नई दिल्ली: अगर आप किसी जूस, नूडल्स, टोफू या अन्य पैकेज्ड फूड को सिर्फ उसके पैकेट पर लिखे आकर्षक दावों को देखकर खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जा रहे भ्रामक दावों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। नियामक ने कई कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों की ब्रांडिंग, लेबलिंग और विज्ञापनों पर सवाल उठाए हैं।
एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों से जुड़े दावे वैज्ञानिक तथ्यों और नियमों के अनुरूप होने चाहिए। यदि कोई दावा उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है या वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
‘No Added Sugar’ वाले जूस पर उठे सवाल
एफएसएसएआई ने प्लक्क (Pluckk) के मैंगो फ्रूट जूस को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। कंपनी ने अपने उत्पाद पर “No Added Sugar” का दावा किया था, लेकिन उत्पाद की सामग्री सूची में 51 प्रतिशत आम का गूदा और 49 प्रतिशत गन्ने का रस शामिल बताया गया है।
नियामक का मानना है कि ऐसा दावा उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि गन्ने के रस में प्राकृतिक रूप से बड़ी मात्रा में शर्करा मौजूद होती है। ऐसे में ग्राहक यह समझ सकते हैं कि उत्पाद में चीनी नहीं है, जबकि वास्तविकता अलग हो सकती है।
‘Natural Paneer’ नाम भी जांच के घेरे में
एफएसएसएआई ने एक ऐसे उत्पाद को भी नोटिस भेजा है जिसे “Natural Paneer” नाम से बेचा जा रहा था।
प्राधिकरण के अनुसार, यह एक कंपोजिट फूड उत्पाद है और इसके लिए “Natural” शब्द का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। एफएसएसएआई का कहना है कि इस तरह के नाम उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकते हैं कि उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक है, जबकि उसकी संरचना और निर्माण प्रक्रिया कुछ और हो सकती है।
टोफू पर किए गए स्वास्थ्य दावे नियमों के खिलाफ
टोफू उत्पादों पर किए गए कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावे भी एफएसएसएआई की जांच के दायरे में आए हैं।
उत्पाद पर “100% Veg”, “Vitamin Rich” और “Anti-Cancer Properties” जैसे दावे किए गए थे। नियामक ने कहा कि:
- “Vitamin Rich” लिखने के लिए विटामिन की मात्रा स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है।
- “Anti-Cancer” जैसा दावा बीमारी के उपचार या रोकथाम से जुड़ा दावा माना जाता है।
- ऐसे दावे भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत अनुमति प्राप्त नहीं हैं।
एफएसएसएआई के अनुसार, खाद्य उत्पादों को दवा की तरह प्रस्तुत करना नियमों का उल्लंघन है।
100% Natural नूडल्स पर भी कार्रवाई
मास्टरचाउ फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के रेमन नूडल्स पर किए गए “100% Natural” और “Freshly Made” जैसे दावों को भी नियामक ने भ्रामक माना है।
एफएसएसएआई का कहना है कि इस तरह के दावों के लिए वैज्ञानिक और नियामकीय आधार होना आवश्यक है। यदि कोई कंपनी इन दावों को साबित नहीं कर सकती, तो उन्हें पैकेजिंग और विज्ञापनों से हटाना पड़ सकता है।
किंडर जॉय उत्पाद को भी नोटिस
फेरेरो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक उत्पाद Kinder Joy Coated Wafer Biscuit with Cocoa Spreads को भी नोटिस जारी किया गया है।
उत्पाद पर “Rich in Milk Solids” का दावा किया गया था। एफएसएसएआई अब यह जांच कर रहा है कि क्या यह दावा निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप है या नहीं।
उपभोक्ताओं को क्यों रहना चाहिए सतर्क?
आज के समय में पैकेज्ड फूड बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए “Sugar Free”, “Natural”, “Healthy”, “High Protein” और “Immunity Booster” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन हर दावा पूरी तरह सही हो, यह जरूरी नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले:
- इंग्रीडिएंट्स की सूची पढ़नी चाहिए।
- न्यूट्रिशन फैक्ट्स की जांच करनी चाहिए।
- केवल बड़े-बड़े दावों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
- स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
FSSAI ने कंपनियों को क्या निर्देश दिए?
एफएसएसएआई ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और लेबलिंग व विज्ञापन संबंधी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। नियामक का स्पष्ट कहना है कि खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले सभी दावे वैज्ञानिक प्रमाणों और लागू नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
प्राधिकरण के अनुसार, भ्रामक दावे न केवल उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देते हैं बल्कि उनकी खरीदारी संबंधी पसंद और निर्णय को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाएगी।
निष्कर्ष
एफएसएसएआई की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावे अब आसानी से नहीं चलेंगे। वहीं ग्राहकों के लिए भी यह याद दिलाने वाला मामला है कि किसी भी उत्पाद को खरीदते समय सिर्फ पैकेजिंग पर लिखे आकर्षक शब्दों पर भरोसा करने के बजाय उसकी वास्तविक सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए।


