नई दिल्ली: पिछले करीब 40 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹11,700 प्रति 10 ग्राम तक घट गया है, जबकि चांदी करीब ₹42,000 प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है। वैश्विक बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की मजबूती और कीमती धातुओं में बिकवाली के साथ-साथ भारत में आयात नीति से जुड़े बदलावों ने भी कीमतों पर असर डाला है।
10 मई से 29 जून तक कितना बदला सोने-चांदी का भाव?
करीब 40 दिन पहले यानी 10 मई को 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,53,140 प्रति 10 ग्राम था। वहीं 29 जून तक इसकी कीमत घटकर ₹1,41,421 प्रति 10 ग्राम पर आ गई। यानी इस दौरान सोना करीब ₹11,719 प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ।
इसी तरह चांदी की कीमत 10 मई को लगभग ₹2,62,350 प्रति किलोग्राम थी, जो 29 जून तक घटकर ₹2,16,541 प्रति किलोग्राम रह गई। इस प्रकार चांदी में लगभग ₹42,370 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।
आखिर क्यों टूटे सोने और चांदी के दाम?
कीमती धातुओं में आई इस गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण माने जा रहे हैं।
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली
पिछले कुछ सप्ताहों में वैश्विक निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना और इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
2. डॉलर की मजबूती
जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो सोने की अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर पड़ जाती है। इसी वजह से गोल्ड की कीमतों में नरमी देखने को मिली।
3. आयात नीति में बदलाव
सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका उद्देश्य कीमतें घटाना नहीं बल्कि आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना है।
4. घरेलू मांग में नरमी
ऊंची कीमतों के कारण पहले से ही ज्वेलरी की मांग प्रभावित थी। अब कीमतों में गिरावट आने के बावजूद कई खरीदार आगे और गिरावट की उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं।
क्या आयात शुल्क बढ़ने से कीमतें घटती हैं?
आमतौर पर आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में सोना महंगा हो सकता है। हालांकि इस बार कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण वैश्विक बाजार में कमजोरी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी लौटती है तो आयात शुल्क बढ़ने का असर भारतीय कीमतों में दोबारा दिखाई दे सकता है।
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए हर बड़ी गिरावट चरणबद्ध खरीदारी का अवसर हो सकती है। हालांकि अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में एकमुश्त निवेश के बजाय SIP या चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति मानी जाती है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। यदि आयात में कमी आती है तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है और व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, ज्वेलरी उद्योग और रिटेल मांग पर इसका असर अलग-अलग समय में देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
- 40 दिनों में सोना करीब ₹11,700 प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ।
- चांदी लगभग ₹42,000 प्रति किलोग्राम टूट चुकी है।
- वैश्विक बाजार की कमजोरी फिलहाल कीमतों पर दबाव बनाए हुए है।
- लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपना सकते हैं।
- खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार और MCX के ताजा भाव जरूर जांच लें।


