Petrol Diesel Price Update: सस्ते पेट्रोल-डीजल का इंतजार कर रहे लोगों के लिए सरकार की ओर से बड़ा संकेत आया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि जैसे ही कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचना शुरू होगा, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देशभर के करोड़ों वाहन चालकों की नजर पेट्रोल और डीजल के दामों पर टिकी हुई है। पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुए संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि हाल में कुछ समय के लिए कीमतों में नरमी आई, जिससे लोगों को उम्मीद जगी कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है।
अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि फिलहाल तेल कंपनियां पहले से खरीदे गए महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं। जैसे ही सस्ते दाम पर खरीदा गया नया क्रूड रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, उसका असर खुदरा ईंधन कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
थोड़ा इंतजार करना होगा
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि तेल कंपनियों के पास अभी भी महंगे दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के बावजूद उसका लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता।
उन्होंने कहा कि तेल खरीदने, उसे भारत लाने, रिफाइनिंग करने और फिर पेट्रोल-डीजल के रूप में बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। इसलिए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के सस्ता होने और पेट्रोल पंप पर कीमतें कम होने के बीच कुछ सप्ताह का अंतर रह सकता है।
ईंधन कीमतों को लेकर सरकार की सफाई
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सीधे ईंधन की कीमतों पर देखने को मिला, लेकिन भारत में सरकार और तेल कंपनियों ने कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई, जितनी अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से हो सकती थी।
पुरी के मुताबिक सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है।
क्यों बढ़ी थीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
पिछले कुछ सप्ताहों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को झटका दिया था। अमेरिका, ईरान और इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में संकट गहराने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसका असर भारत समेत कई देशों में ईंधन लागत पर पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार इस अवधि में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे परिवहन लागत बढ़ी और कई वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ा।
महंगाई पर भी पड़ा असर
ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल और डीजल महंगे होने पर माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिससे खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ता है।
यही वजह है कि आम जनता और उद्योग जगत दोनों की नजर ईंधन कीमतों में संभावित कटौती पर टिकी हुई है। यदि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल सस्ते होते हैं तो इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
क्या फिर बढ़ सकते हैं दाम?
हालांकि राहत की उम्मीदों के बीच एक बड़ा जोखिम अभी भी बना हुआ है। इजरायल और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से बाधा उत्पन्न होती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें दोबारा तेजी से बढ़ सकती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ सकती है।
फिलहाल क्या है संकेत?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान से इतना साफ है कि सरकार और तेल कंपनियां कीमतों में राहत देने की संभावना से इनकार नहीं कर रही हैं। लेकिन इसके लिए कम कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल के भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने का इंतजार करना होगा।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव नहीं बढ़ता, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों की लागत और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।


