नई दिल्ली। जीएसटी के तहत कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ जल्द दिलाने के प्रस्ताव पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी। राज्यों की अलग-अलग राय के चलते इस मुद्दे पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अब इस मामले की समीक्षा के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है, जो अगले तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर दोबारा चर्चा होगी। इसके बाद यदि सहमति बनती है तो ITC भुगतान से जुड़े नए नियम को अगले साल 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है।
क्या है ITC और इसमें क्या बदलाव प्रस्तावित है?
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC कारोबारियों और कंपनियों के लिए जीएसटी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत किसी कारोबारी ने अपने कारोबार के लिए सामान या सेवाएं खरीदते समय जो जीएसटी चुकाया है, उसे बिक्री पर जमा किए जाने वाले जीएसटी से समायोजित करने की सुविधा मिलती है।
हालांकि मौजूदा व्यवस्था में ITC का लाभ लेने के लिए पूरी सप्लाई चेन का अनुपालन महत्वपूर्ण है। यदि सप्लाई चेन में किसी कारोबारी ने अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उससे जुड़े दूसरे कारोबारी का ITC भी अटक सकता है।
मसलन, किसी निर्माता ने कच्चा माल एक सप्लायर से खरीदा और निर्माता ने अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल कर दिया, लेकिन सप्लायर ने रिटर्न दाखिल नहीं किया। ऐसी स्थिति में निर्माता को उस खरीद पर मिलने वाला ITC प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।
कारोबारी के लिए क्यों बड़ी समस्या है यह नियम?
पूरी सप्लाई चेन के रिटर्न दाखिल होने पर ITC मिलने की मौजूदा व्यवस्था का सीधा असर कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर पड़ता है। खासतौर पर उन निर्माताओं के लिए समस्या ज्यादा बढ़ जाती है जो उत्पादन के लिए बड़ी संख्या में सप्लायर से कच्चा माल खरीदते हैं।
अगर सप्लाई चेन में शामिल किसी एक कारोबारी ने रिटर्न दाखिल नहीं किया या कारोबार बंद कर दिया, तो उससे जुड़े कारोबारी का ITC भी प्रभावित हो सकता है। इससे कारोबारी की पूंजी लंबे समय तक फंसी रह सकती है।
गारमेंट निर्माता और सदर बाजार के थोक कारोबारी श्रीभगवान बंसल के मुताबिक, कारोबारियों को उम्मीद थी कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में ITC भुगतान का यह मुद्दा सुलझ जाएगा। उनके अनुसार, यदि एक कारोबारी अपना रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो उसकी वजह से दूसरे कारोबारी की पूंजी को रोकना उचित नहीं है।
राज्यों ने क्यों जताई असहमति?
ITC भुगतान को सप्लाई चेन के सभी कारोबारियों के रिटर्न से अलग करने के प्रस्ताव को लेकर राज्यों की मुख्य चिंता अनुपालन से जुड़ी है।
राज्यों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में कारोबारी खुद ऐसे सप्लायर या व्यापारियों से खरीदारी करने की कोशिश करते हैं जो नियमित रूप से जीएसटी रिटर्न दाखिल करते हैं। कई बार वे अपने सप्लायर पर समय से रिटर्न दाखिल करने के लिए दबाव भी बनाते हैं।
अगर ITC का भुगतान सप्लाई चेन में दूसरे कारोबारी के रिटर्न से अलग कर दिया जाता है, तो रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई या उन्हें अनुपालन के लिए मजबूर करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी राज्यों पर आ सकती है।
राज्यों का कहना है कि इससे उनके प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इसी वजह से सभी राज्यों की सहमति नहीं बन सकी।
तीन महीने में रिपोर्ट देगी अधिकारी कमेटी
इस मुद्दे पर अब जीएसटी काउंसिल की ओर से अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी ITC भुगतान को तेज करने के प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और करीब तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
रिपोर्ट आने के बाद जीएसटी काउंसिल इस मामले पर दोबारा विचार करेगी। अगर अगली बैठक में सहमति बनती है तो नए प्रावधान को 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जा सकता है।
दवा निर्माताओं को प्लांट और मशीनरी पर ITC का लाभ
जीएसटी काउंसिल की बैठक में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े कुछ मामलों पर फैसला किया गया है। इसका लाभ खासतौर पर दवा निर्माताओं को मिलने की उम्मीद है।
दवा निर्माता कई इनपुट पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करते हैं, जबकि कुछ दवाओं और संबंधित उत्पादों पर जीएसटी की दर इससे कम, जैसे 5 प्रतिशत, होती है। ऐसी स्थिति में इनपुट पर चुकाया गया टैक्स और आउटपुट पर लगने वाले टैक्स के बीच अंतर पैदा होता है।
अब ऐसे मामलों में दवा निर्माताओं को प्लांट और मशीनरी से जुड़े ITC का लाभ देने का फैसला किया गया है। इससे उन कंपनियों को राहत मिल सकती है जिनकी उत्पादन प्रक्रिया में मशीनरी और प्लांट पर बड़ा निवेश होता है।
कुछ सेवाओं पर भी मिलेगा ITC
काउंसिल ने कुछ सेवाओं से जुड़े ITC के मामलों में भी राहत दी है। उदाहरण के तौर पर कार्यालय में आयोजित पार्टियों या कार्यक्रमों में कैटरिंग जैसी सेवाओं पर भुगतान किए गए जीएसटी को लेकर अब कुछ मामलों में ITC का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
इससे कारोबारियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता बढ़ सकती है और जीएसटी व्यवस्था में इनपुट पर चुकाए गए टैक्स के समायोजन की प्रक्रिया अधिक व्यापक हो सकती है।
कारोबारियों के लिए क्या मतलब?
ITC भुगतान में तेजी का फैसला अभी टल गया है, लेकिन इस मुद्दे पर अधिकारी कमेटी की रिपोर्ट के बाद तस्वीर साफ हो सकती है। यदि सप्लाई चेन में दूसरे कारोबारी के रिटर्न दाखिल करने से ITC को जोड़ने वाली मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होता है, तो निर्माताओं और थोक कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
फिलहाल कारोबारियों को कमेटी की रिपोर्ट और जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक के फैसले का इंतजार करना होगा।
Source: जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट पर आधारित
वित्तीय जानकारी संबंधी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। टैक्स और जीएसटी से जुड़े किसी निर्णय से पहले संबंधित नियमों, अधिसूचनाओं और विशेषज्ञ की सलाह की जांच करें।


