Mutual Fund SIP: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सही स्कीम का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर SIP के जरिए लंबे समय तक निवेश करने वालों के लिए फंड का पिछला प्रदर्शन, जोखिम और कैटेगरी जैसे कई फैक्टर्स मायने रखते हैं। बीते पांच साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने SIP निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।
एक एनालिसिस के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में SIP के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी से जुड़े हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप और 5 मिडकैप स्कीमें शामिल हैं। वहीं, SBI Children Fund इस लिस्ट में एकमात्र अपवाद है।
नोट: उपलब्ध जानकारी में टॉप-10 फंडों के नाम और उनके सटीक SIP रिटर्न प्रतिशत उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए नीचे केवल दी गई कैटेगरी और प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी दी गई है।
बीते 5 साल में स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों का जलवा

पिछले पांच साल की अवधि में स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंडों का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। इन कैटेगरी के कई फंडों ने SIP निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न भी दिया है।
टॉप-10 फंडों में 4 स्मॉलकैप और 5 मिडकैप स्कीमें शामिल होना इस बात का संकेत है कि इस अवधि में ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिला। इस दौरान छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला, जिसका फायदा इन कैटेगरी के म्यूचुअल फंडों को भी मिला।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड हमेशा लार्जकैप फंडों से बेहतर रिटर्न देंगे। इन कैटेगरी में जोखिम और उतार-चढ़ाव भी अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
एक्टिव लार्जकैप फंडों का प्रदर्शन रहा पीछे
SIP निवेशकों को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले टॉप-10 फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच वर्षों में लार्जकैप कैटेगरी में सबसे बेहतर प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा।
इस फंड का सालाना SIP रिटर्न 14.27 फीसदी रहा। यह 64 लार्जकैप फंडों की कैटेगरी में 10वें स्थान पर रहा। खास बात यह है कि लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 स्थानों पर इंडेक्स फंड और ETF का दबदबा रहा।
इससे संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इंडेक्स फंड और ETF बाजार के प्रमुख इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और आमतौर पर इनका उद्देश्य इंडेक्स के प्रदर्शन के करीब रहना होता है।
ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा उतार-चढ़ाव भी
स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने पिछले पांच वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन इन दोनों कैटेगरी में जोखिम और उतार-चढ़ाव भी ज्यादा देखने को मिलता है।
इन फंडों का बेहतर प्रदर्शन अनुकूल बाजार परिस्थितियों में देखने को मिला है। ऐसे में यह जरूरी नहीं है कि अगले पांच वर्षों में भी यही फंड या यही कैटेगरी इसी तरह का रिटर्न दे।
म्यूचुअल फंड में पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। इसलिए केवल पिछले पांच साल के रिटर्न को देखकर किसी स्कीम में निवेश करना उचित नहीं है।
निवेश से पहले अपनी रिस्क क्षमता समझें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी म्यूचुअल फंड में निवेश का फैसला सिर्फ उसके पिछले रिटर्न के आधार पर नहीं लेना चाहिए। निवेशक को सबसे पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य को समझना चाहिए।
अगर किसी निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता कम है, तो केवल ज्यादा रिटर्न के लालच में स्मॉलकैप या मिडकैप फंड में निवेश करना उसके लिए सही रणनीति नहीं हो सकती। वहीं, लंबी अवधि और ज्यादा जोखिम सहने की क्षमता रखने वाले निवेशक अपने पोर्टफोलियो में इन कैटेगरी को अपनी जरूरत के अनुसार शामिल कर सकते हैं।
लगातार प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण
किसी फंड ने एक या दो साल में कितना शानदार रिटर्न दिया, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना है कि उसने अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन किया है।
निवेशकों को फंड का लंबी अवधि का प्रदर्शन, बेंचमार्क के मुकाबले रिटर्न, जोखिम, फंड मैनेजर की रणनीति और पोर्टफोलियो की गुणवत्ता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष: बीते पांच वर्षों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने SIP निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा जोखिम भी जुड़ा है। इसलिए किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से फैसला लेना जरूरी है।


