Copper Price: इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर की कीमतों में एक बार फिर दबाव देखने को मिला है। कॉपर वायदा $6.55 प्रति पाउंड से नीचे फिसल गया और भाव करीब दो हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया। कॉपर की कीमतों में यह कमजोरी ऐसे समय आई है, जब दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उपभोक्ताओं में शामिल चीन में ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी की रफ्तार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
चीन में कॉपर की मांग का अंदाजा लगाने के लिए यांगशान प्रीमियम (Yangshan Premium) को भी अहम संकेतक माना जाता है। हाल के आंकड़ों में यांगशान प्रीमियम घटकर करीब 96 डॉलर प्रति टन रह गया है। पिछले महीने यह लगभग 115 डॉलर प्रति टन था। यानी प्रीमियम में करीब 19 डॉलर प्रति टन की कमी आई है।
कॉपर बाजार के लिए यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ ऊंची कीमतें चीन की मांग पर दबाव डाल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ Codelco की ओर से उत्पादन लक्ष्य घटाने और अमेरिका में कॉपर टैरिफ को लेकर बनी चिंता सप्लाई और ट्रेड फ्लो को प्रभावित कर रही है।
कॉपर की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
कॉपर की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में चीन की कमजोर मांग को माना जा रहा है। कॉपर की कीमतें जब काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचती हैं तो इंडस्ट्रियल खरीदारों के लिए इसकी लागत बढ़ जाती है। ऐसे में खरीदार तत्काल खरीदारी करने के बजाय कीमतों में नरमी का इंतजार कर सकते हैं।
चीन में कॉपर का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पावर ग्रिड, कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई क्षेत्रों में होता है। इसलिए चीन की इंडस्ट्रियल गतिविधियों और कॉपर खरीदारी के आंकड़ों का ग्लोबल कॉपर मार्केट पर सीधा असर पड़ता है।
दिए गए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर वायदा $6.55 प्रति पाउंड के नीचे आ गया है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि हाल की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और मांग को लेकर चिंता बढ़ी है।
यांगशान प्रीमियम घटकर 96 डॉलर प्रति टन
कॉपर बाजार में चीन के यांगशान प्रीमियम पर निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर रहती है। हालिया आंकड़ों में यह प्रीमियम घटकर 96 डॉलर प्रति टन रह गया है, जबकि पिछले महीने यह करीब 115 डॉलर प्रति टन था।
यांगशान प्रीमियम में गिरावट को चीन में इंपोर्टेड कॉपर की मांग में कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, केवल इस एक इंडिकेटर के आधार पर पूरे कॉपर बाजार की दिशा तय नहीं की जा सकती। इसके साथ ग्लोबल सप्लाई, इंडस्ट्रियल डिमांड, डॉलर, ब्याज दरों और ट्रेड पॉलिसी जैसे कई दूसरे फैक्टर भी महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या है यांगशान प्रीमियम?
यांगशान प्रीमियम वह अतिरिक्त कीमत है, जो चीन में इंपोर्ट किए जाने वाले कॉपर के लिए LME यानी London Metal Exchange के बेस भाव के ऊपर चुकाई जाती है।
सरल भाषा में समझें तो LME पर कॉपर का जो भाव चल रहा है, उसके ऊपर चीन में कॉपर को पहुंचाने और खरीदने के लिए जो अतिरिक्त प्रीमियम दिया जाता है, उसे यांगशान प्रीमियम कहा जाता है।
यह प्रीमियम चीन में इंपोर्टेड कॉपर की मांग और बाजार की स्थिति को समझने के लिए एक उपयोगी संकेतक है।
यांगशान प्रीमियम बढ़े या घटे तो क्या मतलब?
यांगशान प्रीमियम में बदलाव को कॉपर की मांग के संदर्भ में देखा जाता है।
प्रीमियम बढ़ने का मतलब:
अगर यांगशान प्रीमियम बढ़ रहा है तो आम तौर पर इसका मतलब हो सकता है कि चीन में इंपोर्टेड कॉपर की मांग मजबूत है और खरीदार कॉपर हासिल करने के लिए अधिक प्रीमियम देने को तैयार हैं।
प्रीमियम घटने का मतलब:
अगर प्रीमियम घट रहा है तो यह संकेत दे सकता है कि खरीदारों की तत्काल मांग कमजोर है या वे ऊंची कीमतों पर कॉपर खरीदने से बच रहे हैं।
हालांकि, प्रीमियम में बदलाव के पीछे लॉजिस्टिक्स, इन्वेंटरी और आयात से जुड़ी परिस्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए इसे कॉपर डिमांड का अकेला पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।
यांगशान प्रीमियम का गणित ऐसे समझें
इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं।
मान लीजिए LME पर कॉपर का भाव $10,000 प्रति टन है और यांगशान प्रीमियम $96 प्रति टन है। ऐसे में चीन में इंपोर्टेड कॉपर की अनुमानित कीमत करीब:
$10,000 + $96 = $10,096 प्रति टन
हो सकती है।
यानी LME के भाव के मुकाबले चीन में खरीदार को करीब 96 डॉलर प्रति टन का अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ रहा है। अगर यह प्रीमियम घटता है तो इसका मतलब हो सकता है कि खरीदार पहले की तुलना में कम अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार हैं।
ऊंची कीमतों से चीन में मांग पर दबाव
कॉपर को अक्सर ग्लोबल इकोनॉमी का महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल मेटल माना जाता है। इसकी मांग इलेक्ट्रिक ग्रिड, इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी, कंस्ट्रक्शन, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों से आती है।
लेकिन जब कॉपर की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो डाउनस्ट्रीम कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ खरीदार अपनी खरीदारी टाल सकते हैं या कम इन्वेंटरी रखने की कोशिश कर सकते हैं।
चीन में यांगशान प्रीमियम का कमजोर होना इसी तरह की मांग संबंधी चिंता को दिखा रहा है। पिछले महीने के करीब 115 डॉलर प्रति टन से घटकर 96 डॉलर प्रति टन पर आना बताता है कि इंपोर्टेड कॉपर के लिए प्रीमियम भुगतान करने की इच्छा में कमी आई है।
Codelco का उत्पादन लक्ष्य घटाना क्यों महत्वपूर्ण?
कॉपर बाजार में दूसरी तरफ सप्लाई से जुड़ी खबर भी महत्वपूर्ण है। Codelco दुनिया की प्रमुख कॉपर उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी की ओर से उत्पादन लक्ष्य घटाने की खबर ग्लोबल सप्लाई के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अगर बड़े उत्पादकों की तरफ से उत्पादन कम होता है तो लंबे समय में बाजार में सप्लाई टाइट होने की संभावना बन सकती है। इससे कॉपर की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में कमजोर मांग और ऊंची कीमतों का दबाव इस सप्लाई फैक्टर के असर को सीमित कर सकता है।
यही वजह है कि कॉपर मार्केट में फिलहाल डिमांड और सप्लाई दोनों तरफ के संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।
US कॉपर टैरिफ की चिंता भी बरकरार
कॉपर बाजार में अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी भी एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है। US कॉपर टैरिफ को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। टैरिफ से पहले कॉपर के अमेरिका पहुंचने की कोशिशों के कारण अमेरिकी वेयरहाउस में मेटल की आवाजाही और स्टॉक पर भी असर पड़ सकता है।
अगर टैरिफ लागू होने से पहले कंपनियां अमेरिका में कॉपर पहुंचाने की कोशिश करती हैं तो कुछ समय के लिए अमेरिकी बाजार में इन्वेंटरी बढ़ सकती है। इससे ग्लोबल कॉपर मार्केट के ट्रेड फ्लो में बदलाव देखने को मिल सकता है।
एक हफ्ते में 2% फिसला इंटरनेशनल कॉपर
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर की कीमतों में पिछले एक हफ्ते में करीब 2% की गिरावट आई है।
हालांकि, बड़े टाइम फ्रेम में तस्वीर अभी भी पूरी तरह कमजोर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में कॉपर करीब 3% ऊपर रहा, जबकि जनवरी 2026 से अब तक करीब 15% की तेजी दर्ज की गई। वहीं एक साल की अवधि में कॉपर में करीब 46% की बढ़त बताई गई है।
इससे पता चलता है कि हाल की गिरावट के बावजूद कॉपर ने लंबी अवधि में मजबूत प्रदर्शन किया है।
MCX पर कॉपर का प्रदर्शन कैसा रहा?
घरेलू बाजार यानी MCX पर भी कॉपर की कीमतों में हालिया दबाव देखने को मिला है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, MCX कॉपर में पिछले एक हफ्ते में करीब 1% की गिरावट आई है।
वहीं एक महीने की अवधि में MCX कॉपर करीब 5% ऊपर रहा है। तीन महीने में इसमें करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि छह महीने में कॉपर करीब 13% चढ़ा है।
इस साल अब तक MCX कॉपर में करीब 8% की तेजी बताई गई है। यानी शॉर्ट टर्म में कमजोरी के बावजूद मीडियम और लॉन्ग टर्म में कॉपर का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
आगे कॉपर की कीमतों पर किन फैक्टर्स की रहेगी नजर?
आने वाले दिनों में कॉपर की दिशा तय करने में कई फैक्टर्स महत्वपूर्ण रहेंगे। सबसे पहले चीन की मांग और यांगशान प्रीमियम पर नजर रहेगी। अगर प्रीमियम में लगातार गिरावट जारी रहती है तो यह कॉपर की कीमतों के लिए दबाव का संकेत हो सकता है।
इसके अलावा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि, चीन की इंडस्ट्रियल डिमांड, अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी, Codelco समेत बड़े उत्पादकों का उत्पादन, LME इन्वेंटरी और डॉलर की चाल भी कॉपर के भाव को प्रभावित कर सकती है।
कॉपर का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी लंबी अवधि की मांग कॉपर के लिए एक सकारात्मक फैक्टर बनी हुई है। दूसरी तरफ, ऊंची कीमतों पर मांग में आने वाली कमी शॉर्ट टर्म में कीमतों पर दबाव बना सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कॉपर की हालिया गिरावट को केवल एक दिन या एक हफ्ते के भाव के आधार पर नहीं देखना चाहिए। मौजूदा तस्वीर में एक तरफ चीन की कमजोर मांग और घटता यांगशान प्रीमियम चिंता बढ़ा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां और इलेक्ट्रिफिकेशन से बढ़ती लंबी अवधि की मांग कॉपर के लिए सपोर्टिव फैक्टर हैं।
इसलिए कॉपर में आगे की दिशा के लिए चीन की मांग, यांगशान प्रीमियम, ग्लोबल सप्लाई और अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी सबसे महत्वपूर्ण संकेतक रह सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए कमोडिटी मार्केट से जुड़े आंकड़े और जानकारी उपलब्ध बाजार आंकड़ों पर आधारित हैं। कमोडिटी और फ्यूचर्स में निवेश जोखिम के अधीन है। कीमतों में तेजी या गिरावट कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों से हो सकती है। यह लेख किसी भी तरह की निवेश सलाह या खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार या कमोडिटी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।


