लखनऊ (उत्तर प्रदेश) [भारत], 12 अप्रैल: ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई हाई-लेवल शांति वार्ता करीब 21 घंटे तक चलने के बाद भी बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है और कई देशों में चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव Maulana Yasoob Abbas ने इस वार्ता की विफलता पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी समझौता तभी संभव है जब वह दोनों देशों के बीच “बराबरी के आधार” पर हो।
“एकतरफा शर्तें मंजूर नहीं” – मौलाना यासूब अब्बास
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार की एकतरफा शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा:
“कोई भी समझौता तभी होगा जब वह बराबरी के आधार पर होगा, अन्यथा कोई समझौता नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका लंबे समय से ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन ईरान ने कभी भी अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं किया।
“ईरान मजबूत है, झुकेगा नहीं”
मौलाना अब्बास ने कहा कि ईरान ने वर्षों से प्रतिबंधों और संघर्षों का सामना किया है, लेकिन देश अब भी मजबूती से खड़ा है।
उनके अनुसार:
- ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है
- देश ने कभी आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया
- भविष्य में भी दबाव के आगे झुकने का सवाल नहीं उठता
उन्होंने अमेरिका के “हम जीत चुके हैं” वाले दावे पर भी सवाल उठाया और कहा:
“अगर अमेरिका जीत चुका है, तो फिर बातचीत की जरूरत क्यों पड़ी?”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी बड़ा बयान
मौलाना यासूब अब्बास ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को लेकर भी बयान दिया।
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है और वहां होने वाले फैसले ईरान ही करेगा। यह जलमार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसी वजह से यह अमेरिका-ईरान तनाव का केंद्र बना हुआ है।
AIMPLB ने जताई चिंता
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य Maulana Khalid Rashid Firangi Mahali ने इस वार्ता के असफल होने पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि:
- यह वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों को हस्तक्षेप करना चाहिए
- बातचीत के जरिए ही समाधान संभव है
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से पहल करने की अपील की।
21 घंटे की बातचीत, लेकिन नतीजा शून्य
इस्लामाबाद में हुई इस बातचीत में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance शामिल थे।
उन्होंने कहा:
“कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके। यह ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है।”
इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे बने हुए हैं।
क्यों नहीं बनी बात?
विशेषज्ञों के अनुसार वार्ता के फेल होने के पीछे कई कारण हैं:
- परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण
- आर्थिक प्रतिबंध हटाने पर मतभेद
- दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी
इन मुद्दों पर सख्त रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
आगे क्या होगा?
इस वार्ता के असफल होने के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, कूटनीतिक प्रयास जारी रहने की उम्मीद है और भविष्य में फिर से बातचीत हो सकती है।
निष्कर्ष
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता का विफल होना वैश्विक स्तर पर एक बड़ा संकेत है।
मौलाना यासूब अब्बास का “बराबरी के आधार पर समझौता” वाला बयान यह दर्शाता है कि ईरान अपने रुख से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में कूटनीति इस गतिरोध को खत्म कर पाती है या नहीं।
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