दिल्ली-NCR में बढ़ रहे बुखार और फ्लू के मामले
दिल्ली-NCR में मानसून के बीच बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। अस्पतालों की OPD और इमरजेंसी में तेज बुखार, खांसी, शरीर में दर्द और डेंगू जैसे लक्षणों वाले मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A यानी H1N1 के मामलों में भी तेजी आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नमी वाला मौसम, रुक-रुककर होने वाली बारिश, बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में लंबे समय तक रहना तथा फ्लू वैक्सीनेशन की कम दर संक्रमण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल हो सकती है। हालांकि, अधिकांश मरीज उचित आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
डॉक्टरों ने खास तौर पर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन लेवल कम होने, अत्यधिक सुस्ती या अचानक बिगड़ती तबीयत जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है।
मौसम और बंद जगहों से बढ़ रहा संक्रमण
BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल के अनुसार, हाल के हफ्तों में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए OPD और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
उनके मुताबिक, इस समय रेस्पिरेटरी वायरस और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। मानसून में नमी और रुक-रुककर होने वाली बारिश संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं के प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती है।
H1N1 के बढ़ते मामलों के पीछे विशेषज्ञ तीन प्रमुख कारण बताते हैं। पहला, गर्म और नम मौसम। दूसरा, लोगों का एयर कंडीशन वाले बंद कमरों, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी जगहों पर ज्यादा समय बिताना। तीसरा, फ्लू वैक्सीनेशन और संक्रमण से बचाव संबंधी सावधानियों की कमी।
दिल्ली में H1N1 के मामलों में उछाल
फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अर्जुन खन्ना ने हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं। उनके अनुसार, यह संख्या पिछले साल इसी अवधि की तुलना में करीब छह गुना अधिक है।
डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू संक्रमण शुरुआत में सामान्य वायरल बुखार जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का स्तर गिरने और गंभीर फेफड़ों की समस्या का कारण बन सकता है।
H1N1 से पीड़ित मरीजों में तेज बुखार, कंपकंपी, शरीर में दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
हालांकि, हर बुखार H1N1 नहीं होता। मानसून में H3N2 सहित अन्य इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन, राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे रेस्पिरेटरी संक्रमण भी हो सकते हैं।
H1N1 के इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
H1N1 के सामान्य लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- तेज बुखार और कंपकंपी
- शरीर में तेज दर्द
- सिरदर्द
- अत्यधिक थकान
- सूखी खांसी
- गले में खराश
- कुछ बच्चों में उल्टी या दस्त
लेकिन कुछ लक्षण गंभीर बीमारी की तरफ इशारा कर सकते हैं। अगर बुखार या फ्लू के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या बेचैनी, असामान्य रूप से ज्यादा नींद आना, भ्रम की स्थिति या ऑक्सीजन लेवल कम होना दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
अगर मरीज की हालत सुधरने के बाद अचानक दोबारा तेज बुखार हो जाए और खांसी बढ़ने लगे, तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए। यह निमोनिया या किसी अन्य जटिलता का संकेत हो सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
डॉक्टरों के मुताबिक, हर हल्के फ्लू जैसे संक्रमण में टेस्ट की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ हाई-रिस्क ग्रुप में चिकित्सकीय सलाह और जरूरत पड़ने पर जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
इनमें शामिल हैं:
- 65 साल से अधिक उम्र के लोग
- 5 साल से कम उम्र के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- डायबिटीज से पीड़ित लोग
- अस्थमा या पुरानी फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज
- किडनी या हृदय रोग से पीड़ित लोग
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
- कैंसर का इलाज करा रहे या ऑर्गन ट्रांसप्लांट करा चुके लोग
- ऐसे मरीज जिनकी हालत लगातार बिगड़ रही हो
ऐसे मरीजों में फ्लू की जांच और उपचार को लेकर डॉक्टर जल्दी निर्णय ले सकते हैं।
एंटीवायरल दवा कब ज्यादा प्रभावी होती है?
डॉक्टरों के अनुसार, H1N1 या इन्फ्लूएंजा के गंभीर या हाई-रिस्क मामलों में एंटीवायरल उपचार की जरूरत पड़ सकती है। ओसेल्टामिविर जैसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और लक्षण शुरू होने के शुरुआती 48 घंटों में शुरू करने पर इनका फायदा अधिक हो सकता है।
गंभीर लक्षण वाले या हाई-रिस्क मरीजों में डॉक्टर टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार किए बिना भी उपचार शुरू करने का फैसला कर सकते हैं। इसलिए खुद से एंटीवायरल दवा लेना उचित नहीं है।
डेंगू के मरीज भी बढ़े
मानसून के साथ दिल्ली-NCR में डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है। दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के इंटरनल मेडिसिन डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल के मुताबिक, उनकी OPD में रोजाना डेंगू या H1N1 के संदेह वाले मरीज पहुंच रहे हैं।
कुछ मरीजों में गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी और प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे संकेत देखे जा रहे हैं। ऐसे मामलों में अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं, जिन मरीजों की हालत स्थिर होती है, उन्हें डॉक्टर पर्याप्त तरल पदार्थ लेने और अपनी स्थिति पर नजर रखने की सलाह दे सकते हैं।
डेंगू से बचाव के लिए क्या करें?
डेंगू से बचने के लिए घर और आसपास मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करना जरूरी है। खासतौर पर कहीं भी पानी जमा न होने दें।
मच्छरों से बचाव के लिए:
- घर के आसपास जमा पानी तुरंत हटाएं।
- कूलर, गमले और अन्य कंटेनर नियमित रूप से साफ करें।
- मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- लगातार बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
- डेंगू के संदिग्ध मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं।
H1N1 और डेंगू में अंतर समझना जरूरी
मानसून में तेज बुखार होने पर केवल लक्षणों के आधार पर H1N1 या डेंगू की पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है। H1N1 में आमतौर पर तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे रेस्पिरेटरी लक्षण प्रमुख हो सकते हैं, जबकि डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और कुछ मामलों में पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।
इसलिए लगातार या तेज बुखार होने पर खुद से बीमारी का अनुमान लगाकर दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों ने फ्लू से बचाव के लिए खासतौर पर हाई-रिस्क लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स को सालाना फ्लू वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही है।
इसके अलावा खांसते या छींकते समय नाक और मुंह ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना और जरूरत पड़ने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
फ्लू जैसे वायरल संक्रमण में खुद से एंटीबायोटिक लेना भी उचित नहीं है। एंटीबायोटिक्स वायरस पर असर नहीं करतीं और अनावश्यक इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी समस्या बढ़ सकती है।
हल्के लक्षणों में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार बुखार कम करने वाली दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन कम होना, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या अचानक तबीयत बिगड़ने जैसे संकेत दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। H1N1, डेंगू या किसी अन्य बीमारी की पुष्टि और दवा का निर्णय डॉक्टर की जांच और सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।


