नई दिल्ली। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के वाइस प्रेसिडेंट पद पर भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल का चुना जाना देश की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय पद नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फाइनेंसिंग) और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर दुनिया भर में निगरानी और सख्ती बढ़ रही है। खास बात यह है कि FATF के साथ पाकिस्तान का इतिहास काफी विवादों और चुनौतियों से भरा रहा है। यही वजह है कि भारत की नई भूमिका को लेकर इस्लामाबाद में भी चर्चा तेज हो गई है।
क्या है FATF और क्यों है इसकी इतनी अहमियत?
FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक वैश्विक संस्था है, जिसकी स्थापना मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद और अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की गई थी।
पेरिस स्थित यह संस्था दुनिया के देशों के लिए वित्तीय पारदर्शिता और आतंकवाद विरोधी वित्तीय नियमों के मानक तय करती है। FATF यह भी जांचता है कि सदस्य देश इन मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
यदि किसी देश की व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई जाती हैं तो उसे FATF की ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। इसका असर उस देश की अंतरराष्ट्रीय छवि, विदेशी निवेश और वित्तीय लेन-देन पर पड़ता है।
पाकिस्तान का FATF रिकॉर्ड क्यों रहा है खराब?
पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जिन्हें FATF की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा है। पिछले दो दशकों में पाकिस्तान तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हो चुका है।
सबसे चर्चित मामला जून 2018 से अक्टूबर 2022 के बीच का रहा, जब पाकिस्तान को टेरर फाइनेंसिंग रोकने में नाकामी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने के कारण ग्रे लिस्ट में रखा गया था।
ग्रे लिस्ट में शामिल होने से पाकिस्तान को कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विदेशी निवेश प्रभावित हुआ, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से फंडिंग कठिन हुई और देश की आर्थिक साख पर भी असर पड़ा।
हालांकि, FATF द्वारा निर्धारित एक्शन प्लान को पूरा करने के बाद अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बावजूद उसकी वित्तीय निगरानी और आतंकवाद विरोधी उपायों पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है।
भारत के वाइस प्रेसिडेंट बनने का पाकिस्तान पर क्या असर होगा?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि FATF में भारत के वाइस प्रेसिडेंट बनने का मतलब यह नहीं है कि भारत अकेले किसी देश को ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है।
FATF में सभी फैसले तकनीकी मूल्यांकन, विशेषज्ञ रिपोर्ट और सदस्य देशों की सामूहिक सहमति के आधार पर लिए जाते हैं। इसलिए किसी भी देश के खिलाफ कार्रवाई केवल एक सदस्य की इच्छा से नहीं हो सकती।
फिर भी भारत की बढ़ी हुई भूमिका का महत्व कम नहीं है। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। FATF की शीर्ष नेतृत्व टीम में भारत की मौजूदगी इन मुद्दों को और मजबूती से रखने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आतंकवाद से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, हवाला चैनलों और प्रतिबंधित संगठनों की फंडिंग जैसे मामलों पर वैश्विक स्तर पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
FATF में भारत की बढ़ती साख का क्या संदेश?
भारत पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। FATF के वाइस प्रेसिडेंट पद पर भारतीय अधिकारी का चुना जाना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने भी इसे भारत की ‘जीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म’ नीति की अंतरराष्ट्रीय मान्यता बताया है। मंत्रालय के अनुसार, विवेक अग्रवाल का अनुभव FATF की आतंकवाद विरोधी वित्तीय रणनीतियों को और मजबूत बनाने में उपयोगी साबित होगा।
अग्रवाल इससे पहले FATF में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के प्रमुख भी रह चुके हैं। वित्तीय अपराधों और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने का उनका अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत उम्मीदवार बनाता है।
FATF में वाइस प्रेसिडेंट की क्या जिम्मेदारियां होती हैं?
FATF का वाइस प्रेसिडेंट संगठन के प्रशासन और रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। वह FATF प्रेसिडेंट का सहयोग करता है और विभिन्न सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
इसके अलावा उभरते वित्तीय जोखिमों, मनी लॉन्ड्रिंग के नए तरीकों, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े खतरे और टेरर फाइनेंसिंग के मामलों पर संगठन की कार्ययोजनाओं को आगे बढ़ाने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
क्या पाकिस्तान को चिंता करने की जरूरत है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के शीर्ष भूमिका में आने का मतलब पाकिस्तान के खिलाफ किसी तत्काल कार्रवाई से नहीं है। FATF तकनीकी मानकों और तथ्यों के आधार पर काम करता है।
लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि आतंकवाद और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भारत की चिंताओं को अब पहले से अधिक महत्व मिल सकता है। यदि भविष्य में किसी देश के खिलाफ टेरर फाइनेंसिंग से जुड़े गंभीर सबूत सामने आते हैं, तो FATF के मंच पर उन मुद्दों पर अधिक गहन चर्चा संभव है।
निष्कर्ष
FATF के वाइस प्रेसिडेंट पद पर भारत का चुना जाना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का संकेत है। पाकिस्तान के लिए इसका सीधा मतलब किसी नई कार्रवाई से नहीं है, लेकिन आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय नेटवर्क से जुड़े मामलों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कूटनीतिक दबाव पहले से अधिक प्रभावी हो सकता है। भारत के लिए यह उपलब्धि आतंकवाद के खिलाफ उसकी दीर्घकालिक रणनीति और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।


