India China Trade Deficit: भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ भारत का व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहा है। साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 91.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, चीन से भारी आयात के चलते भारत का व्यापार घाटा 67.1 अरब डॉलर (करीब ₹8.81 लाख करोड़) पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो साल के अंत तक व्यापार असंतुलन और बढ़ सकता है।
6 महीने में कितना बढ़ा भारत-चीन व्यापार?
चीनी कस्टम्स द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में चीन से भारत को होने वाला निर्यात 21.8% बढ़कर 79.41 अरब डॉलर हो गया। वहीं, भारत से चीन को होने वाला निर्यात भी 37.2% बढ़कर 12.31 अरब डॉलर तक पहुंचा।
हालांकि भारत का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा है, लेकिन चीन से होने वाला आयात अभी भी कई गुना अधिक है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 67.1 अरब डॉलर हो गया।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
| विवरण | राशि |
|---|---|
| चीन से भारत को निर्यात | 79.41 अरब डॉलर |
| भारत से चीन को निर्यात | 12.31 अरब डॉलर |
| कुल द्विपक्षीय व्यापार | 91.72 अरब डॉलर |
| भारत का व्यापार घाटा | 67.1 अरब डॉलर (करीब ₹8.81 लाख करोड़) |
चीन से भारत क्या-क्या आयात करता है?
भारत की कई इंडस्ट्री आज भी चीन से आने वाले कच्चे माल और तकनीकी उत्पादों पर काफी हद तक निर्भर हैं। चीन से भारत में आने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं—
- इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
- टेलीकॉम गियर
- स्मार्टफोन और PCB पार्ट्स
- सेमीकंडक्टर
- लिथियम-आयन बैटरियां
- चार्जर और केबल
- सर्वर और कंप्यूटर
- औद्योगिक मशीनरी
- ऑर्गेनिक केमिकल
- प्लास्टिक और पॉलिमर
इन उत्पादों की मांग बढ़ने से चीन से आयात लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
भारत चीन को क्या निर्यात करता है?
भारत से चीन को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं—
- मिनरल्स और मिनरल ओर
- रिफाइंड पेट्रोलियम और फ्यूल
- ऑर्गेनिक केमिकल
- इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद
- कृषि उत्पाद
- समुद्री उत्पाद
- बेस मेटल और तैयार माल
- रत्न एवं आभूषण
- फार्मास्यूटिकल्स
चीनी आंकड़ों के मुताबिक, भारत से चीन को सबसे तेजी से बढ़ने वाले निर्यात में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), OLED/डिस्प्ले मॉड्यूल, रिफाइंड पेट्रोलियम और लाइट नेफ्था शामिल रहे।
पिछले साल भी रिकॉर्ड स्तर पर था व्यापार
साल 2025 में भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा था। इसी अवधि में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.66% बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन से आयात 16% बढ़कर 131.63 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके चलते व्यापार घाटा बढ़कर 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
भारत चीन पर किस बात का दबाव बना रहा है?
भारत लंबे समय से चीन से अपने बाजार को भारतीय कंपनियों के लिए अधिक खोलने की मांग कर रहा है। विशेष रूप से भारत चाहता है कि चीन—
- भारतीय फार्मास्यूटिकल्स को ज्यादा बाजार पहुंच दे।
- आईटी और डिजिटल सेवाओं के लिए अवसर बढ़ाए।
- कृषि उत्पादों के आयात पर प्रतिबंधों में ढील दे।
- भारतीय कंपनियों को बेहतर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराए।
हालांकि अब तक इन क्षेत्रों में भारत को सीमित सफलता ही मिली है।
राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने क्या कहा?
भारत के चीन में राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने हाल ही में कहा कि यदि चीन भारतीय फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य प्रतिस्पर्धी उत्पादों के लिए अपना बाजार खोले और साथ ही भारत में चीनी निवेश को संतुलित तरीके से बढ़ाया जाए, तो इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े फार्मास्यूटिकल्स निर्यातकों में शामिल है और इस क्षेत्र में दोनों देशों के लिए सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
निवेश और व्यापार के बीच संतुलन पर जोर
दोराईस्वामी ने कहा कि भारत सरकार चीन के साथ संबंध सामान्य होने के बाद निवेश और व्यापार के बीच संतुलित नीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हाल के महीनों में चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में नरमी भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
क्या है इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर असर?
चीन के साथ लगातार बढ़ता व्यापार घाटा भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसका असर विदेशी मुद्रा बहिर्गमन, घरेलू विनिर्माण और रणनीतिक आर्थिक संतुलन पर पड़ सकता है। हालांकि दूसरी ओर, भारत का चीन को निर्यात भी तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में यदि भारतीय उत्पादों को चीन में बेहतर बाजार मिलता है तो व्यापार असंतुलन कुछ हद तक कम हो सकता है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह होगी कि वह चीन पर निर्भर आयात को धीरे-धीरे कम करे, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे और फार्मा, आईटी, कृषि तथा हाई-टेक उत्पादों के निर्यात में तेजी लाकर व्यापार घाटे को नियंत्रित करे।


