Dubai Indian Companies: दुबई में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। जून 2026 के अंत तक दुबई चेंबर के सक्रिय सदस्यों के तौर पर पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 85,841 हो गई है। अकेले 2026 की पहली छमाही में 7,579 नई भारतीय कंपनियों ने दुबई चेंबर की सदस्यता ली। यह संख्या पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15 फीसदी अधिक है।
भारत और दुबई के बीच बढ़ते कारोबारी रिश्तों का असर दोनों देशों के व्यापार और निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में दोनों के बीच गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह सालाना आधार पर करीब 15 फीसदी की वृद्धि है।
दुबई में 85 हजार से ज्यादा भारतीय कंपनियां
दुबई चेंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता के अनुसार, भारतीय कारोबारी समुदाय की दुबई में मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है। जून 2026 तक कुल 85,841 भारतीय कंपनियां दुबई चेंबर के सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत थीं।
साल 2026 के पहले छह महीनों में ही 7,579 भारतीय कंपनियां चेंबर से जुड़ीं। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय कंपनियों के लिए दुबई सिर्फ एक व्यापारिक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विस्तार के लिए रणनीतिक केंद्र के तौर पर भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
दुबई की लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल भारतीय कंपनियों को मध्य पूर्व के साथ-साथ अफ्रीका और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करता है।
भारत-दुबई गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर
भारत और दुबई के बीच आर्थिक संबंधों में व्यापार सबसे अहम आधार बना हुआ है। वर्ष 2025 में दोनों के बीच गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। एक साल पहले की तुलना में इसमें लगभग 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
पिछले एक दशक में भी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 25.6 अरब डॉलर था, जो अब 60 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।
इस अवधि में द्विपक्षीय व्यापार में 136.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ते व्यापार के साथ भारत दुबई के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है और अब वह दुबई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बताया जा रहा है।
भारत से दुबई में 8.8 अरब डॉलर का निवेश
दुबई और भारत के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। भारतीय कंपनियों ने भी दुबई में बड़े पैमाने पर निवेश किया है।
2016 से 2025 के बीच दुबई ने भारत से करीब 8.8 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। इसमें वर्ष 2025 का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा, जब भारतीय कंपनियों की ओर से करीब 2.3 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया।
यह निवेश भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और दुबई को वैश्विक कारोबार के लिए आधार बनाने की बढ़ती रणनीति को दिखाता है।
दुबई की कंपनियों ने भारत में भी किया बड़ा निवेश
निवेश का प्रवाह सिर्फ भारत से दुबई की ओर नहीं है। दुबई की कंपनियों ने भी भारत में बड़ी रकम लगाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2025 के बीच दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं के जरिए करीब 9.3 अरब डॉलर का निवेश किया। इन परियोजनाओं से लगभग 55,274 रोजगार के अवसर पैदा हुए।
इससे साफ है कि भारत और दुबई के बीच कारोबारी रिश्ते दोतरफा निवेश और साझेदारी पर आधारित हैं।
AI और डिजिटल इकोनॉमी पर बढ़ रहा फोकस
भारत और दुबई के बीच आर्थिक सहयोग अब पारंपरिक व्यापारिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों पक्ष नई तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।
खास तौर पर एजेंटिक एआई, डिजिटल इकोनॉमी और तकनीकी नवाचार जैसे भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां भी इन क्षेत्रों में दुबई को अपने अंतरराष्ट्रीय संचालन और विस्तार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं।
दुबई चेंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता के मुताबिक, भारतीय कारोबारी समुदाय की बढ़ती मौजूदगी दुबई और यहां उपलब्ध भविष्य के कारोबारी अवसरों में उसके भरोसे को दर्शाती है।
क्यों भारतीय कंपनियों को पसंद आ रहा है दुबई?
भारतीय कंपनियों के लिए दुबई कई वजहों से आकर्षक कारोबारी केंद्र बन गया है। इनमें प्रमुख रूप से:
- मध्य पूर्व और अफ्रीकी बाजारों तक आसान पहुंच
- आधुनिक और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर
- मजबूत एयर और समुद्री कनेक्टिविटी
- प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल
- निवेशकों और ग्राहकों तक बेहतर पहुंच
- वैश्विक कारोबार के लिए रणनीतिक लोकेशन
- डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से विकसित होता इकोसिस्टम
इन सुविधाओं की वजह से भारतीय कंपनियां दुबई का इस्तेमाल सिर्फ स्थानीय बाजार के लिए नहीं, बल्कि दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए भी कर रही हैं।
CEPA से कारोबार को मिला बढ़ावा
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) भी कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
CEPA का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना और कारोबार के नए अवसर पैदा करना है। इससे दोनों देशों की कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करने और वैश्विक बाजारों में विस्तार करने का अवसर मिला है।
भारत-दुबई रिश्तों की बड़ी तस्वीर
भारतीय कंपनियों की संख्या का 85 हजार के पार पहुंचना, गैर-तेल व्यापार का 60.6 अरब डॉलर तक जाना और एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार में 136.2 फीसदी की वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत और दुबई के आर्थिक रिश्ते तेजी से गहरे हो रहे हैं।
अब इस साझेदारी का फोकस केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है। निवेश, डिजिटल इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार जैसे नए क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए आगे और बड़े अवसर पैदा कर सकता है।


