RBI Plastic Currency Update: आपकी जेब में रखे ₹10 और ₹20 के नोट जल्द ही नए रूप में दिखाई दे सकते हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पॉलीमर बैंक नोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे। नए प्लास्टिक आधारित नोटों को फिलहाल सिर्फ फील्ड ट्रायल के लिए लाया जाएगा और सफल परीक्षण के बाद ही इन्हें नियमित रूप से जारी करने पर फैसला लिया जाएगा।
हाल ही में लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी थी कि RBI के सेंट्रल बोर्ड ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के 1-1 अरब पॉलीमर बैंक नोटों को परीक्षण के लिए पेश करने की सिफारिश की थी। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा?
हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलीमर नोटों को लेकर बड़ा अपडेट दिया।
उन्होंने बताया कि RBI ने पॉलीमर सबस्ट्रेट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी सबस्ट्रेट पर नए बैंक नोटों की छपाई की जाएगी। इसके बाद नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा फीचर्स और अन्य तकनीकी पहलुओं की कई चरणों में जांच की जाएगी।
RBI गवर्नर ने कहा कि पॉलीमर नोटों को चरणबद्ध तरीके से पेश किया जाएगा। इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे, जिनकी जानकारी उचित समय पर सार्वजनिक की जाएगी।
₹10 और ₹20 के कितने पॉलीमर नोटों का होगा ट्रायल?
सरकार की मंजूरी के बाद RBI शुरुआत में:
- ₹10 के 1 अरब पॉलीमर नोट
- ₹20 के 1 अरब पॉलीमर नोट
का फील्ड ट्रायल करेगा।
यह परीक्षण सफल रहने के बाद ही RBI यह तय करेगा कि इन नोटों को नियमित रूप से जारी किया जाए या नहीं।
क्या पुराने कागजी ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे?
नहीं, पुराने नोट बंद नहीं होंगे।
सरकार ने साफ कर दिया है कि पॉलीमर नोट कागजी नोटों की जगह पूरी तरह लेने के लिए नहीं लाए जा रहे हैं। इन्हें मौजूदा करेंसी सिस्टम के साथ ही चलाया जाएगा।
इसका मतलब है कि:
- पुराने ₹10 और ₹20 के कागजी नोट वैध रहेंगे।
- बैंक और बाजार में दोनों तरह के नोट चल सकते हैं।
- लोगों को पुराने नोट बदलने की जरूरत नहीं होगी।
पॉलीमर नोट क्या होते हैं?
पॉलीमर नोट खास तरह की प्लास्टिक फिल्म से बनाए जाते हैं। इन्हें सामान्य कागज वाले नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और सुरक्षित माना जाता है।
ये नोट बाइ-एक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपलीन (BOPP) नामक सामग्री से बनाए जाते हैं।
इनकी खासियत:
- पानी से खराब नहीं होते।
- आसानी से फटते नहीं हैं।
- ज्यादा समय तक चलते हैं।
- गंदगी कम पकड़ते हैं।
- नकली नोट बनाना मुश्किल होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पॉलीमर नोट सामान्य कॉटन पेपर नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना ज्यादा टिकाऊ हो सकते हैं।
भारत में पहले भी हो चुका है पॉलीमर नोटों का परीक्षण
भारत में पॉलीमर नोटों का विचार नया नहीं है। इससे पहले भी कुछ वर्षों पहले ₹10 के पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया गया था। RBI ने अलग-अलग स्थानों पर इनके इस्तेमाल और टिकाऊपन का अध्ययन किया था।
अब नए प्रस्ताव के तहत बड़े स्तर पर फील्ड ट्रायल किया जाएगा।
डिजिटल पेमेंट के दौर में क्यों जरूरी हैं पॉलीमर नोट?
भारत में UPI और डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़े हैं, लेकिन नकदी का इस्तेमाल अभी भी बड़ी आबादी करती है। खासकर छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और रोजमर्रा के लेन-देन में नोटों की अहम भूमिका बनी हुई है।
पॉलीमर नोट आने से:
- करेंसी की लाइफ बढ़ सकती है।
- नोट छपाई और बार-बार बदलने की लागत कम हो सकती है।
- साफ-सुथरी मुद्रा व्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट और बैंक नोट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। पॉलीमर नोटों का असर नियमित रूप से जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।
पॉलीमर नोट आने से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
अगर ट्रायल सफल रहता है और RBI इन्हें जारी करता है तो आम लोगों को कई फायदे मिल सकते हैं।
- बारिश या पानी में नोट खराब होने की संभावना कम होगी।
- छोटे मूल्य के नोट लंबे समय तक चलेंगे।
- फटे और गंदे नोटों की संख्या कम हो सकती है।
- करेंसी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
फिलहाल RBI की प्रक्रिया पूरी होने और फील्ड ट्रायल के नतीजों का इंतजार है। इसके बाद ही तय होगा कि भारत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोट कब तक आम लोगों की जेब तक पहुंचेंगे।


