HighLights
- भारत की सबसे बड़ी बैटरी मैटेरियल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने की तैयारी
- अगले 5 साल में ₹30,000 करोड़ अतिरिक्त रेवेन्यू का लक्ष्य
- EV बैटरियों के लिए कैथोड और एनोड मैटेरियल का होगा उत्पादन
- 400 टन क्षमता वाला पायलट प्लांट पहले ही शुरू
- LFP कैथोड प्लांट की क्षमता 2 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना
नई दिल्ली
देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और इसी के साथ बैटरी निर्माण से जुड़े कारोबार में भी बड़े निवेश देखने को मिल रहे हैं। अब इस दौड़ में न तो टाटा समूह और न ही अंबानी-अदाणी समूह, बल्कि स्पेशलिटी केमिकल सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स (Himadri Speciality Chemicals) ने बड़ा दांव खेला है।
कंपनी ने भारत की सबसे बड़ी बैटरी मैटेरियल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
100 GWh क्षमता वाली बैटरी मैटेरियल यूनिट बनेगी
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के लिए कैथोड और एनोड मैटेरियल का उत्पादन करेगी। कंपनी की योजना 100 GWh क्षमता वाली बैटरी मैटेरियल फैसिलिटी विकसित करने की है, जिसे भारत की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट भारत को बैटरी सप्लाई चेन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
400 टन का पायलट प्लांट शुरू
कंपनी ने जानकारी दी है कि इस परियोजना के लिए पूंजीगत निवेश (CapEx) का अंतिम खाका तैयार किया जा रहा है और आने वाले कुछ सप्ताह में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इस बीच कंपनी ने 400 टन क्षमता वाला पायलट प्लांट पहले ही शुरू कर दिया है। इस प्लांट के जरिए तकनीक और उत्पादन प्रक्रिया का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि बड़े स्तर पर कमर्शियल उत्पादन बिना किसी बाधा के शुरू किया जा सके।
क्यों बड़ा है यह मौका?
दुनियाभर में EV अपनाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। इसके चलते बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
कंपनी के मुताबिक—
- वर्तमान में वैश्विक बैटरी मैटेरियल बाजार करीब 2 TWh का है।
- वर्ष 2030 तक यह बढ़कर 5 TWh तक पहुंच सकता है।
- इससे 10 मिलियन टन से अधिक कैथोड मैटेरियल और 5 मिलियन टन से ज्यादा एनोड मैटेरियल की मांग पैदा होने का अनुमान है।
हिमाद्री का मानना है कि दोनों सेगमेंट में शुरुआती निवेश उसे भविष्य में बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देगा।
कंपनी की कमान किसके हाथ में?
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स के फाउंडर, चेयरमैन और CEO अनुराग चौधरी इस महत्वाकांक्षी योजना का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बैटरी सेक्टर आने वाले दशक का सबसे बड़ा अवसर बनने जा रहा है।
उनके अनुसार,
“इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर इंडस्ट्री के बाद अब EV क्रांति का दौर शुरू हो चुका है। बैटरी सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल की मांग आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ेगी और भारत इस सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकता है।”
LFP कैथोड प्लांट भी लगाएगी कंपनी
इससे पहले कंपनी लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) कैथोड एक्टिव मैटेरियल प्लांट लगाने की भी घोषणा कर चुकी है।
- शुरुआती उत्पादन क्षमता: 40,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष
- भविष्य में क्षमता बढ़ाकर: 2,00,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष
कंपनी का लक्ष्य है कि यह प्लांट FY29 से पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करे, जिससे राजस्व और मुनाफे दोनों में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिले।
शेयर ने निवेशकों को बनाया करोड़पति
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स का शेयर लंबे समय के निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हुआ है।
- लिस्टिंग: जुलाई 2002
- लिस्टिंग प्राइस: लगभग ₹0.50
- मौजूदा स्तर: करीब ₹688 प्रति शेयर
यानी करीब 24 वर्षों में इस शेयर ने लगभग 1,35,000% से अधिक का रिटर्न दिया है। इस दौरान लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों को जबरदस्त संपत्ति निर्माण का लाभ मिला।
हालांकि, शेयर बाजार में पिछले प्रदर्शन से भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और जोखिमों का मूल्यांकन करना जरूरी है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बैटरी निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल का घरेलू उत्पादन देश की आयात निर्भरता कम करेगा।
अगर हिमाद्री अपनी योजना के अनुसार उत्पादन शुरू करती है, तो इससे न केवल EV इंडस्ट्री को मजबूत सप्लाई मिलेगी बल्कि भारत वैश्विक बैटरी मैटेरियल बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


