और उसके बाद 2030 तक NIM को 2% तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ती है तो यह कंपनी की कमाई की क्षमता के लिए सकारात्मक हो सकता है।
लेकिन यहां निवेशकों को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए। मैनेजमेंट के लक्ष्य भविष्य के अनुमान होते हैं और उनका हासिल होना कई कारोबारी एवं बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
₹26 से ₹229 तक पहुंचा था शेयर
IRFC के शेयरों की कहानी बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है।
कंपनी का करीब ₹4,633 करोड़ का IPO आया था और निवेशकों को शेयर ₹26 के भाव पर जारी किए गए थे।
29 जनवरी 2021 को शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग करीब 4% डिस्काउंट पर हुई। शुरुआती दौर में शेयर कमजोर रहा और 20 जनवरी 2022 को यह BSE पर ₹19.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
इसके बाद IRFC में जबरदस्त तेजी आई। रेलवे और सरकारी कंपनियों से जुड़े शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने के साथ IRFC भी तेजी से ऊपर गया।
15 जुलाई 2024 को BSE पर शेयर ने ₹229.05 का रिकॉर्ड हाई बनाया।
यानी रिकॉर्ड लो से लेकर रिकॉर्ड हाई तक शेयर ने निवेशकों को बेहद बड़ा रिटर्न दिया। लेकिन इसके बाद कहानी पलट गई और शेयर लगातार दबाव में आने लगा।
एक साल में भी बदली पूरी तस्वीर
29 दिसंबर 2025 को BSE पर IRFC का शेयर करीब ₹137.10 के स्तर पर था, जिसे उस समय एक साल का हाई बताया गया।
इसके बाद अगले कुछ महीनों में शेयर में लगातार कमजोरी देखने को मिली और 24 जुलाई 2026 को यह ₹86.09 तक पहुंच गया। यह उस समय एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
इस तरह 29 दिसंबर 2025 के स्तर से करीब सात महीनों में शेयर लगभग 37% टूट गया।
वहीं, ₹229.05 के रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो शेयर काफी नीचे आ चुका है। यही वजह है कि मौजूदा स्तर पर कई निवेशकों की नजर IRFC पर बनी हुई है।
क्या ₹100 के नीचे IRFC खरीदने का मौका है?
यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है।
एक तरफ कंपनी की एसेट क्वालिटी मजबूत है, NPA जीरो है, मुनाफा बढ़ रहा है और लीज इनकम में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है।
दूसरी तरफ AUM में तिमाही गिरावट, NIM में कमी और सरकार की संभावित हिस्सेदारी बिक्री जैसी चिंताएं शेयर पर दबाव डाल रही हैं।
इसलिए सिर्फ यह देखकर कि शेयर ₹200 या ₹229 से गिरकर ₹100 के नीचे आ गया है, इसे अपने आप सस्ता मान लेना सही रणनीति नहीं होगी।
निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में AUM को किस गति से बढ़ाती है, NIM में कितना सुधार आता है, लीज इनकम की ग्रोथ बनी रहती है या नहीं और सरकार की हिस्सेदारी बिक्री का क्या असर पड़ता है।
IRFC में आगे इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर
आने वाले समय में IRFC के शेयर के लिए कुछ फैक्टर बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे:
- AUM का ₹5 लाख करोड़ के लक्ष्य की ओर बढ़ना
- NIM का 1.6% से ऊपर जाना
- लीज इनकम में लगातार ग्रोथ
- मुनाफे की रफ्तार
- सरकार की हिस्सेदारी बिक्री
- रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई फाइनेंसिंग डिमांड
- बाजार में PSU और रेलवे शेयरों का सेंटीमेंट
अगर इनमें से सकारात्मक संकेत लगातार दिखाई देते हैं तो शेयर में निवेशकों का भरोसा वापस आ सकता है। वहीं, अगर AUM और मार्जिन पर दबाव जारी रहता है या सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से बाजार में सप्लाई बढ़ती है तो शेयर पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।
निष्कर्ष: गिरावट को सिर्फ ‘सस्ता’ समझना सही नहीं
IRFC की मौजूदा स्थिति को देखें तो कंपनी और शेयर की कहानी में बड़ा अंतर नजर आता है। कंपनी के फंडामेंटल में कई मजबूत पहलू हैं, लेकिन शेयर की कीमत फिलहाल कई चिंताओं को डिस्काउंट कर रही है।
जीरो NPA, मजबूत एसेट क्वालिटी, बढ़ता मुनाफा और लीज इनकम में तेजी कंपनी के पक्ष में हैं। वहीं AUM में कमी, NIM का दबाव और सरकार की संभावित हिस्सेदारी बिक्री निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं।
इसलिए ₹100 के नीचे शेयर मिलना अपने आप में खरीदारी का संकेत नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कीमत के साथ-साथ कंपनी की अगली तिमाहियों की ग्रोथ, मार्जिन और सरकार की हिस्सेदारी बिक्री पर भी नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता है।


