मंगलुरु |
तटीय कर्नाटक के औद्योगिक विकास को एक बड़ा संबल मिला है। Chowgule Shipyard में शिपबिल्डिंग गतिविधियों के पुनरुद्धार (revival) से करीब 2,000 नौकरियां पैदा हुई हैं, जिससे Mangaluru क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
Brijesh Chowta ने इस विकास को क्षेत्र के लिए “बड़ा रोजगार अवसर” बताते हुए कहा कि शिपबिल्डिंग सेक्टर आने वाले समय में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकता है।
बंद पड़े शिपयार्ड से आधुनिक सुविधा तक का सफर

कभी बंद पड़ी इस शिपबिल्डिंग यूनिट को अब एक आधुनिक और सक्रिय शिपयार्ड में बदल दिया गया है।
Chowgule Shipyard ने न केवल इस सुविधा को पुनर्जीवित किया है, बल्कि इसे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप अपग्रेड भी किया है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत तब मिला जब शिपयार्ड ने अपना पहला एक्सपोर्ट वेसल Frisian Future नीदरलैंड्स को भेजा।
‘Frisian Future’: नई शुरुआत का प्रतीक
8,500 DWT क्षमता वाला यह जहाज सिर्फ एक एक्सपोर्ट नहीं, बल्कि:
- शिपयार्ड की वापसी का संकेत
- भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का प्रतीक
- ग्लोबल शिपबिल्डिंग मार्केट में एंट्री
भी है।
Brijesh Chowta ने इसे “सिर्फ शुरुआत” बताते हुए कहा कि आने वाले समय में और भी कई जहाज बनाए जाएंगे।
रोजगार और लोकल इकॉनमी पर असर
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के रूप में सामने आया है।
प्रमुख असर:
- 2,000 से ज्यादा नौकरियां
- स्थानीय स्किल्ड वर्कफोर्स को अवसर
- सप्लाई चेन और छोटे उद्योगों को बढ़ावा
शिपबिल्डिंग जैसे सेक्टर में एक जॉब कई अन्य अप्रत्यक्ष नौकरियों को भी जन्म देता है—जैसे लॉजिस्टिक्स, सप्लाई, इंजीनियरिंग और सर्विस सेक्टर।
केंद्र सरकार की ‘Maritime Vision 2047’ से जुड़ाव
यह विकास सीधे तौर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi की ‘Maritime Vision 2047’ से जुड़ा हुआ है।
इस विज़न का उद्देश्य है:
- भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाना
- पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
- समुद्री व्यापार को बढ़ावा देना
Brijesh Chowta के अनुसार, मंगलुरु इस विज़न का एक अहम हिस्सा बन सकता है।
मंगलुरु: वेस्ट कोस्ट का उभरता शिपबिल्डिंग हब
Mangaluru पहले से ही एक महत्वपूर्ण पोर्ट सिटी है।
अब शिपबिल्डिंग के विकास के साथ यह:
- वेस्ट कोस्ट का प्रमुख इंडस्ट्रियल हब
- शिपबिल्डिंग क्लस्टर
- मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भविष्य की योजनाएं: लग्जरी जहाज और यॉट्स
New Mangalore Port Authority एक मास्टर प्लान तैयार कर रही है, जिसमें शिपबिल्डिंग को प्रमुख गतिविधि के रूप में शामिल करने की बात चल रही है।
भविष्य में संभावनाएं:
- लग्जरी क्रूज शिप
- यॉट निर्माण
- एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड जहाज
विदेशी निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार अब इस सेक्टर में विदेशी निवेश (FDI) को भी प्रोत्साहित कर रही है।
हाल ही में South Korea के साथ हुई चर्चाओं में भी शिपबिल्डिंग सेक्टर में निवेश के अवसरों पर जोर दिया गया।
यह कदम:
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
- स्किल डेवलपमेंट
- ग्लोबल मार्केट एक्सेस
को मजबूत कर सकता है।
क्यों अहम है यह विकास?
भारत लंबे समय से शिपबिल्डिंग में अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था।
लेकिन अब:
- इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
- पॉलिसी सपोर्ट
- ग्लोबल डिमांड
के चलते यह सेक्टर तेजी से उभर रहा है।
Chowgule Shipyard का revival इसी बदलाव का एक मजबूत उदाहरण है।
निष्कर्ष
Chowgule Shipyard की वापसी केवल एक इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास की नई शुरुआत है।
Mangaluru अब सिर्फ एक पोर्ट सिटी नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के शिपबिल्डिंग हब के रूप में उभर सकता है।
अगर इसी तरह निवेश और नीतिगत समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।
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