INR vs USD Today: भारतीय रुपया मंगलवार, 28 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे की मजबूती के साथ 95.76 प्रति डॉलर पर खुला। सोमवार को छह सप्ताह की सबसे बड़ी तेजी दर्ज करने के बाद रुपये में यह मजबूती देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रियता, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी मुद्रा प्रवाह (Forex Inflows) ने रुपये को सहारा दिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल यह केवल एक करेक्शन है और लंबी अवधि में डॉलर अभी भी मजबूत रह सकता है।
15 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला रुपया
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.76 पर खुला, जबकि सोमवार को यह 95.91 पर बंद हुआ था। सोमवार के सत्र में रुपया करीब 70 पैसे मजबूत हुआ था, जो पिछले छह सप्ताह की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त रही।
इससे पहले सोमवार को रुपया 96.15 के स्तर पर खुला था, लेकिन दिनभर की मजबूती के बाद बेहतर स्तर पर बंद होने में सफल रहा।
RBI के दखल ने संभाला रुपया
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI ने स्पॉट मार्केट में डॉलर बेचकर रुपये को बड़ी गिरावट से बचाया। जानकारों के मुताबिक केंद्रीय बैंक नहीं चाहता था कि डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर से ऊपर कमजोर हो।
हालांकि RBI लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका उद्देश्य किसी निश्चित विनिमय दर (Exchange Rate) को बनाए रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी हाल ही में संकेत दिया कि मौजूदा स्तर पर भारतीय रुपया अंडरवैल्यूड नहीं माना जा सकता। इससे यह संदेश गया कि केंद्रीय बैंक बाजार आधारित विनिमय दर नीति पर कायम है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती, लेकिन कच्चा तेल फिसला
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, बढ़कर 101.50 पर पहुंच गया है। एक महीने पहले यह 101.11 के आसपास था।
दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में राहत की बात यह रही कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत गिरकर करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। मंगलवार को इसमें 1.64% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
तेल की कीमतों में कमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे आयात बिल कम होता है और रुपये को समर्थन मिलता है।
फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
इस सप्ताह अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve (Fed) की FOMC बैठक भी बाजार की दिशा तय कर सकती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक CME FedWatch Tool के अनुसार, 25 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना एक सप्ताह पहले 16% थी, जो अब बढ़कर 37.9% हो गई है। हालांकि, अभी भी दरों को स्थिर रखने की संभावना बनी हुई है।
यदि फेड सख्त रुख अपनाता है तो डॉलर को और मजबूती मिल सकती है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी दिखाई देगा।
एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन कैसा रहा?
मंगलवार को अधिकांश एशियाई मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रहीं।
- दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
- ताइवान डॉलर और इंडोनेशियाई रुपिया भी दबाव में रहे।
- थाई बहत, सिंगापुर डॉलर, फिलीपीन पेसो और जापानी येन में भी हल्की कमजोरी देखी गई।
- वहीं चीनी रेनमिनबी और मलेशियाई रिंगित अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होने वाली चुनिंदा एशियाई मुद्राएं रहीं।
FCNR-B इनफ्लो से मिला सपोर्ट
Finrex Treasury Advisors के मुताबिक रुपये की मजबूती के पीछे कई अहम कारण हैं।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट
- RBI का सक्रिय हस्तक्षेप
- विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह
- FCNR-B डिपॉजिट के जरिए संभावित 32 अरब डॉलर का इनफ्लो
विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी कारणों ने मिलकर रुपये पर दबाव कम किया है, जबकि तेल कंपनियों और आयातकों की ओर से डॉलर की खरीदारी जारी रही।
आगे क्या रहेगा रुपये का स्तर?
CR Forex Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पबारी का मानना है कि फिलहाल रुपये में जो मजबूती आई है, वह ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं बल्कि एक तकनीकी करेक्शन है।
उनके अनुसार 95.70–95.80 का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन रहेगा। यदि रुपया इस स्तर के ऊपर टिकता है तो निकट अवधि में स्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में उनका अनुमान है कि USD/INR फिर से 96.80–97.00 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये की चाल आने वाले दिनों में इन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी—
- RBI की बाजार में सक्रियता
- कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर फैसला
- विदेशी निवेशकों (FII) का रुख
- डॉलर इंडेक्स की दिशा
यदि तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत रहता है तो रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है। वहीं फेड की सख्त नीति या डॉलर में नई मजबूती आने पर रुपये पर फिर दबाव बन सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दिए गए बाजार विशेषज्ञों के विचार उनके निजी हैं। NewsJagran.in किसी भी निवेश सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेता। विदेशी मुद्रा या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश अथवा ट्रेडिंग से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


