HighLights
- यूरोपीय संघ ने पहले कई पाकिस्तानी चावल की खेपों को मानकों के उल्लंघन पर अस्वीकार किया।
- रिपोर्टों में कुछ खेपों में कीटनाशक अवशेष और अफ्लाटॉक्सिन अधिक मिलने का दावा।
- बांग्लादेश 50,000 मीट्रिक टन चावल आयात करने की तैयारी में।
- विशेषज्ञों ने हर खेप की स्वतंत्र लैब जांच की जरूरत बताई।
नई दिल्ली: पाकिस्तान से निर्यात किए गए चावल को लेकर एक बार फिर खाद्य सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने पहले खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने के कारण पाकिस्तान से भेजी गई कई चावल की खेपों को अस्वीकार किया था। अब खबर है कि बांग्लादेश सरकार सार्वजनिक खाद्यान्न भंडार बढ़ाने और घरेलू बाजार में चावल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पाकिस्तान से 50,000 मीट्रिक टन चावल आयात करने की तैयारी कर रही है।
यह खरीद दोनों देशों के बीच सरकार-से-सरकार (Government-to-Government) समझौते के तहत होने की संभावना है। हालांकि, इस प्रस्तावित आयात को लेकर खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
यूरोपीय संघ ने क्यों लौटाई थीं चावल की खेपें?
रिपोर्टों के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने विभिन्न अवसरों पर पाकिस्तान से भेजी गई कुछ चावल की खेपों को इसलिए अस्वीकार किया क्योंकि उनमें कीटनाशकों के अवशेष (Pesticide Residues) निर्धारित अधिकतम सीमा (Maximum Residue Limits – MRL) से अधिक पाए गए थे।
यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे सख्त खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करता है। वहां आयात होने वाले खाद्य उत्पादों की प्रयोगशालाओं में विस्तृत जांच की जाती है। यदि किसी उत्पाद में तय सीमा से अधिक रासायनिक अवशेष पाए जाते हैं, तो उसे बाजार में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती।
ऐसी स्थिति में संबंधित खेप को या तो निर्यातक देश वापस भेज दिया जाता है या फिर नष्ट कर दिया जाता है।
अफ्लाटॉक्सिन क्या है और क्यों है खतरनाक?
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि कुछ पाकिस्तानी चावल की खेपों में अफ्लाटॉक्सिन (Aflatoxin) का संदूषण पाया गया।
अफ्लाटॉक्सिन एक विषैला पदार्थ है, जो आमतौर पर खराब भंडारण, नमी या फफूंद लगने के कारण अनाज और खाद्य पदार्थों में विकसित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक अफ्लाटॉक्सिन के संपर्क में रहने से:
- लीवर को नुकसान पहुंच सकता है।
- लीवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
- प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
- खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
इसी वजह से दुनिया के कई विकसित देशों में आयातित खाद्य पदार्थों में अफ्लाटॉक्सिन की मात्रा की बेहद कड़ी निगरानी की जाती है।
सिर्फ कीटनाशक ही नहीं, ये कमियां भी सामने आईं
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में पाकिस्तानी चावल की खेपों को केवल रासायनिक अवशेषों के कारण ही नहीं बल्कि अन्य तकनीकी कारणों से भी अस्वीकार किया गया।
इनमें शामिल हैं:
- दस्तावेजों में कमी
- उत्पाद की ट्रेसबिलिटी से जुड़ी खामियां
- गलत लेबलिंग
- स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary) नियमों का पालन न करना
ये सभी कारण अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार में गुणवत्ता और सुरक्षा के महत्वपूर्ण मानदंड माने जाते हैं।
बांग्लादेश क्यों खरीद रहा है पाकिस्तान से चावल?
बांग्लादेश इस समय अपने सार्वजनिक खाद्यान्न भंडार को मजबूत करने और घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है।
इसी उद्देश्य से सरकार पाकिस्तान से 50,000 मीट्रिक टन चावल खरीदने की योजना बना रही है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते पर जुलाई के पहले सप्ताह में हस्ताक्षर हो सकते हैं।
हालांकि, खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आयातित खाद्यान्न की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
विशेषज्ञों ने क्या दी सलाह?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश से आयात होने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक खेप की जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
- कीटनाशकों के अवशेष
- अफ्लाटॉक्सिन
- भारी धातुएं (Heavy Metals)
- सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी
- अन्य हानिकारक रासायनिक तत्व
उनका मानना है कि यदि किसी उत्पाद को पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों का सामना करना पड़ा हो, तो उसकी जांच और भी अधिक सख्ती से की जानी चाहिए।
क्या इसका मतलब है कि पूरा पाकिस्तानी चावल असुरक्षित है?
यह समझना जरूरी है कि किसी देश से आने वाली कुछ खेपों में गुणवत्ता संबंधी समस्या मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि उस देश का संपूर्ण उत्पादन असुरक्षित है।
खाद्य सुरक्षा जांच आमतौर पर विशिष्ट बैच (Lot/Consignment) के आधार पर की जाती है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रत्येक खेप की अलग-अलग जांच आवश्यक होती है।
निष्कर्ष
यूरोपीय संघ द्वारा पहले अस्वीकार की गई कुछ पाकिस्तानी चावल की खेपों को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बीच बांग्लादेश का 50,000 मीट्रिक टन चावल खरीदने का प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्यान्न आयात में कीमत के साथ-साथ गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। यदि प्रत्येक खेप की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए, तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।


