नई दिल्ली: अगर किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में “100%” लिखा हो तो आम ग्राहक स्वाभाविक रूप से यही मानता है कि उत्पाद पूरी तरह उसी सामग्री से बना है। लेकिन अब ऐसे दावों पर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने सख्त रुख अपनाया है। अथॉरिटी ने भ्रामक विज्ञापन और गलत दावों के मामले में दो बड़ी खाद्य कंपनियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह कार्रवाई स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड और मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड (English Oven ब्रेड निर्माता) के खिलाफ की गई है। CCPA ने पाया कि दोनों कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में “100%” शब्द का ऐसा इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक संरचना और गुणवत्ता के बारे में गलत संदेश मिल रहा था।
तुरंत हटाने होंगे भ्रामक दावे
CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अगुवाई वाली अथॉरिटी ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी पैकेजिंग, वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों से ऐसे दावों को तुरंत हटाएं।
यह कार्रवाई Consumer Protection Act, 2019 और Guidelines for Prevention of Misleading Advertisements and Endorsements, 2022 के तहत की गई है। अथॉरिटी का कहना है कि किसी भी विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया दावा उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं करना चाहिए।
स्टोरिया के ‘100% नारियल पानी’ पर उठे सवाल
CCPA ने स्टोरिया फूड्स के विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। कंपनी अपने उत्पादों को “100% Tender Coconut Water” और “100% Fruit Juice” जैसे दावों के साथ बेच रही थी।
ये उत्पाद कंपनी की वेबसाइट के अलावा Amazon, Flipkart, BigBasket, Blinkit, JioMart और Zepto जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध थे।
जांच के दौरान पता चला कि कथित “100% नारियल पानी” वास्तव में पानी और केवल 9.6% नारियल पानी कंसंट्रेट से तैयार किया गया था। उत्पाद को दोबारा तैयार (Reconstituted) करके नारियल पानी जैसा बनाया गया था। हालांकि यह जानकारी पैकेट पर बहुत छोटे अक्षरों में लिखी गई थी, जबकि “100%” का दावा प्रमुखता से दिखाया गया था।
इतना ही नहीं, उत्पाद में INS 202 नामक प्रिजर्वेटिव भी मौजूद था। CCPA ने कहा कि किसी प्रिजर्वेटिव वाले उत्पाद को “100% नेचुरल” बताना उपभोक्ताओं को भ्रमित करने जैसा है।
English Oven ब्रेड के विज्ञापन भी जांच के घेरे में
CCPA ने English Oven ब्रेड के विज्ञापनों और पैकेजिंग की भी जांच की। कंपनी “100% Atta Bread”, “100% Whole Wheat Bread” और “100% Whole Wheat Atta” जैसे दावों का इस्तेमाल कर रही थी।
जांच में सामने आया कि इन विज्ञापनों को 23 अप्रैल 2026 तक 50 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था, जिससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक यह संदेश पहुंचा।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके ब्रेड उत्पाद में लगभग 87% होल व्हीट आटा था। CCPA ने कहा कि जब उत्पाद पूरी तरह होल व्हीट आटे से बना ही नहीं है तो “100% Whole Wheat Bread” का दावा कैसे किया जा सकता है।
‘जीरो मैदा’ और ‘100% आटा’ का कॉम्बिनेशन भी सवालों में
अथॉरिटी ने पैकेजिंग पर एक साथ “100% आटा” और “Zero Maida” जैसे दावों पर भी आपत्ति जताई। CCPA का कहना है कि इस तरह की भाषा उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि उत्पाद पूरी तरह गेहूं के आटे से बना है, जबकि वास्तविक संरचना अलग हो सकती है।
मिसेज बेक्टर्स ने सुनवाई में यह दलील दी कि “100% आटा” का मतलब केवल यह था कि इस्तेमाल किया गया अनाज गेहूं था, न कि उत्पाद पूरी तरह आटे से बना है। लेकिन CCPA ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
CCPA ने क्यों खारिज की कंपनियों की दलील?
अथॉरिटी ने स्पष्ट कहा कि विज्ञापन को किसी तकनीकी विशेषज्ञ की नजर से नहीं, बल्कि एक सामान्य और समझदार उपभोक्ता के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
यदि किसी विज्ञापन से ग्राहक के मन में उत्पाद को लेकर गलत धारणा बनती है, तो बाद में दी गई तकनीकी व्याख्याएं या कंपनियों का इरादा महत्व नहीं रखता। उपभोक्ता पर पड़ने वाला वास्तविक प्रभाव ही सबसे महत्वपूर्ण है।
CCPA ने कहा कि खाद्य उत्पादों से जुड़े गुणवत्ता, पोषण, स्वास्थ्य और सामग्री संबंधी दावे पूरी तरह सत्य, प्रमाणित और स्पष्ट होने चाहिए। यदि कोई दावा उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है तो उसे भ्रामक विज्ञापन माना जाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
यह कार्रवाई उन कंपनियों के लिए बड़ा संदेश है जो अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए “100%”, “नेचुरल”, “प्योर” या “हेल्दी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। CCPA ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
उपभोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे केवल बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करने के बजाय उत्पाद की सामग्री सूची (Ingredients List) और पोषण संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ें।


