नई दिल्ली: भारत में कपास (Cotton) को लंबे समय से ‘सफेद सोना’ कहा जाता है और इसकी वजह केवल कृषि उत्पादन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात में इसकी अहम भूमिका भी है। सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, भारत आज कपास की खेती के रकबे के मामले में दुनिया में पहले और उत्पादन एवं खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। वैश्विक फाइबर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, किसानों को बेहतर कीमत दिलाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इन पहलों का असर आने वाले वर्षों में कपास उत्पादन और निर्यात दोनों पर देखने को मिल सकता है।
FY26 में 290.91 लाख गांठ रहा उत्पादन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (बेल) रहा। वहीं, इसी अवधि में घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि देश में कपास आधारित उद्योगों की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल और गारमेंट उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में कपास की मांग केवल घरेलू उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध निर्यात और विदेशी मुद्रा आय से भी है।
2031 तक 498 लाख गांठ उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के तहत वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ करने का लक्ष्य तय किया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- किसानों के लिए तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम
- उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को बढ़ावा
- डिजिटल खरीद प्रणाली
- ट्रेसबिलिटी (उत्पाद की स्रोत तक पहचान)
- गुणवत्ता सुधार और मूल्य संवर्धन
- बाजार तक आसान पहुंच
सरकार का मानना है कि इन पहलों से भारतीय कपास की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी।
MSP से किसानों को मिल रहा सुरक्षा कवच
कपास किसानों को बाजार में कीमतों में गिरावट से बचाने के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत खरीद अभियान भी चलाती है।
जब बाजार भाव MSP से नीचे चला जाता है, तब सरकारी एजेंसियां खरीद कर किसानों को न्यूनतम कीमत की गारंटी देती हैं। इससे किसानों की आय को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
60 लाख किसानों की आजीविका का आधार
भारत में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। इससे देश के करीब 60 लाख किसान परिवारों की आजीविका सीधे जुड़ी हुई है।
इसके अलावा कपास से जुड़े उद्योगों जैसे—
- जिनिंग एवं प्रोसेसिंग
- स्पिनिंग मिल
- टेक्सटाइल उद्योग
- गारमेंट निर्माण
- ट्रेडिंग एवं लॉजिस्टिक्स
में कार्यरत 4 से 5 करोड़ लोगों को भी रोजगार मिलता है। इस लिहाज से कपास भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योगों में से एक है।
भारत का कॉटन निर्यात भी मजबूत
भारत वैश्विक कपास व्यापार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 18 लाख गांठ (0.31 मिलियन मीट्रिक टन) कपास का निर्यात किया। यह वैश्विक कपास निर्यात 541.69 लाख गांठ (9.21 मिलियन मीट्रिक टन) का लगभग 3.37 प्रतिशत है।
मूल्य के लिहाज से भारत का कॉटन निर्यात 11.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इन देशों में सबसे ज्यादा जाती है भारतीय कॉटन
भारतीय कपास और उससे बने वस्त्रों की दुनिया भर में अच्छी मांग है।
प्रमुख निर्यात बाजार इस प्रकार रहे—
- अमेरिका – 26.35%
- बांग्लादेश – 19.81%
- श्रीलंका – 5.11%
- यूनाइटेड किंगडम – 2.38%
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – 2.32%
यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कॉटन और टेक्सटाइल उत्पाद विकसित तथा विकासशील दोनों तरह के बाजारों में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
किन राज्यों में होती है सबसे ज्यादा कपास की खेती?
भारत में कपास उत्पादन मुख्य रूप से तीन कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फैला हुआ है।
उत्तरी क्षेत्र
- पंजाब
- हरियाणा
- राजस्थान
मध्य क्षेत्र
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- मध्य प्रदेश
दक्षिणी क्षेत्र
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
इसके अलावा ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कॉटन?
कपास केवल एक कृषि फसल नहीं, बल्कि भारत के टेक्सटाइल उद्योग की रीढ़ मानी जाती है। इससे सूत, कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, तकनीकी वस्त्र और कई अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि इसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है।
सरकार का मानना है कि उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर जोर देने से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक कपास उद्योग में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत कर सकता है।


