मुंबई: भारत में ग्रीन लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। एस्सार ग्रुप की कंपनी ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस समझौते के तहत डाबर इंडिया की सड़क परिवहन आधारित सप्लाई चेन में एलएनजी (Liquefied Natural Gas) से चलने वाले ट्रकों की तैनाती की जाएगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलेगा।
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब भारत की बड़ी कंपनियां अपने डिकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कम उत्सर्जन वाले परिवहन विकल्पों को तेजी से अपना रही हैं।
LNG ट्रकों से बनेगी अधिक टिकाऊ सप्लाई चेन
ग्रीनलाइन इस समझौते के तहत अपने एलएनजी ट्रकों को डाबर इंडिया के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में शामिल करेगी। इससे लंबी दूरी तक माल ढुलाई के दौरान पारंपरिक डीजल ट्रकों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम होगा। साथ ही, सप्लाई चेन की परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) और समय पर डिलीवरी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी प्रभावित नहीं होंगी।
कंपनी का कहना है कि यह कदम डाबर इंडिया की ग्रीन सप्लाई चेन विकसित करने की रणनीति को और मजबूत करेगा।
ग्रीन लॉजिस्टिक्स की ओर बढ़ता भारत
देश में उद्योग जगत अब पर्यावरण संरक्षण को अपनी कारोबारी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहा है। एफएमसीजी, स्टील, सीमेंट, केमिकल और माइनिंग जैसी बड़ी इंडस्ट्रीज कम कार्बन उत्सर्जन वाले परिवहन विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।
ग्रीनलाइन और डाबर इंडिया की यह साझेदारी इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियां अब सिर्फ लागत और दक्षता ही नहीं बल्कि सस्टेनेबिलिटी को भी प्राथमिकता दे रही हैं।
ग्रीनलाइन ने क्या कहा?
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स) चार्ल्स डेवलिन डी’कोस्टा ने कहा कि डाबर इंडिया जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के साथ साझेदारी करना उनके लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि देश की अग्रणी कंपनियां अब कम उत्सर्जन वाले लॉजिस्टिक्स समाधानों को अपनी व्यावसायिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही हैं। इस प्रकार की साझेदारियां भारत में स्वच्छ माल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेंगी और सड़क परिवहन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाएंगी।
डाबर इंडिया का क्या कहना है?
डाबर इंडिया के ग्लोबल डायरेक्टर (सप्लाई चेन) सम्राट सहगल ने कहा कि कंपनी की सस्टेनेबिलिटी रणनीति का प्रमुख उद्देश्य सप्लाई चेन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।
उन्होंने कहा कि ग्रीनलाइन के साथ यह सहयोग लॉजिस्टिक्स संचालन में कम उत्सर्जन वाले परिवहन को अपनाने का अवसर देगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि संचालन की दक्षता और विश्वसनीयता भी बनी रहेगी। उनके अनुसार, इस तरह के सहयोग भविष्य के लिए मजबूत और टिकाऊ सप्लाई चेन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ग्रीनलाइन का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा
ग्रीनलाइन भारत की पहली ऐसी ग्रीन लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो एलएनजी और इलेक्ट्रिक हैवी कमर्शियल ट्रकों के माध्यम से कम उत्सर्जन वाला सड़क माल परिवहन उपलब्ध करा रही है।
कंपनी के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- 1,000 से अधिक एलएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रक
- देश के प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर पर संचालन
- स्टील, सीमेंट, एफएमसीजी, केमिकल और माइनिंग सेक्टर को सेवाएं
- अब तक 10 करोड़ किलोमीटर से अधिक दूरी तय
- 27,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम करने में ग्राहकों की मदद
भारत में बढ़ रही ग्रीन ट्रांसपोर्ट की मांग
सरकार के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों और उद्योगों की सस्टेनेबिलिटी प्रतिबद्धताओं के चलते एलएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्रीन लॉजिस्टिक्स भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि ईंधन लागत और परिचालन दक्षता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस और डाबर इंडिया की यह साझेदारी भारत में ग्रीन लॉजिस्टिक्स को नई गति देने वाली पहल मानी जा रही है। एलएनजी आधारित ट्रकों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, सप्लाई चेन अधिक टिकाऊ बनेगी और उद्योग जगत के लिए पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का नया मॉडल तैयार होगा।


