Indian Railways New PRS: रेलवे यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग का अनुभव जल्द ही पहले से ज्यादा आसान और तेज हो सकता है। 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा तत्काल और पीक बुकिंग के दौरान मिल सकता है।
भारतीय रेलवे में हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं और बड़ी संख्या में लोग अपने टिकट ऑनलाइन बुक करते हैं। खासकर त्योहार, गर्मी की छुट्टियों, वीकेंड और तत्काल टिकट की बुकिंग के समय एक साथ बहुत ज्यादा लोग IRCTC की वेबसाइट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचते हैं। ऐसे समय में यात्रियों को वेबसाइट धीमी होने, सर्वर पर ज्यादा लोड आने या बुकिंग प्रक्रिया में परेशानी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
अब रेलवे इसी चुनौती से निपटने के लिए अपने पुराने Passenger Reservation System (PRS) को बड़े स्तर पर अपग्रेड कर रहा है। रेलवे के मुताबिक नया PRS मौजूदा सिस्टम के मुकाबले कई गुना ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक मिनट में 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई थी। यानी नई व्यवस्था की क्षमता करीब पांच गुना तक बढ़ाई जा रही है।
40 साल पुराने सिस्टम की जगह आएगा अपग्रेडेड PRS

रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू हुआ था और पिछले करीब चार दशकों में इसमें समय-समय पर कई बदलाव किए गए। लेकिन ऑनलाइन टिकट बुकिंग और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बाद सिस्टम पर लोड भी लगातार बढ़ा है।
रेल मंत्रालय ने मई 2026 में बताया था कि 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड किया गया है और इसकी क्षमता को आधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है। रेलवे ने अगस्त 2026 से ट्रेनों को अपग्रेडेड PRS में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बताई थी।
इस बदलाव का उद्देश्य सिर्फ टिकट बुकिंग को तेज करना नहीं है। नया सिस्टम ज्यादा ट्रैफिक, ज्यादा पूछताछ और एक साथ बड़ी संख्या में यूजर्स की गतिविधियों को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग का बढ़ता दबाव
रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑनलाइन टिकटिंग में लगातार बढ़ती हिस्सेदारी है। रेलवे की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, जून 2025 से जून 2026 के बीच कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन, जबकि 7.18 करोड़ टिकट काउंटर के जरिए बुक हुए।
इसका मतलब है कि इस अवधि में करीब 89 फीसदी रिजर्व टिकट ऑनलाइन बुक किए गए। केवल करीब 11 फीसदी टिकट काउंटर से बुक हुए।
ऑनलाइन बुकिंग का इतना बड़ा हिस्सा यह बताता है कि रेलवे के डिजिटल बैकएंड सिस्टम पर कितना दबाव रहता है। जब किसी लोकप्रिय ट्रेन की एडवांस बुकिंग खुलती है या तत्काल टिकट की विंडो शुरू होती है, तब हजारों-लाखों यात्री एक ही समय पर सीट की उपलब्धता, किराया और बुकिंग की जानकारी लेने की कोशिश करते हैं।
यही वजह है कि रेलवे के लिए अधिक क्षमता वाला PRS जरूरी हो गया है।
एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग
नए PRS की सबसे बड़ी खासियत इसकी बढ़ी हुई बुकिंग क्षमता है। रेलवे ने जून 2025 में बताया था कि नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से अधिक रेल टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा। इसकी तुलना मौजूदा 32,000 टिकट प्रति मिनट की क्षमता से की गई थी।
इसका सीधा फायदा उन समयों में देखने को मिल सकता है जब बहुत बड़ी संख्या में यात्री एक साथ टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं।
उदाहरण के लिए, तत्काल टिकट खुलने के समय बड़ी संख्या में यूजर कुछ ही सेकंड में ट्रेन सर्च, सीट उपलब्धता, पैसेंजर डिटेल और पेमेंट प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते हैं। ज्यादा क्षमता वाला बैकएंड सिस्टम ऐसे पीक लोड को संभालने में पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में होगा।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति को हर बार टिकट निश्चित रूप से मिल जाएगा। टिकट की उपलब्धता ट्रेन, तारीख, कोटा और मांग पर निर्भर करेगी। नया सिस्टम मुख्य रूप से बुकिंग प्रक्रिया को ज्यादा क्षमता के साथ संभालने में मदद करेगा।
टिकट पूछताछ की क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी
नए PRS का फायदा सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे के अनुसार, सिस्टम की टिकट पूछताछ क्षमता भी करीब 10 गुना बढ़कर 40 लाख से अधिक प्रति मिनट हो सकती है। मौजूदा क्षमता करीब 4 लाख पूछताछ प्रति मिनट बताई गई थी।
इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में यात्री एक साथ ट्रेन, सीट उपलब्धता और अन्य रिजर्वेशन संबंधी जानकारी सर्च कर सकेंगे।
बुकिंग सिस्टम में अक्सर केवल टिकट खरीदना ही सबसे ज्यादा सर्वर लोड पैदा करने वाला काम नहीं होता। बड़ी संख्या में लोग पहले ट्रेन सर्च करते हैं, सीट उपलब्धता देखते हैं, अलग-अलग तारीखों पर किराया और सीट की स्थिति चेक करते हैं। ऐसे में enquiry capacity बढ़ना भी यात्रियों के अनुभव के लिए महत्वपूर्ण है।
IRCTC की नई बीटा वेबसाइट भी बदलाव का हिस्सा
इस अपग्रेड की दिशा में IRCTC ने जुलाई 2026 में अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन भी लॉन्च किया। 15 जुलाई 2026 को रात 9 बजे नई बीटा वेबसाइट यूजर्स के लिए उपलब्ध कराई गई थी, ताकि लोग नया इंटरफेस इस्तेमाल कर सकें और उसके फीचर्स पर फीडबैक दे सकें।
रेलवे के अनुसार, IRCTC की वेबसाइट वर्ष 2002 में शुरू हुई थी और वर्तमान में यह औसतन करीब 14.5 लाख टिकट प्रतिदिन संभालती है। नई बीटा वेबसाइट में यूजर इंटरफेस और बुकिंग अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
इसलिए यात्रियों को आने वाले समय में सिर्फ वेबसाइट का बदला हुआ डिजाइन ही नहीं, बल्कि टिकटिंग के पीछे काम करने वाले सिस्टम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
तत्काल टिकट बुकिंग में भी मिल सकता है फायदा
तत्काल टिकट की बुकिंग रेलवे की ऑनलाइन व्यवस्था के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण समय में से एक होती है। टिकट खुलते ही बहुत बड़ी संख्या में लोग सीमित सीटों के लिए एक साथ प्रयास करते हैं।
ऐसे में सिस्टम की क्षमता बढ़ने से बुकिंग प्रक्रिया के दौरान सर्वर पर अचानक आने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में मदद मिल सकती है।
रेलवे ने टिकटिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने के साथ तत्काल बुकिंग में ऑथेंटिकेशन और एंटी-फ्रॉड उपायों पर भी जोर दिया है। जुलाई 2026 में रेलवे ने बताया था कि पिछले छह महीनों में ई-टिकटिंग सिस्टम पर आने वाले अरबों अनुरोधों में बड़ी संख्या बॉट ट्रैफिक की थी। जून 2026 में 19.12 अरब अनुरोधों में 12.61 अरब अनुरोध बॉट से जुड़े पाए गए थे।
इससे पता चलता है कि रेलवे को केवल ज्यादा क्षमता वाले सर्वर की ही जरूरत नहीं है, बल्कि असली यात्रियों और ऑटोमेटेड/संदिग्ध ट्रैफिक के बीच अंतर करने के लिए मजबूत सिस्टम की भी जरूरत है।
PRS से कौन-कौन से काम होते हैं?
Passenger Reservation System रेलवे की रिजर्वेशन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए टिकट बुकिंग से लेकर कई दूसरी सेवाओं की जानकारी संभाली जाती है।
इसमें मुख्य रूप से:
- रिजर्व टिकट बुकिंग
- टिकट कैंसिलेशन
- सीट और बर्थ उपलब्धता
- वेटिंग लिस्ट
- RAC स्टेटस
- रिजर्वेशन चार्ट
- ट्रेन और टिकट से जुड़ी पूछताछ
जैसे काम शामिल हैं।
ऑनलाइन टिकटिंग के लिए IRCTC सहित रेलवे के अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म इसी रिजर्वेशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े होते हैं। इसलिए PRS की क्षमता बढ़ने का असर सिर्फ एक वेबसाइट पर नहीं, बल्कि पूरे रिजर्वेशन इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।
नया सिस्टम कितना आधुनिक है?
रेलवे ने नए PRS को ज्यादा agile, flexible और scalable बनाने पर जोर दिया है। इसका मकसद यह है कि भविष्य में टिकटों की मांग और डिजिटल ट्रैफिक बढ़ने पर सिस्टम को उसी हिसाब से विस्तार दिया जा सके।
रेलवे के आधिकारिक विवरण में नए सिस्टम में आधुनिक तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसमें यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और बहुभाषी इंटरफेस, सीट की पसंद बताने और fare calendar जैसी सुविधाओं को भी शामिल करने की योजना बताई गई थी।
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था सिर्फ ज्यादा तेज नहीं, बल्कि ज्यादा यूजर-फ्रेंडली भी बनाने की कोशिश की जा रही है।
RailOne से भी डिजिटल रेलवे को बढ़ावा
रेलवे ने डिजिटल सेवाओं को एक जगह लाने के लिए RailOne App भी लॉन्च किया है। इसे 1 जुलाई 2025 को शुरू किया गया था। ऐप के जरिए यात्री रिजर्व और अनरिजर्व टिकट बुकिंग के साथ ट्रेन इंक्वायरी, PNR इंक्वायरी और दूसरी यात्री सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
जुलाई 2026 तक रेलवे के अनुसार RailOne के 4.55 करोड़ डाउनलोड हो चुके थे और ऐप पर औसतन करीब 9.65 लाख टिकट बुकिंग प्रतिदिन हो रही थी।
ऐसे में जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, मजबूत बैकएंड रिजर्वेशन सिस्टम की जरूरत भी बढ़ती जाएगी।
यात्री को क्या फायदा होगा?
नए PRS का सबसे बड़ा फायदा उस समय मिल सकता है जब एक साथ बहुत ज्यादा लोग रेलवे की डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हों।
अगर सिस्टम बढ़े हुए ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभाल पाता है, तो यात्रियों को टिकट सर्च करने, सीट उपलब्धता देखने और बुकिंग प्रक्रिया पूरी करने में पहले की तुलना में बेहतर अनुभव मिल सकता है।
खास तौर पर तत्काल टिकट, त्योहारों की बुकिंग और लोकप्रिय ट्रेनों की एडवांस बुकिंग के समय इसका महत्व ज्यादा होगा।
हालांकि, यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि नया सिस्टम टिकट की उपलब्धता नहीं बढ़ाता। अगर किसी ट्रेन में सीटें सीमित हैं और मांग बहुत ज्यादा है, तो सीट मिलना फिर भी उपलब्धता पर निर्भर करेगा। सिस्टम अपग्रेड का मुख्य फायदा यह है कि ज्यादा यात्रियों के अनुरोधों को एक साथ संभालने की क्षमता बढ़ेगी।
रेलवे टिकटिंग का बदल रहा पूरा सिस्टम
भारतीय रेलवे धीरे-धीरे अपने टिकटिंग सिस्टम को पुराने ढांचे से आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर ले जा रहा है। 2002 में इंटरनेट टिकटिंग शुरू होने के बाद ऑनलाइन बुकिंग का विस्तार तेजी से हुआ और अब रिजर्व टिकटों का करीब 89 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन बुक हो रहा है।
अब अगला बड़ा कदम PRS का अपग्रेड है। एक तरफ नई IRCTC वेबसाइट यात्रियों के इंटरफेस और बुकिंग अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नया PRS बैकएंड क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
यानी आने वाले समय में रेलवे टिकट बुकिंग में बदलाव सिर्फ वेबसाइट के डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगा। बैकएंड सिस्टम, बुकिंग क्षमता, पूछताछ क्षमता, ऑथेंटिकेशन और डिजिटल सेवाओं—इन सभी स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, रेलवे का नया PRS उन यात्रियों के लिए अहम बदलाव साबित हो सकता है जो खासकर पीक टाइम या तत्काल टिकट के दौरान बुकिंग करते हैं। अगर सिस्टम अपनी प्रस्तावित क्षमता के मुताबिक काम करता है, तो एक मिनट में 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग संभालने की क्षमता रेलवे की डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था को पहले के मुकाबले काफी मजबूत बना सकती है।


