HDFC Bank Share Price: HDFC बैंक के शेयरों में गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर करीब 1 फीसदी से ज्यादा चढ़कर ₹727 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बैंक के शेयर में यह तेजी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उस मंजूरी के बाद आई है, जिसके तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 फीसदी तक कर सकता है।
RBI की यह मंजूरी ऐसे समय आई है, जब HDFC Bank के शेयर पर इस साल दबाव देखने को मिला है। हालांकि, LIC को हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने से बाजार में निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है। आइए जानते हैं RBI के इस फैसले का HDFC Bank के शेयर पर क्या असर पड़ा और बैंक के हालिया तिमाही नतीजे कैसे रहे हैं।
RBI ने LIC को दी बड़ी मंजूरी
HDFC Bank ने बुधवार को बाजार बंद होने के बाद एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए जानकारी दी कि RBI ने LIC के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सरकारी बीमा कंपनी बैंक की पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स में अधिकतम 9.99 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।
बैंक के मुताबिक, RBI ने LIC की अर्जी के बाद 19 अगस्त 2026 को एक पत्र के जरिए यह मंजूरी दी। हालांकि, इस मंजूरी के साथ कुछ नियामकीय शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। LIC को बैंकिंग, विदेशी मुद्रा और सिक्योरिटी मार्केट से संबंधित नियमों के साथ-साथ लागू कानूनों और दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।
यह मंजूरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि LIC पहले से ही HDFC Bank की शेयरधारक है और अब उसके पास बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
अभी LIC के पास कितनी हिस्सेदारी है?
HDFC Bank की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त 2026 तक LIC के पास बैंक की कुल शेयर कैपिटल में 4.11 फीसदी हिस्सेदारी थी।
RBI की मंजूरी मिलने के बाद LIC सैद्धांतिक रूप से अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 फीसदी तक कर सकता है। यानी मौजूदा हिस्सेदारी से करीब 5.88 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल करने की गुंजाइश बनती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि LIC तुरंत पूरी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीद लेगा। RBI की मंजूरी अधिकतम सीमा तक हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति देती है। वास्तविक खरीदारी LIC के निवेश निर्णय और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
HDFC Bank Share Price में क्यों आई तेजी?
RBI की मंजूरी को बाजार ने सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया है। शुरुआती कारोबार में HDFC Bank का शेयर 1 फीसदी से अधिक की तेजी के साथ ₹727 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
सुबह के कारोबार में शेयर ने करीब ₹728.30 का इंट्राडे हाई भी बनाया। एक समय यह करीब 1.06 फीसदी की बढ़त के साथ ₹727.60 पर ट्रेड कर रहा था।
LIC जैसी बड़ी संस्थागत निवेशक को हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने से निवेशकों के बीच बैंक के शेयर को लेकर धारणा बेहतर हुई है। बाजार में आम तौर पर किसी बड़े संस्थागत निवेशक की ओर से हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना को कंपनी में दीर्घकालिक भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल इस मंजूरी के आधार पर शेयर के भविष्य की दिशा तय नहीं की जा सकती। बैंक के वित्तीय नतीजे, एसेट क्वालिटी, क्रेडिट ग्रोथ, ब्याज दरों और व्यापक बाजार की चाल भी शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करेंगे।
2026 में शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा?
RBI की मंजूरी के बाद HDFC Bank के शेयर में तेजी जरूर आई, लेकिन 2026 में अब तक इसका प्रदर्शन कमजोर रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक HDFC Bank का शेयर करीब 26.6 फीसदी नीचे है। इसकी तुलना में इसी अवधि में Nifty में लगभग 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
इससे पता चलता है कि इस साल HDFC Bank का शेयर व्यापक बाजार की तुलना में काफी कमजोर रहा है। ऐसे में LIC की संभावित हिस्सेदारी बढ़ाने की खबर को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹11.21 लाख करोड़ बताया गया है, जिससे यह भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंकों में शामिल है।
HDFC Bank के Q1 नतीजे कैसे रहे?
RBI की मंजूरी की खबर HDFC Bank के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों के बाद आई है। बैंक ने इस दौरान मुनाफे और नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी दर्ज की।
अप्रैल-जून तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98 फीसदी बढ़कर ₹19,059.72 करोड़ रहा।
वहीं, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 6.7 फीसदी बढ़कर ₹33,535.95 करोड़ हो गई। NII बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण पैमाना है, क्योंकि इससे बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई की तस्वीर सामने आती है।
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM कुल एसेट्स के आधार पर 3.26 फीसदी और इंटरेस्ट-अर्निंग एसेट्स के आधार पर 3.40 फीसदी रहा।
NPA में हुआ बदलाव
बैंक की एसेट क्वालिटी पर नजर डालें तो 30 जून 2026 तक HDFC Bank का ग्रॉस NPA, ग्रॉस एडवांसेज का 1.17 फीसदी था।
इसकी तुलना में पिछली तिमाही के अंत में ग्रॉस NPA 1.15 फीसदी और एक साल पहले 1.40 फीसदी था। यानी सालाना आधार पर बैंक की ग्रॉस NPA स्थिति में सुधार देखने को मिला है, हालांकि तिमाही आधार पर इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई।
वहीं, बैंक का नेट NPA 0.41 फीसदी रहा। बैंकिंग शेयरों के लिए एसेट क्वालिटी एक अहम संकेतक होती है और निवेशक इस आंकड़े पर लगातार नजर रखते हैं।
HDFC Bank Share Price: 52 हफ्ते के हाई से काफी नीचे
20 अगस्त के शुरुआती कारोबार में HDFC Bank का शेयर करीब ₹727 के आसपास कारोबार कर रहा था। इसका 52-वीक हाई ₹1,020.50 है। यानी शेयर अभी अपने 52-वीक हाई से काफी नीचे है।
शेयर की हालिया चाल देखें तो एक हफ्ते में इसमें करीब 0.31 फीसदी की बढ़त आई है। वहीं, एक महीने के दौरान शेयर करीब 6.48 फीसदी कमजोर हुआ है।
एक साल की अवधि में भी शेयर में करीब 26.84 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
HDFC Bank Share Price की हालिया चाल
| अवधि | शेयर में बदलाव |
|---|---|
| आज | करीब 1% से ज्यादा तेजी |
| 1 सप्ताह | +0.31% |
| 1 महीना | -6.48% |
| 1 साल | -26.84% |
| 2026 में अब तक | करीब -26.6% |
| 52-वीक हाई | ₹1,020.50 |
| आज का हाई | ₹728.30 के आसपास |
क्या LIC की हिस्सेदारी बढ़ने से शेयर को फायदा होगा?
LIC को HDFC Bank में 9.99 फीसदी तक हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलना निश्चित तौर पर बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है। इससे एक बड़े घरेलू संस्थागत निवेशक की बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाने की क्षमता बढ़ती है।
बाजार के नजरिए से यह खबर शॉर्ट टर्म में सेंटीमेंट को सपोर्ट कर सकती है। खासकर तब, जब HDFC Bank का शेयर इस साल व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर चुका है।
हालांकि, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि RBI की मंजूरी और वास्तविक हिस्सेदारी खरीद दो अलग-अलग चीजें हैं। केवल मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि LIC ने पूरी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीद ली है।
आगे शेयर की दिशा बैंक की क्रेडिट ग्रोथ, नेट इंटरेस्ट मार्जिन, एसेट क्वालिटी, मुनाफे की ग्रोथ और बाजार की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
HDFC Bank के शेयर में RBI की मंजूरी के बाद आई तेजी से यह संकेत मिलता है कि बाजार ने खबर को सकारात्मक तरीके से लिया है। लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए केवल एक दिन की तेजी को आधार बनाकर फैसला लेना उचित नहीं होगा।
बैंक के तिमाही नतीजों में मुनाफा और NII बढ़े हैं, जबकि ग्रॉस NPA सालाना आधार पर कम हुआ है। दूसरी ओर, शेयर का 2026 में कमजोर प्रदर्शन और 52-वीक हाई से काफी नीचे होना भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण पहलू है।
इसलिए HDFC Bank में निवेश करने से पहले निवेशकों को बैंक के वैल्यूएशन, भविष्य की ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न माना जाए।


