मिडिल ईस्ट की जारी ईरान‑अमेरिका‑इज़राइल संघर्ष के बीच अब ईरान और पाकिस्तान के बीच भी कूटनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने होर्मुज स्ट्रेट मामले में ‘डबल गेम’ खेलकर उसका भरोसा तोड़ा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में खलबली मची हुई है।
📌 होर्मुज स्ट्रेट का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) दुनिया के तेल और गैस व्यापार का एक बहुत महत्वपूर्ण मार्ग है। युद्ध के दौरान ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण सख़्ती से लागू किया है और केवल उन जहाज़ों को अनुमति दी जा रही है जिन्हें वह “अनुकूल” मानता है।
हालाँकि कुछ जहाज़ — जैसे भारत, पाकिस्तान और अन्य दोस्त देशों के — को सुरक्षा और अनुमति के साथ पास होने की अनुमति दी गई है, लेकिन हालिया घटनाओं ने तेहरान में बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔥 ईरान का आरोप: पाकिस्तान ने धोखा दिया
ईरान की नाराज़गी का मुख्य कारण यह है कि:
- पाकिस्तान की कूटनीति को मध्यस्थ (mediator) के रूप में पेश किया गया, लेकिन तेहरान को लगता है कि असल में वह अमेरिका के पक्ष में कार्य कर रहा है।
- पाकिस्तान के कुछ तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली, जिसे ईरान की दृष्टि में संयोग से अमेरिका को फायदा पहुँचाने वाला कदम माना जा रहा है।
- इन घटनाओं के कारण ईरान के राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान की भूमिका पर शक जताया है, और उसके व्यवहार को “डबल गेम” कहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान का स्थिर और विश्वसनीय मध्यस्थ का दावा अब संदिग्ध हो गया है, खासकर जब तनावपूर्ण विपरीत हित देशों के बीच संतुलन साधने के प्रयास तेज चल रहे हैं।
🚢 होर्मुज के मामलों से विवाद गहरा
हाल के दिनों में एक कंटेनर जहाज़, जो कराची के लिए जा रहा था, उसे ईरानी नौसेना ने होर्मुज से आगे नहीं जाने दिया क्योंकि उसे आवश्यक अनुमति नहीं मिली थी — यह भी विवाद का एक बड़ा बिंदु बन गया।
इससे साफ़ होता है कि होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण अब पूरी तरह राजनीतिक तनाव और सुरक्षा कूटनीति से जुड़ा हुआ है, न कि केवल समुद्री नियमों से।
🌍 पाकिस्तान की भूमिका पर बढ़ता दबाव
पाकिस्तान को पहले US‑Iran संघर्ष का मध्यस्थ माना जा रहा था, और वह दोनों पक्षों से कूटनीतिक संदेश ले जाने का काम कर रहा था।
लेकिन तेहरान की तरफ़ से दिख रहे विश्वास‑घाटे ने यह सवाल उठाया है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में तटस्थ है, या फिर पश्चिमी हितों की ओर झुक रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यस्थता तभी सफल हो सकती है जब दोनों पक्ष भरोसा करें कि वह निष्पक्ष है — और अभी के हालात से लगता है कि यह भरोसा कमजोर हो रहा है।
📌 निष्कर्ष
होर्मुज स्ट्रेट संकट ने ना सिर्फ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति और पाकिस्तान‑ईरान रिश्तों में दरार भी पैदा की है। ईरान का भरोसा Pakistan की नीतियों पर टिका हुआ है, और डबल‑गेम जैसे आरोप भरोसे की चुनौती बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की स्थिति क्षेत्रीय गठबंधनों, तेल आपूर्ति और अमेरिकी‑ईरान विवाद के हालात पर आधारित रहेगी — और पाकिस्तान की भूमिका पर अब अधिक ध्यान केंद्रित होगा।
Author Box
Author: Namam Sharma
About Author:
Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
Also Read;


