नई दिल्ली। चेन्नई के जल और सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने चेन्नई क्लाइमेट-रेजिलिएंट वॉटर सिक्योरिटी एंड सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए 230 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹2,200 करोड़ के लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस परियोजना का उद्देश्य शहर में पानी की सप्लाई और सैनिटेशन सुविधाओं का विस्तार और आधुनिकीकरण करना है।
चेन्नई के पानी और सीवेज सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव
इस परियोजना के जरिए चेन्नई में सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ सीवेज और सैनिटेशन सिस्टम को भी बेहतर बनाया जाएगा। परियोजना को इस तरह तैयार किया गया है कि चेन्नई जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके।
इसके अलावा, आधुनिक जल प्रबंधन व्यवस्था से लोगों की सेहत और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है। शहर में पानी से जुड़ी सेवाओं को अधिक कुशल और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।
170 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन बिछेगी
परियोजना के तहत चेन्नई में 170 किलोमीटर से अधिक पानी की सप्लाई और सीवर पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही 7 वॉटर पंपिंग स्टेशन और 38 सीवर पंपिंग स्टेशन को अपग्रेड किया जाएगा।
नई और अपग्रेड की गई सुविधाओं से पानी की सप्लाई और सीवेज प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों में जल सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
चेन्नई में लागू होगा खास रिंग-मेन सिस्टम
इस परियोजना की सबसे खास विशेषताओं में से एक कॉम्प्रिहेन्सिव रिंग-मेन सॉल्यूशन है। यह एक क्लोज्ड-लूप प्लंबिंग सिस्टम है, जिसे पानी का दबाव संतुलित रखने और अलग-अलग सर्विस एरिया तक पानी को कुशल तरीके से पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
सरकार के अनुसार, चेन्नई इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला भारत का पहला शहर बनेगा। इस सिस्टम से किसी एक हिस्से में समस्या आने पर पूरे नेटवर्क पर उसका असर कम करने और पानी की सप्लाई को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल टेक्नोलॉजी से होगी पानी की निगरानी
परियोजना में केवल पाइपलाइन और पंपिंग स्टेशन का निर्माण या अपग्रेड ही नहीं किया जाएगा, बल्कि जल और सीवेज सेवाओं को डिजिटल तकनीक से भी मजबूत किया जाएगा। रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित फैसलों का इस्तेमाल कर पानी और सैनिटेशन सेवाओं के संचालन को बेहतर बनाया जाएगा।
इससे अधिकारियों को जल आपूर्ति और सीवेज नेटवर्क की स्थिति पर नजर रखने तथा किसी समस्या की पहचान होने पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
सीवर निरीक्षण में भी इस्तेमाल होगी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी
सीवर नेटवर्क में रुकावट का तेजी से पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका एक महत्वपूर्ण फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को खतरनाक मैनुअल सीवर निरीक्षण के लिए कम भेजना पड़ेगा।
इससे सीवर कर्मचारियों की सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिलेगी। साथ ही, ग्राहकों की शिकायतों और जरूरतों पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी मजबूत होगी।
जलवायु परिवर्तन से निपटने में मिलेगी मदद
चेन्नई जैसे बड़े शहर के लिए जल सुरक्षा और सीवेज प्रबंधन भविष्य की महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की उपलब्धता, शहरी बाढ़ और सैनिटेशन जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह परियोजना शहर की जल व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर, ₹2,200 करोड़ की ADB वित्तपोषित परियोजना से चेन्नई के जल और सीवेज नेटवर्क को आधुनिक बनाने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और नागरिकों को अधिक भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।


