नई दिल्ली। आकलन वर्ष 2026-27 (Assessment Year 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन शुरू होते ही एक नया ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है। बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स अपनी पहली ITR जमा करने के बाद उसे दोबारा संशोधित यानी Revised Return के रूप में दाखिल कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह आयकर विभाग की बढ़ती डिजिटल निगरानी, AIS और TIS जैसे डेटा टूल्स तथा डेटा मैचिंग की सख्त प्रक्रिया मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब टैक्सपेयर्स के लिए केवल रिटर्न दाखिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें दी गई हर जानकारी का बैंक, नियोक्ता, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य वित्तीय संस्थानों के रिकॉर्ड से मेल खाना भी जरूरी हो गया है। यही कारण है कि पहली बार रिटर्न दाखिल करने के बाद कई लोग उसमें हुई गलतियों को सुधारने के लिए Revised Return का सहारा ले रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं Revised Return के मामले?
इस साल Revised Return फाइलिंग में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण आयकर विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए डिजिटल डेटा प्लेटफॉर्म हैं। AIS (Annual Information Statement), TIS (Taxpayer Information Summary) और Form 26AS के जरिए टैक्सपेयर्स को उनकी आय, निवेश और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी मिल जाती है।
कई बार रिटर्न फाइल करते समय करदाता कुछ आय स्रोतों को शामिल करना भूल जाते हैं या फिर किसी निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट का दावा नहीं कर पाते। बाद में AIS और अन्य रिकॉर्ड देखने पर यह गलती सामने आती है, जिसके बाद उन्हें Revised Return दाखिल करना पड़ता है।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
- AIS, TIS और Form 26AS के बीच डेटा मिसमैच का सामने आना।
- बैंक ब्याज, एफडी, डिविडेंड या कैपिटल गेन जैसी आय का छूट जाना।
- नए ITR फॉर्म्स में अधिक विस्तृत जानकारी भरने की आवश्यकता।
- टैक्स बचाने वाले डिडक्शन और छूट का बाद में पता चलना।
- डिजिटल ट्रैकिंग और संभावित नोटिस से बचने की कोशिश।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, अब आयकर विभाग के पास विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा का व्यापक नेटवर्क है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गलती या जानकारी छिपाना पहले की तुलना में अधिक आसानी से पकड़ में आ जाता है।
AIS और TIS क्या हैं?
AIS यानी Annual Information Statement एक विस्तृत रिपोर्ट होती है जिसमें करदाता की वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड दिखाई देता है। इसमें बैंक ब्याज, शेयर बाजार लेनदेन, म्यूचुअल फंड निवेश, टीडीएस, विदेशी प्रेषण और कई अन्य जानकारियां शामिल होती हैं।
वहीं TIS यानी Taxpayer Information Summary, AIS में उपलब्ध जानकारी का संक्षिप्त और सार रूप होता है। इसकी मदद से करदाता आसानी से यह समझ सकता है कि आयकर विभाग के पास उसकी आय और लेनदेन से जुड़ा कौन-कौन सा डेटा मौजूद है।
अगर ITR में दी गई जानकारी इन रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खाती, तो भविष्य में नोटिस या जांच की संभावना बढ़ सकती है। यही वजह है कि कई लोग पहले रिटर्न दाखिल करने के बाद दोबारा संशोधित रिटर्न भर रहे हैं।
Budget 2026 के बाद मिला बड़ा फायदा
सरकार ने Budget 2026 में करदाताओं को राहत देते हुए Revised Return दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। पहले करदाता केवल 31 दिसंबर तक ही अपना रिटर्न संशोधित कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा 31 मार्च तक उपलब्ध है।
इस बदलाव से करदाताओं को अपनी गलतियां सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही वजह है कि इस साल Revised Return की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
बढ़ी हुई समयसीमा के फायदे:
- जल्दबाजी में हुई गलतियों को सुधारने का मौका।
- अतिरिक्त आय या निवेश की जानकारी जोड़ने की सुविधा।
- टैक्स नोटिस और पेनल्टी के जोखिम में कमी।
- सही टैक्स गणना सुनिश्चित करने में मदद।
ITR फाइलिंग के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
रिटर्न दाखिल करने से पहले AIS, TIS और Form 26AS की जानकारी का मिलान करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बैंक खातों, वेतन पर्ची, निवेश प्रमाण और पूंजीगत लाभ से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर लेनी चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटर्न सबमिट करने से पहले निम्नलिखित बिंदुओं की जांच अवश्य करें:
- सभी आय स्रोतों को शामिल किया गया है या नहीं।
- TDS की जानकारी सही है या नहीं।
- टैक्स छूट और डिडक्शन का सही दावा किया गया है या नहीं।
- बैंक ब्याज और एफडी आय को शामिल किया गया है या नहीं।
- कैपिटल गेन की गणना सही तरीके से की गई है या नहीं।
असेसमेंट ईयर 2026-27 की महत्वपूर्ण डेडलाइंस
आयकर विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के करदाताओं के लिए अलग-अलग अंतिम तिथियां निर्धारित की हैं।
- 31 जुलाई 2026 – सैलरीड और नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स (ITR-1, ITR-2)
- 31 अगस्त 2026 – बिजनेस और प्रोफेशनल (ITR-3, ITR-4, नॉन-ऑडिट)
- 31 अक्टूबर 2026 – ऑडिट वाले मामले
- 31 दिसंबर 2026 – Belated Return दाखिल करने की अंतिम तारीख
- 31 मार्च 2027 – Revised Return की अंतिम तारीख
क्या कहता है बढ़ता ट्रेंड?
ITR Filing 2026 में Revised Return के बढ़ते मामलों से साफ है कि करदाता अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक और सतर्क हो गए हैं। AIS, TIS और डेटा एनालिटिक्स के दौर में रिटर्न फाइलिंग पूरी तरह डेटा-ड्रिवन प्रक्रिया बन चुकी है। ऐसे में छोटी सी गलती भी भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है।
बढ़ी हुई समयसीमा ने करदाताओं को अपनी त्रुटियां सुधारने का बेहतर अवसर दिया है, लेकिन इसके बावजूद पहली बार में ही सही और सटीक जानकारी देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों और आय संबंधी विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान करना जरूरी है।


