Tata Power Solar Plant: देश की दिग्गज कंपनी टाटा पावर ने ओडिशा में एक बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। कंपनी गोपालपुर में ₹6,675 करोड़ की लागत से 10 गीगावाट (GW) क्षमता वाला इंगॉट और वेफर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। यह प्रोजेक्ट भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी ने आंध्र प्रदेश की तुलना में ओडिशा को प्राथमिकता दी है, जिसकी मुख्य वजह कम बिजली लागत, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी इंसेंटिव हैं।
Highlights
- ₹6,675 करोड़ की लागत से लगेगा 10 GW का सोलर इंगॉट-वेफर प्लांट
- ओडिशा के गोपालपुर में बनेगी अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी
- जनवरी 2028 से पहले चरण में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद
- दो चरणों में विकसित होगा पूरा प्रोजेक्ट
- न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए भी कई राज्यों में जमीन की तलाश जारी
- बेहतर बिजली दर और सरकारी सपोर्ट के चलते ओडिशा का चयन
गोपालपुर में बनेगा अत्याधुनिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
टाटा पावर ओडिशा के गोपालपुर में 10 GW क्षमता वाला इंगॉट और वेफर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। इस परियोजना पर कुल ₹6,675 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह प्लांट भारत में सोलर उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
कंपनी ने विस्तृत मूल्यांकन के बाद आंध्र प्रदेश के बजाय ओडिशा को चुना। इसके पीछे राज्य सरकार की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और अपेक्षाकृत कम बिजली लागत प्रमुख कारण बताए गए हैं।
क्यों चुना गया ओडिशा?
टाटा पावर के CEO एवं MD प्रवीर सिन्हा के अनुसार कंपनी ने कई राज्यों का अध्ययन किया था। अंततः ओडिशा सबसे उपयुक्त विकल्प साबित हुआ क्योंकि यहां उद्योगों के लिए बिजली की लागत कम है और सरकार की ओर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा गोपालपुर में जमीन पहले से उपलब्ध थी। यहां टाटा स्टील स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) विकसित कर रही है, जिससे परियोजना को तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी।
दो चरणों में तैयार होगा प्रोजेक्ट
कंपनी इस परियोजना को दो चरणों में विकसित करेगी।
- पहले चरण में 5 GW क्षमता स्थापित की जाएगी।
- जनवरी 2028 से पहले चरण का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
- लगभग छह महीने बाद दूसरे 5 GW चरण का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।
इस तरह पूरी परियोजना के चालू होने के बाद कुल क्षमता 10 GW हो जाएगी।
पहली तिमाही में बढ़ा मुनाफा
टाटा पावर ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के मजबूत वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं।
- कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 11% बढ़कर ₹1,401 करोड़ रहा।
- पिछले वर्ष समान अवधि में यह ₹1,262 करोड़ था।
- ऑपरेशन से राजस्व 5.6% बढ़कर ₹19,051.26 करोड़ पहुंच गया।
- पिछले वर्ष यह ₹18,035.07 करोड़ था।
- हालांकि EBITDA करीब 3% घटकर ₹4,013 करोड़ दर्ज किया गया।
मजबूत आय और लगातार विस्तार योजनाएं कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को मजबूती देती हैं।
न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम
सोलर सेक्टर के साथ-साथ टाटा पावर न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रही है।
कंपनी मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में संभावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन चयन को लेकर उन्नत स्तर की बातचीत कर रही है। शुरुआती साइट सर्वे, मिट्टी परीक्षण और जियोटेक्निकल स्टडी पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
कंपनी अगले 6 से 8 महीनों में अंतिम निर्णय लेने की उम्मीद कर रही है।
किन रिएक्टरों पर चल रहा विचार?
टाटा पावर इस परियोजना के लिए सरकारी कंपनी NPCIL के साथ विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रही है।
संभावित विकल्पों में शामिल हैं—
- 220 मेगावाट के छोटे रिएक्टर
- 700 मेगावाट के स्टैंडर्ड न्यूक्लियर रिएक्टर
कंपनी भविष्य की बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त मॉडल का चयन करेगी।
आज टाटा पावर के शेयर पर रहेगी नजर
इस बड़े निवेश की घोषणा के बाद बाजार की नजर टाटा पावर के शेयर पर रहेगी। सोमवार को कंपनी का शेयर 0.72% की बढ़त के साथ ₹377.25 पर बंद हुआ था। निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनी की दीर्घकालिक विस्तार योजनाएं भविष्य में इसके कारोबार को नई मजबूती देंगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


