Delhi Satya Niketan Building Collapse: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस के पास एक संकरी गली में स्थित थी और इसका इस्तेमाल लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) के तौर पर किया जा रहा था।
इमारत के अचानक गिरने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद सामने आए CCTV फुटेज में कुछ ही सेकंड में पूरी बिल्डिंग के धराशायी होने और सड़क पर धूल का घना गुबार छाने का खौफनाक दृश्य दिखाई दे रहा है।
घटना के बाद से ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, NDRF और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और उसमें फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
दोपहर करीब 1:30 बजे मिली थी हादसे की सूचना
#WATCH | Delhi: CCTV footage from the building collapse site in Satya Niketan of Delhi's South-West district. Six people have lost their lives.
(Source: Local Resident) pic.twitter.com/7MtDbb3pJF
— ANI (@ANI) September 7, 2026 पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन में इमारत गिरने की सूचना दिल्ली फायर सर्विस को मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और बचाव दल घटनास्थल पर भेजे गए।
मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू किया गया। शुरुआती कार्रवाई में कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कई लोग मलबे के नीचे फंसे बताए गए।
देर रात तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान एक और शव बरामद हुआ। इसके बाद हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई।
करीब 30 साल पुरानी थी पांच मंजिला इमारत
बताया जा रहा है कि हादसे में ढही इमारत करीब 30 साल पुरानी थी। यह पांच मंजिला इमारत एक संकरी गली में बनी थी और इसमें लड़कों के लिए PG संचालित हो रहा था।
हादसे के बाद इमारत की निर्माण गुणवत्ता, उसकी सुरक्षा और कथित तौर पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम किए जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, इमारत आखिर किन परिस्थितियों में अचानक गिरी, इसकी पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटीं कई एजेंसियां
हादसे के बाद NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं।
भारी मलबे के कारण बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा। टीमों ने मशीनों और दूसरे उपकरणों की मदद से मलबा हटाया और संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की।
स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी बचाव अभियान में मदद करते नजर आए। कई लोगों ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबा हटाने की कोशिश की।
10 घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया
हादसे में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। AIIMS की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 10 घायलों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया।
घायलों की स्थिति और हादसे में प्रभावित लोगों की संख्या को लेकर संबंधित एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
मकान मालिक समेत अन्य लोगों पर FIR
सत्य निकेतन हादसे के मामले में पुलिस ने इमारत के कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
पुलिस के मुताबिक, मामला गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि इमारत का इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चलने की बात सामने आई है। मामले में आरोपित लोगों की तलाश के लिए पुलिस ने कई टीमें गठित की हैं।
MCD ने अवैध निर्माण पर सख्ती के दिए निर्देश
सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर बहस तेज हो गई है। हादसे के बाद MCD की ओर से चार मंजिल से अधिक वाले कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि यदि इमारत के निर्माण की अनुमति देने या उससे जुड़े मामले में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे ने खास तौर पर उन इलाकों में छात्रों और PG में रहने वाले युवाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां सीमित जगह में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं।
पूर्व मुख्य सचिव ने निर्माण व्यवस्था पर उठाए सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने इस घटना को केवल एक इमारत के गिरने की घटना तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने दिल्ली के कई इलाकों में कथित अनधिकृत निर्माण और भवन सुरक्षा से जुड़े मामलों पर चिंता जताई।
उनके अनुसार, कुछ जगहों पर स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े सवाल सामने आते रहे हैं।
उन्होंने अधिक आबादी और निर्माण दबाव वाले इलाकों में भवन निर्माण के नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत पर जोर दिया।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा PG में रहते हैं। हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से भी सवाल उठाए गए।
कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने दिल्ली में पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए आने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी में अनधिकृत निर्माण और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
वहीं, NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने भी हादसे और राहत अभियान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों की मौत हुई है और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को भी चोटें आईं।
दूसरी ओर, दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत चौधरी ने भी हादसे को गंभीर बताते हुए राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने की अपील की।
अब जांच से सामने आएगी हादसे की असली वजह
सत्य निकेतन की इमारत गिरने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक कैसे ढह गई।
क्या इमारत की संरचना कमजोर थी? क्या इसमें नियमों के विपरीत निर्माण या अतिरिक्त बदलाव किए गए थे? क्या मरम्मत कार्य का इमारत की मजबूती पर कोई असर पड़ा? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान पूरा करने के साथ-साथ प्रशासन का ध्यान हादसे की वजह और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने पर है। इस दर्दनाक घटना ने दिल्ली में PG और अनधिकृत निर्माण में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


