Income Tax Return (ITR) की आखिरी तारीख नजदीक है और देशभर के करोड़ों टैक्सपेयर्स रिटर्न दाखिल करने में जुटे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा राज्य भी है, जहां के अधिकांश निवासियों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता? यह छूट किसी विशेष योजना के तहत नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक समझौते और कानून के कारण मिली है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है और किन लोगों को इसका लाभ मिलता है।
ITR फाइल करने की डेडलाइन नजदीक
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। यदि कोई पात्र करदाता समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो उसे लेट फीस, ब्याज और अन्य कर संबंधी सुविधाओं के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय में वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक या दस्तावेजों की कमी जैसी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते ITR दाखिल कर देना चाहिए। अनुमान है कि अब तक 2 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं।
भारत का वह राज्य जहां नहीं देना पड़ता इनकम टैक्स
भारत में सिक्किम एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां के पात्र स्थानीय निवासियों को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(26AAA) के तहत आयकर से छूट प्राप्त है।
यह छूट किसी आर्थिक पैकेज का हिस्सा नहीं, बल्कि सिक्किम के भारत में विलय के समय किए गए संवैधानिक और ऐतिहासिक समझौते का परिणाम है।
भारत में शामिल होने के समय रखी गई थी यह शर्त
सिक्किम वर्ष 1975 तक एक स्वतंत्र राजशाही था। जब उसका भारत में विलय हुआ, तब यह सहमति बनी कि वहां के कई पुराने कानून और विशेष अधिकार बरकरार रहेंगे।
इसी कारण भारत का हिस्सा बनने के बाद भी Sikkim Income Tax Manual, 1948 लागू रहा। इसके तहत सिक्किम के स्थानीय निवासियों को केंद्र सरकार को इनकम टैक्स देने की आवश्यकता नहीं थी।
2008 में आया बड़ा बदलाव
साल 2008 के केंद्रीय बजट में सिक्किम के पुराने टैक्स कानून को समाप्त कर इनकम टैक्स एक्ट में धारा 10(26AAA) जोड़ी गई।
इस प्रावधान के तहत सिक्किम के अधिकांश मूल निवासियों को आयकर से छूट दी गई। हालांकि शुरुआती दौर में कुछ परिवार इस लाभ से बाहर रह गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा दायरा
शुरुआत में लगभग 500 परिवारों को इस छूट का लाभ नहीं मिला था, क्योंकि उन्होंने भारतीय नागरिकता से जुड़े कुछ पुराने प्रावधानों के तहत अलग स्थिति बनाए रखी थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संशोधन का निर्देश दिया, जिसके बाद 26 अप्रैल 1975 या उससे पहले सिक्किम में बसे भारतीय नागरिकों को भी आयकर छूट के दायरे में शामिल कर लिया गया।
इस फैसले के बाद पात्र सिक्किम निवासियों को केंद्र सरकार को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
PAN के बिना भी कर सकते हैं निवेश
सिक्किम के पात्र निवासियों को SEBI की ओर से भी विशेष छूट प्राप्त है। सामान्यतः भारत में शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए PAN कार्ड अनिवार्य होता है, लेकिन सिक्किम के पात्र निवासी कुछ निर्धारित शर्तों के तहत PAN के बिना भी शेयरों और म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं।
ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि उन्हें आयकर से छूट प्राप्त है और कई मामलों में PAN बनवाना अनिवार्य नहीं माना जाता।
समय पर ITR फाइल करना क्यों जरूरी?
यदि आप आयकर रिटर्न भरने के पात्र हैं, तो अंतिम तारीख का इंतजार करना नुकसानदायक हो सकता है। समय पर ITR दाखिल करने से कई फायदे मिलते हैं:
- लेट फीस और ब्याज से बचाव होता है।
- टैक्स रिफंड जल्दी मिलने की संभावना रहती है।
- बैंक लोन और वीजा आवेदन में ITR उपयोगी साबित होता है।
- भविष्य में आयकर विभाग की नोटिस या अन्य परेशानियों का जोखिम कम रहता है।
निष्कर्ष
भारत में सिक्किम एक विशेष संवैधानिक और ऐतिहासिक व्यवस्था वाला राज्य है, जहां धारा 10(26AAA) के तहत पात्र स्थानीय निवासियों को इनकम टैक्स से छूट प्राप्त है। यह सुविधा पूरे देश के लिए नहीं, बल्कि केवल निर्धारित पात्रता रखने वाले सिक्किम के निवासियों पर लागू होती है। वहीं देश के अन्य करदाताओं को तय समय सीमा के भीतर अपना ITR दाखिल करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की पेनाल्टी या वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।


