**अगर आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग करते हैं और असेसमेंट ईयर 2026-27 (AY 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने जा रहे हैं, तो इस बार कुछ अहम बदलाव आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनकम टैक्स विभाग ने नए ITR फॉर्म में F&O ट्रेडर्स के लिए रिपोर्टिंग को अधिक पारदर्शी बनाया है। अब केवल कुल बिजनेस इनकम बताना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि F&O टर्नओवर और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से हुए मुनाफे या नुकसान (Profit/Loss) की जानकारी भी अलग-अलग देनी होगी।
यह बदलाव खासतौर पर उन लाखों सैलरीड कर्मचारियों के लिए भी अहम है, जो नौकरी के साथ पार्ट-टाइम या फुल-टाइम F&O ट्रेडिंग करते हैं। यदि आपने भी पिछले वित्त वर्ष में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की है, तो ITR फाइल करने से पहले इन नियमों को समझना जरूरी है।
F&O ट्रेडिंग को कैसे माना जाता है?
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार Futures & Options (F&O) से होने वाली आय को Non-Speculative Business Income माना जाता है। यानी इसे शेयरों की सामान्य खरीद-बिक्री की तरह कैपिटल गेन नहीं माना जाता, बल्कि बिजनेस इनकम के रूप में टैक्स लगाया जाता है।
यही कारण है कि F&O ट्रेडर्स को कई मामलों में बिजनेस टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करना पड़ता है, जैसे टर्नओवर की गणना, बुक्स ऑफ अकाउंट और जरूरत पड़ने पर टैक्स ऑडिट।
ITR 2026 में F&O ट्रेडर्स के लिए क्या बदला?
असेसमेंट ईयर 2026-27 के नए ITR फॉर्म में अब F&O ट्रेडिंग से जुड़ी जानकारी अधिक विस्तार से मांगी जा रही है। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—
- F&O Turnover अलग से रिपोर्ट करना होगा।
- Futures और Options से हुए Profit/Loss का अलग विवरण देना होगा।
- बिजनेस इनकम की सही कैटेगरी में F&O आय दिखानी होगी।
- गलत जानकारी देने पर नोटिस या रिटर्न प्रोसेसिंग में दिक्कत आ सकती है।
F&O Turnover कैसे निकाला जाता है?
इनकम टैक्स एक्ट में F&O टर्नओवर की सीधी परिभाषा नहीं दी गई है, लेकिन ICAI (Institute of Chartered Accountants of India) की टैक्स ऑडिट गाइडलाइंस के अनुसार इसकी गणना की जाती है।
1. Profit और Loss का Absolute Value जोड़ें
F&O में Turnover का मतलब आपकी कुल खरीद या बिक्री नहीं होता।
उदाहरण:
- पहले ट्रेड में ₹5,000 का मुनाफा
- दूसरे ट्रेड में ₹3,000 का नुकसान
तो Turnover होगा—
₹5,000 + ₹3,000 = ₹8,000
यानी नुकसान को भी पॉजिटिव वैल्यू में जोड़कर टर्नओवर निकाला जाता है।
2. Option Selling Premium भी शामिल होगा
यदि आपने Call या Put Option Sell किया है और Premium प्राप्त किया है, तो वह भी Turnover का हिस्सा बन सकता है।
हालांकि यदि वही Premium पहले से Profit Calculation में शामिल है तो उसे दोबारा नहीं जोड़ा जाएगा।
3. Open Position का क्या होगा?
यदि 31 मार्च तक आपकी कोई F&O Position खुली हुई है और Square Off नहीं हुई है, तो उसका Turnover उसी वित्त वर्ष में नहीं गिना जाएगा।
जब वह Position अगले वित्त वर्ष में बंद होगी, तभी उसका Turnover माना जाएगा।
4. Reverse Trade का नियम
यदि किसी ट्रेड में Reverse Position ली गई है, तो उससे बनने वाला अंतर (Difference) भी Turnover में शामिल किया जाएगा।
आसान उदाहरण से समझें Turnover

मान लीजिए पूरे वर्ष में आपकी ट्रेडिंग इस प्रकार रही—
| ट्रेड | परिणाम |
|---|---|
| ट्रेड 1 | ₹12,000 Profit |
| ट्रेड 2 | ₹8,000 Loss |
| ट्रेड 3 | ₹15,000 Profit |
Turnover होगा—
₹12,000 + ₹8,000 + ₹15,000 = ₹35,000
ध्यान रहे, यहां Loss को भी Positive Value में जोड़ा जाता है।
Tax Audit कब जरूरी होगा?
F&O ट्रेडर्स के लिए Tax Audit की आवश्यकता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे—
- कुल Turnover
- Profit Percentage
- Presumptive Tax Scheme अपनाई है या नहीं
- Income Tax Act की निर्धारित सीमा
यदि आपके मामले में टैक्स ऑडिट लागू होता है, तो पहले ऑडिट कराना होगा और उसके बाद ITR दाखिल करनी होगी।
F&O ट्रेडर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख
यदि Tax Audit की जरूरत नहीं है
ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है।
यदि Tax Audit जरूरी है
ऑडिट वाले मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 रहेगी।
समय पर रिटर्न दाखिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर जुर्माना, ब्याज और Loss Carry Forward जैसी सुविधाओं का नुकसान हो सकता है।
क्या नुकसान होने पर भी ITR भरना जरूरी है?
कई निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि पूरे साल केवल नुकसान हुआ है तो क्या ITR भरनी चाहिए?
उत्तर है—यदि आपकी कुल आय टैक्स छूट सीमा से कम है तो सामान्यतः ITR अनिवार्य नहीं हो सकती, लेकिन यदि आप F&O Loss को भविष्य के वर्षों में Adjust (Carry Forward) करना चाहते हैं तो समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करना आवश्यक है।
बिना समय पर ITR फाइल किए नुकसान को आगे के वर्षों में सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता।
क्या Salary और F&O Income एक साथ दिखाई जाएगी?
यदि आप नौकरी करते हैं और साथ में F&O ट्रेडिंग भी करते हैं, तो—
- Salary Income को Salary Head में दिखाया जाएगा।
- F&O Income को Profits and Gains from Business or Profession (PGBP) के अंतर्गत दिखाना होगा।
दोनों आय एक ही ITR में रिपोर्ट होंगी, लेकिन उनकी टैक्स कैटेगरी अलग रहेगी।
F&O ट्रेडर्स के लिए जरूरी सुझाव
- सभी ट्रेडिंग स्टेटमेंट और ब्रोकरेज रिपोर्ट सुरक्षित रखें।
- Turnover की गणना सही तरीके से करें।
- Profit और Loss का सही विवरण दें।
- यदि Tax Audit लागू होता है तो समय रहते CA से संपर्क करें।
- अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय पर ITR दाखिल करें।
निष्कर्ष
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए F&O ट्रेडर्स की टैक्स रिपोर्टिंग पहले की तुलना में अधिक विस्तृत हो गई है। अब ITR में F&O Turnover और Profit/Loss की अलग-अलग जानकारी देना अनिवार्य है। खासकर सैलरीड लोगों के लिए, जो अतिरिक्त आय के लिए डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग करते हैं, सही टर्नओवर की गणना और समय पर ITR फाइल करना बेहद जरूरी है। गलत जानकारी या देरी भविष्य में टैक्स नोटिस और अन्य परेशानियों का कारण बन सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। टैक्स से जुड़े नियम प्रत्येक व्यक्ति की आय, कारोबार और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं। ITR दाखिल करने या टैक्स प्लानिंग से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


