Gift Nifty Indicator: ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार, 13 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से वैश्विक बाजार के सेंटीमेंट को कुछ सहारा मिला है। वहीं, एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। इसके बावजूद GIFT Nifty लाल निशान में ट्रेड कर रहा है, जिससे घरेलू बाजार में शुरुआती दबाव की आशंका बनी हुई है।
बाजार की नजर आज GIFT Nifty के संकेतों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल मार्केट के रुख पर रहेगी। लगातार दो कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद निवेशक यह देखना चाहेंगे कि निफ्टी 50 अपने अहम सपोर्ट लेवल को बचा पाता है या नहीं।
GIFT Nifty से क्या मिल रहे हैं संकेत?
गुरुवार सुबह करीब 7:40 बजे GIFT Nifty 38 अंक यानी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 24,433 के आसपास कारोबार कर रहा था। GIFT Nifty में यह कमजोरी संकेत देती है कि भारतीय बाजार की शुरुआत पिछले बंद स्तर की तुलना में थोड़ी नरमी के साथ हो सकती है।
हालांकि, GIFT Nifty बाजार की ओपनिंग का केवल एक संकेतक है। कारोबार शुरू होने के बाद ग्लोबल संकेत, घरेलू खबरें, संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री और प्रमुख शेयरों में होने वाली गतिविधियां बाजार की दिशा को बदल सकती हैं।
दो दिनों की गिरावट के बाद बाजार
भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी दिन बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 187.90 अंक यानी 0.24 फीसदी गिरकर 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 35.75 अंक यानी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 24,435.95 पर बंद हुआ।
बाजार में खास तौर पर Tata Group से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। N चंद्रशेखरन के Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने के फैसले के बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि बाजार शुरुआती कमजोरी के बाद संभलता है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।
US महंगाई के आंकड़ों से एशियाई बाजारों को सहारा
अमेरिका में जुलाई के महंगाई आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहने से ग्लोबल मार्केट के सेंटीमेंट में सुधार देखने को मिला। जुलाई में US कंज्यूमर कीमतों में 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रही।
महंगाई के आंकड़े अपेक्षाकृत नरम रहने से यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को लेकर तत्काल सख्त रुख अपनाने का दबाव कम हो सकता है। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया।
MSCI के जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों के इंडेक्स में करीब 0.97 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 4.4 फीसदी चढ़ा, जबकि जापान के Nikkei 225 में करीब 1.86 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
इस तरह एशियाई बाजारों का व्यापक रुख भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है, लेकिन GIFT Nifty की कमजोरी घरेलू बाजार में सावधानी का संकेत दे रही है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेजी
अमेरिकी बाजार में भी पिछले कारोबारी सत्र में प्रमुख इंडेक्सों में मिला-जुला लेकिन कुल मिलाकर सकारात्मक रुख रहा। महंगाई के आंकड़ों के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों की मजबूत कमाई ने भी निवेशकों के सेंटीमेंट को सपोर्ट किया।
S&P 500 में 0.26 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई और यह 7,748.5 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nasdaq Composite 0.54 फीसदी बढ़कर 26,588.49 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ Dow Jones Industrial Average में 0.04 फीसदी की मामूली गिरावट रही।
अमेरिकी बाजार की यह मजबूती भारतीय बाजार के लिए एक सकारात्मक वैश्विक संकेत है। हालांकि, घरेलू बाजार में हालिया कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण इसका पूरा फायदा मिलने में चुनौती हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए राहत देने वाला संकेत है। गुरुवार को Brent crude futures करीब 1.5 फीसदी गिरकर 87.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं US WTI crude करीब 1.6 फीसदी गिरकर 81.97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसी कच्चे तेल की बड़ी आयातक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात बिल, महंगाई और कुछ कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, बाजार के लिए भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव और सप्लाई में संभावित बाधाओं की चिंता के कारण तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निफ्टी पर कौन से लेवल अहम रहेंगे?
Angel One के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च के चीफ मैनेजर ओशो कृष्ण के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,350 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण है। यह स्तर 20-DEMA के आसपास है और इसके ऊपर बने रहना बाजार के लिए जरूरी माना जा रहा है।
इसके अलावा 24,265 का इंट्राडे स्विंग लो भी शॉर्ट टर्म में अहम सपोर्ट है। अगर निफ्टी इस स्तर को निर्णायक तरीके से तोड़ देता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और शॉर्ट टर्म आउटलुक कमजोर हो सकता है।
दूसरी तरफ, ऊपर की ओर 24,550 से 24,600 का जोन अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इस क्षेत्र के ऊपर टिकाऊ तेजी आने पर बाजार में सकारात्मक मोमेंटम मजबूत हो सकता है।
आज बाजार में क्या रणनीति हो सकती है?
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों को निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर नजर रखनी चाहिए। 24,350 के आसपास बाजार को सपोर्ट मिलने पर रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है। वहीं 24,265 के नीचे कमजोरी बढ़ने की स्थिति में सावधानी जरूरी होगी।
दूसरी तरफ, अगर निफ्टी 24,550–24,600 के जोन को निर्णायक रूप से पार करके उसके ऊपर टिकता है, तो बाजार में दोबारा तेजी का मोमेंटम बन सकता है।
इस समय ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन GIFT Nifty की कमजोरी और घरेलू बाजार में हालिया गिरावट को देखते हुए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों की पुष्टि का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, GIFT Nifty आज भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, जबकि अमेरिकी और एशियाई बाजारों से अपेक्षाकृत सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। US महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को राहत दी है।
फिर भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली, घरेलू बाजार में लगातार दो दिनों की गिरावट और भू-राजनीतिक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में आज निफ्टी के लिए 24,350 और 24,265 सपोर्ट, जबकि 24,550–24,600 रेजिस्टेंस जोन अहम रहेंगे।
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