Highlights
- केंद्र सरकार ने BHAVYA योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये का बड़ा ऐलान किया
- पहले चरण में 50 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे
- राज्यों को आवेदन के लिए 4 महीने का समय दिया गया
- 100 से 1000 एकड़ तक बनेंगे प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क
- MSME, स्टार्टअप और बड़े निवेशकों को मिलेगा फायदा
नई दिल्ली। भारत में विनिर्माण क्षेत्र को नई रफ्तार देने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। सरकार ने “भारत औद्योगिक विकास योजना” यानी BHAVYA के तहत देशभर में विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आवेदन मांगे हैं।
इस योजना के पहले चरण में 50 औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे, जबकि अगले चरण में 50 और पार्क विकसित होंगे। इस पूरी परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है। सरकार का मानना है कि इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, रोजगार पैदा होंगे और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी।
क्या है BHAVYA योजना?
BHAVYA यानी “भारत औद्योगिक विकास योजना” केंद्र सरकार की नई औद्योगिक नीति का हिस्सा है। इसका मकसद देशभर में आधुनिक, प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करना है ताकि उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और लॉजिस्टिक्स जैसी बुनियादी सुविधाएं एक ही जगह पर मिल सकें।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 मार्च 2026 को इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत कुल 100 औद्योगिक पार्क बनाए जाने हैं। पहले चरण में 50 पार्कों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि यह योजना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
कितने बड़े होंगे इंडस्ट्रियल पार्क?

सरकार के मुताबिक इन पार्कों का आकार 100 एकड़ से लेकर 1,000 एकड़ तक हो सकता है। हालांकि पहाड़ी और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों के लिए 25 एकड़ भूमि पर भी पार्क को मंजूरी दी जा सकती है।
इन पार्कों को “प्लग-एंड-प्ले” मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि उद्योगों को वहां पहुंचते ही जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार मिलेगा और उन्हें लंबे समय तक अनुमति या निर्माण प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
राज्यों को कैसे मिलेगा फायदा?
BHAVYA योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को बुनियादी ढांचा विकास के लिए प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। वहीं यदि कोई राज्य निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में प्रस्ताव लाता है, तो उसे प्रति एकड़ 50 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
इस योजना के लिए राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा भी होगी। चयन “चुनौती विधि” यानी Challenge Method के जरिए किया जाएगा। जो राज्य निवेशकों के लिए बेहतर सुविधाएं और तेज मंजूरी प्रक्रिया उपलब्ध कराएंगे, उन्हें प्राथमिकता मिल सकती है। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्य पहले ही इस योजना में गहरी रुचि दिखा चुके हैं।
क्या होंगे राज्यों के लिए जरूरी नियम?
इस योजना में भाग लेने के लिए राज्यों को कुछ अहम शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें शामिल हैं विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) की स्थापना, योजना प्राधिकरण को अधिसूचित करना, Single Window Clearance System तैयार करना, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना. सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों के लिए मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी और Ease of Doing Business में सुधार आएगा।
MSME और स्टार्टअप्स को कैसे होगा फायदा?
BHAVYA योजना का सबसे बड़ा लाभ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिल सकता है। भारत में कई छोटे उद्योग जमीन, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझते हैं। नए औद्योगिक पार्क उन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्पादन बढ़ाने का मौका देंगे।
इसके अलावा स्टार्टअप्स को इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम मिलेगा, सप्लाई चेन लागत कम होगी, एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ सकती है, विदेशी निवेश आकर्षित होगा, लाखों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सही तरीके से लागू हुई तो भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
चीन प्लस वन रणनीति से भी जुड़ा है मामला
वैश्विक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों से “China Plus One” रणनीति अपना रही हैं। यानी वे चीन के अलावा दूसरे देशों में भी उत्पादन क्षमता विकसित करना चाहती हैं। भारत इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
BHAVYA योजना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार चाहती है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, केमिकल और डिफेंस जैसे सेक्टर्स में बड़े निवेश आएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारत तेजी से आधुनिक औद्योगिक पार्क तैयार कर पाता है, तो वह वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे सकता है।
कितने समय में तैयार होंगे पार्क?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई है कि पहले चरण के 50 औद्योगिक पार्क अगले तीन वर्षों में चालू हो सकते हैं। इसके बाद दूसरे चरण के पार्कों पर काम शुरू होगा।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ जमीन विकसित करना नहीं, बल्कि ऐसे औद्योगिक क्लस्टर तैयार करना है जहां उद्योग, सप्लायर और सेवा प्रदाता एक साथ काम कर सकें।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
यह योजना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार में तेजी आ सकती है, निर्यात बढ़ सकता है, राज्यों को राजस्व मिलेगा, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विकास होगा, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को फायदा होगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल बना रहा, तो BHAVYA योजना भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष
33,660 करोड़ रुपये की BHAVYA योजना सिर्फ औद्योगिक पार्क बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक नीति में बड़े बदलाव का संकेत भी है। सरकार अब ऐसे इकोसिस्टम पर जोर दे रही है जहां उद्योगों को तेज मंजूरी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर सप्लाई नेटवर्क एक साथ मिल सके।
अगर योजना समय पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत के कई राज्य बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। इससे रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
Also Read:


