नई दिल्ली। भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को सस्ते आयात के दबाव से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चीन, यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका से आयात होने वाले ‘सल्फेनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स’ नामक रसायन पर पांच वर्षों के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की है। यह रसायन मुख्य रूप से रबर और टायर निर्माण उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है।
HighLights
- भारत ने चीन, यूरोपीय संघ और अमेरिका से आयातित रसायन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई।
- सल्फेनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स पर 5 साल तक लागू रहेगा शुल्क।
- ड्यूटी की दर ₹7,093 से ₹1.65 लाख प्रति टन तक तय की गई।
- घरेलू टायर और रबर उद्योग को सस्ते आयात से राहत मिलने की उम्मीद।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह फैसला वाणिज्य मंत्रालय की जांच एजेंसी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। जांच में पाया गया कि संबंधित देशों से यह उत्पाद भारतीय बाजार में सामान्य मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचा जा रहा था, जिससे घरेलू निर्माताओं को नुकसान हो रहा था।
₹7,093 से ₹1.65 लाख प्रति टन तक लगेगा शुल्क
सरकार द्वारा लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क की दर 75 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹7,093) प्रति टन से लेकर 1,748 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹1,65,692) प्रति टन तक निर्धारित की गई है। DGTR की 19 जून की अधिसूचना के अनुसार यह शुल्क पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि सरकार इसे संशोधित, प्रतिस्थापित या समाप्त नहीं करती।
जांच में यह भी सामने आया कि चीन, यूरोपीय संघ और अमेरिका से आयातित सल्फेनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स की कीमतें भारतीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बना रही थीं। ऐसे में घरेलू उद्योग को राहत देने और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
एल्युमिनियम फॉयल पर भी बढ़ाई गई ड्यूटी
सरकार ने एक अन्य अधिसूचना में चीन, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से आयातित एल्युमिनियम फॉयल पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी की अवधि भी बढ़ा दी है। यह शुल्क अब 15 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल्युमिनियम फॉयल उद्योग लंबे समय से सस्ते विदेशी आयात के दबाव का सामना कर रहा था। ऐसे में शुल्क बढ़ाने से घरेलू निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
चीन के PET रेजिन पर भी कार्रवाई
भारत ने चीन से आयातित पॉलिएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) रेजिन पर भी पांच वर्षों के लिए 200.66 अमेरिकी डॉलर प्रति टन की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है।
PET रेजिन का उपयोग मुख्य रूप से प्लास्टिक बोतलों, पैकेजिंग सामग्री और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। सरकार का मानना है कि सस्ते आयात के कारण घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो रहा था।
क्या होती है एंटी-डंपिंग ड्यूटी?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी वह अतिरिक्त शुल्क है जिसे किसी देश द्वारा तब लगाया जाता है जब विदेशी कंपनियां अपने उत्पादों को घरेलू बाजार में असामान्य रूप से कम कीमत पर बेचती हैं। इस प्रक्रिया को “डंपिंग” कहा जाता है।
यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि सस्ते आयात के कारण स्थानीय उद्योग को आर्थिक नुकसान हो रहा है, तो सरकार एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाकर घरेलू कंपनियों की सुरक्षा करती है।
WTO नियमों के तहत उठाया गया कदम
भारत समेत दुनिया के कई देश विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने का अधिकार रखते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार में निष्पक्षता बनाए रखना और घरेलू उद्योगों को विदेशी उत्पादकों के मुकाबले समान अवसर उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से रबर, टायर, केमिकल और पैकेजिंग उद्योग से जुड़ी भारतीय कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जबकि विदेशी आयातकों के लिए भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा थोड़ी कठिन हो सकती है।


