नई दिल्ली: सोने के गहनों की खरीदारी करते समय अक्सर ग्राहक हॉलमार्क और उसकी शुद्धता पर ध्यान देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही हॉलमार्किंग सिस्टम आपका खोया हुआ गहना वापस दिलाने में भी मदद कर सकता है? हाल ही में सामने आए एक मामले ने यह साबित कर दिया कि BIS द्वारा जारी किया जाने वाला HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर केवल सोने की शुद्धता की गारंटी नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर गहनों की पहचान कर उन्हें असली मालिक तक पहुंचाने का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।
एक महिला को अपना खोया हुआ सोने का कंगन वापस मिलने की कहानी ने HUID सिस्टम की उपयोगिता को नई पहचान दी है। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस की मदद की जरूरत नहीं पड़ी और केवल तकनीक, रिकॉर्ड मैनेजमेंट सिस्टम तथा एक ईमानदार नागरिक की वजह से कीमती गहना उसके परिवार तक पहुंच गया।
कैसे शुरू हुआ खोए हुए कंगन का सफर?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक व्यक्ति को सड़क पर एक सोने का कंगन मिला। उसने इसे अपने पास रखने के बजाय ईमानदारी दिखाते हुए नजदीकी ज्वेलरी स्टोर में जमा करा दिया। ज्वेलरी विशेषज्ञों ने जब कंगन की जांच की तो उस पर अंकित HUID नंबर पर ध्यान गया।
इस HUID नंबर के जरिए यह पता लगाया गया कि गहने की हॉलमार्किंग किस ज्वेलरी ब्रांड से हुई थी। जांच में सामने आया कि यह कंगन मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के माध्यम से बेचा गया था। इसके बाद कंपनी की तकनीकी टीम ने अपने रिकॉर्ड और ट्रेसेबिलिटी सिस्टम की मदद से उस स्टोर का पता लगाया जहां से यह गहना खरीदा गया था।
रिकॉर्ड की जांच के बाद ग्राहक की पहचान हो गई और कंपनी ने उनसे संपर्क स्थापित किया।
अमेरिका में थी मालिक, भारत में मां को सौंपा गया कंगन
जब कंपनी ने ग्राहक से संपर्क किया तो पता चला कि कंगन की मालकिन वर्तमान में अमेरिका में रह रही हैं। ऐसे में उनके लिए भारत आकर गहना लेना संभव नहीं था।
स्थिति को देखते हुए मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने ग्राहक की सहमति से उनकी मां को भारत स्थित शोरूम बुलाया और सभी आवश्यक सत्यापन प्रक्रियाओं के बाद कंगन उन्हें सौंप दिया गया। इस तरह हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद महिला को अपना खोया हुआ कीमती गहना वापस मिल गया।
क्या होता है HUID नंबर?
HUID यानी Hallmark Unique Identification Number एक यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिसे प्रत्येक हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण पर अंकित किया जाता है। यह कोड BIS के डेटाबेस में दर्ज रहता है और इसके जरिए गहने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
इस नंबर की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि गहना किस ज्वेलर द्वारा बेचा गया था, उसकी हॉलमार्किंग कब हुई और उसका रिकॉर्ड क्या है। BIS की हॉलमार्किंग व्यवस्था में यह कोड उपभोक्ताओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए जोड़ा गया था।
ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है HUID?
अधिकांश लोग HUID को केवल सोने की शुद्धता से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह मामला बताता है कि इसके फायदे इससे कहीं अधिक हैं।
- गहनों की प्रामाणिकता की पुष्टि होती है।
- नकली या मिलावटी सोने की पहचान आसान होती है।
- खरीदारी का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
- खोए हुए गहनों की पहचान संभव हो सकती है।
- उपभोक्ता और ज्वेलर दोनों के लिए पारदर्शिता बढ़ती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के आभूषण खरीदते समय ग्राहकों को हमेशा HUID युक्त हॉलमार्क ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए और उसका बिल सुरक्षित रखना चाहिए।
डिजिटल ट्रैकिंग ने बढ़ाई सुरक्षा
यह घटना बताती है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ट्रैकिंग सिस्टम भविष्य में उपभोक्ता सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। HUID नंबर के कारण न केवल सोने की शुद्धता सुनिश्चित हुई बल्कि एक खोया हुआ गहना भी उसके वास्तविक मालिक तक पहुंच सका।
सोने के बढ़ते निवेश और आभूषणों की ऊंची कीमतों को देखते हुए HUID प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है। यह मामला उन लोगों के लिए भी सीख है जो हॉलमार्किंग को केवल एक औपचारिकता समझते हैं। वास्तव में यह सिस्टम जरूरत पड़ने पर आपके कीमती गहनों की पहचान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित कर सकता है।


