भारत में रसोई गैस यानी LPG पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन अब इस मॉडल को बदलने की दिशा में एक बड़ा सुझाव सामने आया है। हाल ही में All India Distillers’ Association (AIDA) ने केंद्र सरकार को एक अहम प्रस्ताव दिया है—देशभर में ethanol-based cooking को बढ़ावा देने का। यह कदम सिर्फ एक वैकल्पिक ईंधन की बात नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
इस प्रस्ताव के पीछे कई ठोस कारण हैं, जिनमें बढ़ती LPG आयात निर्भरता, वैश्विक अस्थिरता, और देश में तेजी से बढ़ती ethanol उत्पादन क्षमता शामिल हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इसका क्या असर हो सकता है।
LPG पर बढ़ती निर्भरता और वैश्विक संकट का असर
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा LPG आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई संकट आता है—जैसे West Asia में तनाव या सप्लाई चेन में बाधा—तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि geopolitical disruptions के कारण LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे सरकार को प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं को गैस देना पड़ता है, जबकि commercial सेक्टर को अक्सर कमी का सामना करना पड़ता है।
यही वह बिंदु है जहां AIDA का सुझाव महत्वपूर्ण हो जाता है। उनका मानना है कि अगर cooking fuel के तौर पर ethanol का उपयोग बढ़ाया जाए, तो LPG पर निर्भरता कम हो सकती है और देश ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकता है।
Ethanol उत्पादन में भारत की तेज़ी
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ethanol production के क्षेत्र में जबरदस्त निवेश किया है। AIDA के अनुसार, लगभग ₹40,000 करोड़ का निवेश इस सेक्टर में किया जा चुका है। इसके चलते देश की उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ी है।
आज भारत में ethanol blending program के तहत पेट्रोल में ethanol मिलाया जा रहा है, जिससे न सिर्फ प्रदूषण कम हो रहा है बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता भी घट रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20% blending का लक्ष्य काफी हद तक हासिल किया जा चुका है और आने वाले समय में यह और बढ़ सकता है।
लेकिन यहां एक नई चुनौती सामने आ रही है—surplus ethanol production। यानी उत्पादन इतना बढ़ रहा है कि उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। ऐसे में cooking fuel के तौर पर इसका इस्तेमाल एक logical अगला कदम बन जाता है।
Ethanol Cooking: कैसे काम करेगा यह मॉडल?
Ethanol-based cooking कोई बिल्कुल नई अवधारणा नहीं है, लेकिन भारत में यह अभी शुरुआती चरण में है। इस मॉडल में ethanol fuel का इस्तेमाल specially designed stoves में किया जाता है, जो clean combustion देते हैं।
AIDA का कहना है कि hydrous ethanol (जिसे dehydration की जरूरत नहीं होती) का इस्तेमाल किया जाए तो यह LPG के मुकाबले सस्ता पड़ सकता है। इसके अलावा यह जलने पर कम particulate matter छोड़ता है, जिससे indoor air pollution भी कम होता है।
हालांकि ethanol की calorific value LPG से कम होती है, लेकिन नई technology—जैसे efficient burners और improved stove design—इस कमी को काफी हद तक पूरा कर सकती है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा
Ethanol production का एक बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह agriculture-based है। भारत में ethanol मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और चावल जैसे crops से बनाया जाता है।
अगर ethanol cooking को बढ़ावा मिलता है, तो इससे इन फसलों की मांग बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है। यह खासतौर पर उन राज्यों के लिए फायदेमंद होगा जहां sugarcane और maize की खेती ज्यादा होती है।
इस तरह यह पहल सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि rural economy को भी मजबूत करेगी।
पर्यावरण के लिहाज से कितना बेहतर?
LPG को एक relatively clean fuel माना जाता है, लेकिन यह fossil fuel है और इसका उत्पादन व परिवहन carbon emissions से जुड़ा होता है। इसके मुकाबले ethanol एक renewable fuel है।
Ethanol combustion में कम soot और particulate matter निकलता है, जिससे indoor pollution कम होता है—खासकर उन घरों में जहां ventilation की समस्या होती है।
इसके अलावा, अगर ethanol production sustainable तरीके से किया जाए, तो यह carbon footprint को भी कम कर सकता है।
सरकार के लिए क्या चुनौतियां हैं?
हालांकि ethanol cooking का विचार promising है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए सरकार को कई स्तरों पर काम करना पड़ेगा:
- Policy framework बनाना: ethanol cooking को regulate करने के लिए clear guidelines जरूरी होंगी
- Safety standards तय करना: stove design और fuel handling के लिए strict norms चाहिए
- Infrastructure development: ethanol distribution network तैयार करना होगा
- Public awareness: लोगों को इस नए fuel के बारे में educate करना जरूरी है
AIDA ने अपने पत्र में सरकार से इन सभी पहलुओं पर काम करने की अपील की है।
क्या LPG पूरी तरह replace हो सकता है?
यह सवाल काफी महत्वपूर्ण है। फिलहाल ethanol cooking को LPG का replacement नहीं, बल्कि complementary fuel के तौर पर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि urban households में LPG की जगह लेना मुश्किल होगा, लेकिन semi-urban और rural areas में ethanol एक अच्छा विकल्प बन सकता है—खासकर commercial kitchens और छोटे व्यवसायों के लिए।
इसका मतलब है कि भविष्य में भारत एक multi-fuel cooking system की ओर बढ़ सकता है, जहां LPG, electricity और ethanol सभी का इस्तेमाल होगा।
Energy Security के लिए बड़ा कदम
भारत जैसे देश के लिए energy security एक बड़ा मुद्दा है। जितना ज्यादा देश imported fuels पर निर्भर रहेगा, उतना ही global market fluctuations का असर पड़ेगा।
Ethanol cooking को बढ़ावा देना इस दिशा में एक strategic कदम हो सकता है। इससे न सिर्फ import bill कम होगा, बल्कि domestic production को भी boost मिलेगा।
निष्कर्ष: क्या बदल सकता है भारत का किचन फ्यूल मॉडल?
AIDA का यह प्रस्ताव सिर्फ एक policy suggestion नहीं है, बल्कि भारत के energy ecosystem को बदलने की क्षमता रखता है। अगर सरकार इसे सही तरीके से implement करती है, तो आने वाले वर्षों में cooking fuel का पूरा landscape बदल सकता है।
LPG पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, भारत एक diversified fuel system की ओर बढ़ सकता है, जहां sustainability, affordability और energy security तीनों का संतुलन हो।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाती है और क्या ethanol cooking वास्तव में भारतीय घरों तक पहुंच पाता है या नहीं।
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