नई दिल्ली। दुनिया इस समय एलन मस्क के दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की चर्चा कर रही है। स्पेसएक्स के ऐतिहासिक आईपीओ और उनकी कंपनियों के बढ़ते मूल्यांकन ने उनकी कुल संपत्ति को 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े के पार पहुंचा दिया है। लेकिन इससे पहले दुनिया ने एक और ऐतिहासिक मुकाम देखा था, जब एक अमेरिकी कारोबारी ने पहली बार 1 अरब डॉलर की संपत्ति का आंकड़ा पार किया था। वह शख्स थे जॉन डी. रॉकफेलर, जिन्हें आज भी दुनिया का पहला आधिकारिक अरबपति माना जाता है।
HighLights
- जॉन डी. रॉकफेलर को दुनिया का पहला आधिकारिक अरबपति माना जाता है
- 1916 में उनकी संपत्ति 1 अरब डॉलर के पार पहुंच गई थी
- स्टैंडर्ड ऑयल का अमेरिका की 90% तेल रिफाइनिंग पर नियंत्रण था
- उनकी संपत्ति उस समय अमेरिका की GDP के लगभग 2% के बराबर थी
दिलचस्प बात यह है कि रॉकफेलर किसी अमीर परिवार में पैदा नहीं हुए थे। उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में नौकरी शुरू की और कुछ दशकों के भीतर ऐसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा कर दिया जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों को बदल दिया।
कौन थे जॉन डी. रॉकफेलर?
जॉन डेविसन रॉकफेलर का जन्म 8 जुलाई 1839 को अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में हुआ था। बचपन से ही वह पैसों के प्रबंधन और व्यापारिक समझ के लिए जाने जाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए कम उम्र में ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया।
साल 1855 में, जब उनकी उम्र केवल 16 वर्ष थी, तब उन्होंने एक कंपनी में असिस्टेंट बुककीपर के रूप में नौकरी शुरू की। यही नौकरी उनके बिजनेस करियर की पहली सीढ़ी साबित हुई। अकाउंटिंग और फाइनेंस की बारीकियों को समझने के बाद उन्होंने जल्द ही अपना व्यापार शुरू करने का फैसला किया।
20 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार
रॉकफेलर ने 20 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते कई बिजनेस पार्टनरशिप शुरू कर दी थीं। शुरुआत में उनका कारोबार कृषि उत्पादों और कमोडिटी ट्रेडिंग से जुड़ा था। लेकिन जल्द ही उनकी नजर उस उद्योग पर पड़ी जो आने वाले दशकों में दुनिया की दिशा तय करने वाला था—तेल उद्योग।
उस समय अमेरिका में तेल की खोज तेजी से बढ़ रही थी। रॉकफेलर ने समझ लिया कि केवल तेल निकालना ही नहीं, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और वितरण में भी भारी कमाई की संभावना है। यहीं से उनकी असली कारोबारी यात्रा शुरू हुई।
स्टैंडर्ड ऑयल ने बदल दी किस्मत
साल 1870 में रॉकफेलर ने स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी आगे चलकर अमेरिकी इतिहास की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में से एक बनी।
रॉकफेलर की रणनीति बेहद अलग थी। उन्होंने केवल तेल उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि रिफाइनिंग, स्टोरेज, पाइपलाइन और वितरण नेटवर्क पर भी नियंत्रण स्थापित किया। इससे लागत कम हुई और प्रतिस्पर्धियों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल होता गया।
1880 के दशक तक स्टैंडर्ड ऑयल का अमेरिका की लगभग 90 प्रतिशत तेल रिफाइनिंग क्षमता और पाइपलाइन नेटवर्क पर नियंत्रण हो चुका था। उस दौर में ऊर्जा उद्योग पर ऐसा प्रभुत्व किसी अन्य कंपनी के पास नहीं था।
कैसे बने दुनिया के पहले अरबपति?
तेल उद्योग के तेजी से विस्तार और स्टैंडर्ड ऑयल के शेयरों में बढ़ोतरी ने रॉकफेलर की संपत्ति को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। वर्ष 1916 में उनकी कुल संपत्ति आधिकारिक रूप से 1 अरब डॉलर के पार पहुंच गई।
इसी उपलब्धि के कारण उन्हें दुनिया का पहला आधिकारिक अरबपति माना जाता है। हालांकि इतिहास में कई राजा-महाराजाओं और शासकों के पास इससे अधिक संपत्ति होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन आधुनिक आर्थिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर रॉकफेलर को पहला प्रमाणित अरबपति माना जाता है।
आज के हिसाब से कितनी होती उनकी संपत्ति?
1916 में 1 अरब डॉलर की कीमत आज के समय में महंगाई को समायोजित करने के बाद लगभग 30 अरब डॉलर से अधिक मानी जाती है। लेकिन केवल महंगाई के आधार पर तुलना करना उनकी वास्तविक आर्थिक ताकत को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
उस समय उनकी संपत्ति अमेरिका की कुल GDP का लगभग 2 प्रतिशत थी। यदि आज किसी व्यक्ति के पास अमेरिकी GDP के बराबर अनुपात की संपत्ति हो, तो उसकी नेटवर्थ कई सौ अरब डॉलर से भी अधिक हो सकती है।
इसी वजह से कई आर्थिक इतिहासकार रॉकफेलर को इतिहास के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल करते हैं।
केरोसिन और गैसोलीन ने बनाया अरबपति
रॉकफेलर की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण ऊर्जा क्षेत्र में समय रहते किया गया निवेश था। उस दौर में केरोसिन घरों और उद्योगों में रोशनी का प्रमुख साधन बन चुका था। बाद में ऑटोमोबाइल उद्योग के विकास के साथ गैसोलीन की मांग भी तेजी से बढ़ी।
जैसे-जैसे तेल उत्पादों की जरूरत बढ़ती गई, स्टैंडर्ड ऑयल का कारोबार और मुनाफा भी बढ़ता गया। इससे रॉकफेलर की संपत्ति में विस्फोटक वृद्धि हुई और वह अमेरिका के सबसे धनी व्यक्ति बन गए।
विवादों में भी रहा स्टैंडर्ड ऑयल
रॉकफेलर की सफलता जितनी बड़ी थी, उतने ही बड़े विवाद भी उनके साथ जुड़े रहे। स्टैंडर्ड ऑयल पर बाजार में एकाधिकार स्थापित करने के आरोप लगते रहे।
अमेरिकी सरकार ने अंततः एंटी-ट्रस्ट कानूनों के तहत कार्रवाई की और 1911 में स्टैंडर्ड ऑयल को कई अलग-अलग कंपनियों में विभाजित करने का आदेश दिया। हालांकि इस फैसले के बाद भी रॉकफेलर की संपत्ति और बढ़ गई क्योंकि नई कंपनियों के शेयरों का मूल्य तेजी से बढ़ा।
दिलचस्प बात यह है कि स्टैंडर्ड ऑयल से निकली कई कंपनियां आगे चलकर दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियां बनीं, जिनमें एक्सॉन और शेवरॉन जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
रॉकफेलर के दो बड़े सपने
रॉकफेलर के बारे में एक प्रसिद्ध किस्सा है कि युवावस्था में उनकी दो बड़ी महत्वाकांक्षाएं थीं।
पहली, वे 100,000 डॉलर कमाना चाहते थे।
दूसरी, वे 100 वर्ष तक जीना चाहते थे।
पहला सपना तो उन्होंने बहुत पहले पूरा कर लिया और अंततः उससे हजारों गुना अधिक संपत्ति अर्जित की। हालांकि दूसरा सपना थोड़ा अधूरा रह गया। उनका निधन 23 मई 1937 को 97 वर्ष की आयु में हुआ।
आज भी क्यों याद किए जाते हैं रॉकफेलर?
जॉन डी. रॉकफेलर केवल एक सफल कारोबारी नहीं थे, बल्कि आधुनिक कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक थे। उन्होंने यह दिखाया कि दूरदृष्टि, वित्तीय अनुशासन और सही समय पर सही उद्योग में निवेश किस तरह असाधारण संपत्ति बना सकता है।
एलन मस्क के ट्रिलियनेयर बनने की चर्चा के बीच रॉकफेलर की कहानी यह याद दिलाती है कि दुनिया का पहला अरबपति भी कभी 16 साल का एक साधारण कर्मचारी था, जिसने अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दशकों तक लगातार मेहनत की।


