Crypto Investment: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर निवेशकों के बीच अभी भी काफी असमंजस और जोखिम की धारणा बनी हुई है। हालांकि, BitDelta India के CEO विकास एम. सचदेवा का मानना है कि क्रिप्टो आज भारत में लगभग उसी शुरुआती दौर में है, जिस दौर से म्यूचुअल फंड 1995-96 के आसपास गुजर रहे थे। उनका कहना है कि जिस तरह उस समय लोगों को म्यूचुअल फंड की अवधारणा समझाने और निवेश के प्रति भरोसा पैदा करने की जरूरत थी, उसी तरह क्रिप्टो के मामले में भी शिक्षा और जागरूकता महत्वपूर्ण है।
इकनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में सचदेवा ने अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि 1995-96 में जब उन्होंने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया था, तब इस निवेश माध्यम के बारे में आम लोगों की जानकारी काफी सीमित थी। निवेशकों को इसके फायदे, काम करने के तरीके और जोखिम समझाने में समय लगा। उनके मुताबिक, क्रिप्टो के साथ भी फिलहाल कुछ ऐसी ही स्थिति दिखाई देती है।
क्रिप्टो में निवेश से पहले शिक्षा जरूरी
विकास एम. सचदेवा के मुताबिक, क्रिप्टो को लेकर सिर्फ बाजार की तेजी या कीमतों की चर्चा करना पर्याप्त नहीं है। निवेशकों को इसकी तकनीक, इस्तेमाल, बाजार की प्रकृति और इससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह खुद भी क्रिप्टो को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं थे। हालांकि, समय के साथ जब उन्होंने इसके पूरे इकोसिस्टम को समझा तो उनकी सोच में बदलाव आया। उनका मानना है कि भारत में Virtual Digital Assets यानी VDA को लेकर जागरूकता अभी भी काफी कम है।
सचदेवा के अनुसार, भारत में VDA की जागरूकता 15 फीसदी से भी कम है। ऐसे में इस क्षेत्र के विकास के लिए सिर्फ मार्केटिंग या शोर से ज्यादा जरूरी निवेशकों को सही जानकारी देना है।
क्या भारत में क्रिप्टो पूरी तरह अनरेगुलेटेड है?
क्रिप्टो के नियमन को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भारत में यह पूरी तरह अनरेगुलेटेड एसेट है। सचदेवा का कहना है कि इसे पूरी तरह अनरेगुलेटेड कहना सही नहीं होगा।
मार्च 2023 में VDA सर्विस प्रोवाइडर्स को Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के दायरे में लाया गया था। इसके बाद इस क्षेत्र में Anti-Money Laundering (AML), Know Your Customer (KYC) और रिपोर्टिंग से जुड़ी आवश्यकताएं लागू हुईं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में क्रिप्टो के लिए शेयर बाजार की तरह कोई एकल मार्केट रेगुलेटर नहीं है। इसलिए क्रिप्टो को लेकर नियामकीय स्थिति को समझते समय निवेशकों को अलग-अलग नियमों और अनुपालनों की जानकारी रखना जरूरी है।
क्रिप्टो में कितना पैसा लगाना चाहिए?
क्रिप्टो में निवेश की सबसे अहम बात इसकी रकम तय करना है। सचदेवा ने निवेशकों को इस मामले में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उनके मुताबिक, क्रिप्टो एक हाई-रिस्क और वोलाटाइल एसेट क्लास है। इसकी कीमतों में कम समय में बड़ी तेजी या गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेशकों को शुरुआत में अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल छोटा हिस्सा ही क्रिप्टो में लगाने पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने निवेश की रकम को लेकर एक आसान सिद्धांत बताया। निवेशक को उतनी ही रकम लगानी चाहिए, जितनी पूरी तरह डूब जाने की स्थिति में भी उसकी आर्थिक स्थिति या नींद प्रभावित न हो।
यानी क्रिप्टो में निवेश के लिए ऐसा पैसा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जो रोजमर्रा के खर्च, इमरजेंसी फंड, जरूरी बचत या अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए रखा गया हो।
समझ बढ़े तो धीरे-धीरे बढ़ाएं एक्सपोजर
सचदेवा के मुताबिक, क्रिप्टो में निवेश करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में सीमित एक्सपोजर रखना चाहिए। जैसे-जैसे निवेशक इस एसेट क्लास, इसकी तकनीक और बाजार के जोखिमों को बेहतर तरीके से समझने लगे, उसी के अनुसार निवेश बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक को क्रिप्टो में निवेश करना ही चाहिए। बल्कि निवेश का फैसला व्यक्ति की जोखिम उठाने की क्षमता, वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और बाजार की समझ के आधार पर होना चाहिए।
क्रिप्टो को म्यूचुअल फंड से जोड़ने का मतलब क्या है?
सचदेवा द्वारा क्रिप्टो की तुलना 1995-96 के म्यूचुअल फंड दौर से करने का मुख्य संदर्भ इसकी शुरुआती स्वीकार्यता और जागरूकता से जुड़ा है। उस दौर में म्यूचुअल फंड को लेकर लोगों में पर्याप्त जानकारी नहीं थी और निवेशकों के बीच भरोसा बनाने में समय लगा।
आज क्रिप्टो के मामले में भी तकनीक और डिजिटल एसेट की अवधारणा आम निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत नई है। हालांकि, दोनों निवेश माध्यमों को जोखिम या नियमन के लिहाज से समान मानना सही नहीं होगा। क्रिप्टो की कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी अधिक हो सकता है और इसके जोखिमों को समझे बिना निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख?
क्रिप्टो में निवेश करने वाले नए निवेशकों के लिए सबसे अहम संदेश यही है कि सिर्फ सोशल मीडिया, दोस्तों या बाजार में चल रही चर्चा के आधार पर पैसा नहीं लगाना चाहिए। किसी भी क्रिप्टो एसेट को खरीदने से पहले उसके जोखिम और अपनी वित्तीय क्षमता को समझना जरूरी है।
निवेशक इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- क्रिप्टो में केवल सीमित रकम लगाएं।
- जरूरी खर्च या इमरजेंसी फंड का पैसा निवेश न करें।
- कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहें।
- निवेश से पहले VDA और संबंधित प्लेटफॉर्म की जानकारी हासिल करें।
- केवल तेजी देखकर निवेश करने से बचें।
- किसी भी एसेट में निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता समझें।
- क्रिप्टो को पूरे निवेश पोर्टफोलियो का विकल्प न मानें।
निष्कर्ष
विकास एम. सचदेवा की 1995-96 के म्यूचुअल फंड दौर से क्रिप्टो की तुलना मुख्य रूप से जागरूकता और स्वीकार्यता के संदर्भ में है। उनका मानना है कि भारत में क्रिप्टो को लेकर अभी शिक्षा और जागरूकता की काफी जरूरत है।
साथ ही, उन्होंने स्पष्ट रूप से क्रिप्टो को हाई-रिस्क और वोलाटाइल एसेट बताया है। इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी क्षमता से अधिक जोखिम न लें और शुरुआत में पोर्टफोलियो का बहुत छोटा हिस्सा ही क्रिप्टो में लगाने पर विचार करें। यह निवेश सलाह नहीं है; क्रिप्टो में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी है।


