HighLights
- केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अगोडा समेत कई टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स की जांच के आदेश दिए
- बीजेपी नेता तेजिंदर बग्गा की शिकायत के बाद मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ
- ₹6335 की टिकट पर ₹4764 काटे जाने से उठा विवाद
- CCPA अब जांच करेगी कि क्या ग्राहकों से छिपाकर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा था
- सरकार ने कहा- उपभोक्ताओं के साथ अन्याय हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई
नई दिल्ली। ऑनलाइन फ्लाइट टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों से मनमानी फीस वसूलने के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म Agoda समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई उस समय हुई जब बीजेपी नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी फ्लाइट टिकट कैंसिलेशन से जुड़ा मामला साझा किया।
मामले ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तूल पकड़ लिया और अब केंद्र सरकार ने इसे उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए जांच शुरू कर दी है। सरकार यह पता लगाएगी कि कहीं ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों से एयरलाइंस द्वारा तय फीस से कहीं ज्यादा रकम तो नहीं वसूल रहे।
I have directed the Department of Consumer Affairs and CCPA to investigate whether online ticket booking platforms are imposing excessive cancellation charges on consumers, beyond what is charged by airlines or disclosed at the time of booking. Have directed them to check other… https://t.co/Ctufn1oorD
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) May 23, 2026 कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
पूरा मामला 23 मई को सामने आया। बीजेपी नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने दावा किया कि उन्होंने Agoda प्लेटफॉर्म के जरिए Akasa Air की दिल्ली से मुंबई की फ्लाइट टिकट बुक की थी। हालांकि टिकट बुकिंग के दौरान उनसे गलती से मुंबई की बजाय नवी मुंबई का विकल्प चुन लिया गया।
जब उन्होंने टिकट कैंसिल करने की कोशिश की तो उन्हें बड़ा झटका लगा। Agoda की ओर से उन्हें बताया गया कि टिकट कैंसिल करने पर ₹4764 बतौर कैंसिलेशन फीस काटे जाएंगे और उन्हें केवल ₹1571 ही वापस मिलेंगे। यानी कुल टिकट राशि ₹6335 में से लगभग 75 प्रतिशत रकम काटी जा रही थी।
बग्गा ने दावा किया कि यह कटौती सामान्य कैंसिलेशन फीस से कई गुना ज्यादा थी और यह ग्राहकों के साथ अन्याय जैसा है।
एयरलाइन की वेबसाइट पर कुछ और ही निकला
मामला तब और गंभीर हो गया जब तेजिंदर बग्गा ने सीधे Akasa Air की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिफंड पॉलिसी चेक की। वहां उन्हें पता चला कि एयरलाइन की ओर से कैंसिलेशन फीस सिर्फ ₹299 बताई गई थी।
इतना ही नहीं, एयरलाइन के नियमों के हिसाब से उन्हें लगभग ₹6076 वापस मिलने चाहिए थे। यानी Agoda प्लेटफॉर्म पर दिखाई जा रही कटौती एयरलाइन की वास्तविक फीस से करीब 15 गुना ज्यादा थी।
इसके बाद बग्गा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अगर एयरलाइन ₹299 काट रही है तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ₹4764 क्यों वसूल रहा है? उन्होंने इसे “अनैतिक” और “लूट” जैसा व्यवहार बताया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
तेजिंदर बग्गा का पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। कई अन्य यूजर्स ने भी ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर छिपे शुल्क, भारी कैंसिलेशन फीस और रिफंड में कटौती को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार टिकट बुकिंग के दौरान ग्राहकों को पूरी फीस स्ट्रक्चर साफ तौर पर नहीं बताया जाता। बाद में कैंसिलेशन के समय भारी रकम काट ली जाती है। इससे ग्राहकों में नाराजगी बढ़ रही है।
मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लिया तुरंत संज्ञान
मामला बढ़ता देख केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने तुरंत उपभोक्ता मामलों के विभाग और Central Consumer Protection Authority यानी CCPA को जांच के आदेश दिए।
मंत्री ने कहा कि जांच सिर्फ Agoda तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि देश के अन्य ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स की भी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि कहीं ग्राहक से एयरलाइन की तय सीमा से ज्यादा शुल्क तो नहीं लिया जा रहा या फिर फीस की जानकारी छिपाई तो नहीं जा रही।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर कंपनियां नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
क्या है CCPA और क्या कर सकती है कार्रवाई?
CCPA यानी Central Consumer Protection Authority उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए बनाई गई संस्था है। अगर जांच में यह साबित होता है कि कंपनियों ने ग्राहकों से गलत तरीके से पैसे वसूले या जानकारी छिपाई, तो इसे “अनुचित व्यापार व्यवहार” माना जा सकता है।
ऐसी स्थिति में CCPA कंपनियों पर जुर्माना लगाने, गलत प्रैक्टिस बंद करवाने और सामूहिक कानूनी कार्रवाई यानी Class Action जैसे कदम उठा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मामला बड़ा बनता है तो ऑनलाइन ट्रैवल इंडस्ट्री के लिए नए नियम भी लागू किए जा सकते हैं।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई उपभोक्ता Hidden Charges, Convenience Fee, Cancellation Fee, Dynamic Pricing, Refund Delay जैसी समस्याओं की शिकायत कर चुके हैं।
कई बार ग्राहक कम कीमत देखकर टिकट बुक करते हैं लेकिन अंतिम भुगतान के समय टैक्स, प्लेटफॉर्म फीस और अन्य शुल्क जोड़ दिए जाते हैं। वहीं कैंसिलेशन के समय अलग-अलग नियमों का हवाला देकर बड़ी कटौती कर ली जाती है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
कंज्यूमर राइट्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को फीस स्ट्रक्चर पूरी तरह पारदर्शी रखना चाहिए। ग्राहक को टिकट बुक करने से पहले यह साफ पता होना चाहिए कि एयरलाइन फीस कितनी है, प्लेटफॉर्म चार्ज कितना है, कैंसिलेशन पर कितना पैसा कटेगा, रिफंड कितने समय में मिलेगा
अगर यह जानकारी स्पष्ट नहीं दी जाती तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
Agoda ने क्या सफाई दी?
मामला वायरल होने के बाद Agoda ने तेजिंदर बग्गा के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी ने कहा कि उन्हें हुई असुविधा के लिए खेद है और मामले की जांच के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है।
कंपनी ने X पर जवाब देते हुए कहा:
“आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है। कृपया अपना DM देखें, ताकि हम आपकी बुकिंग की जांच कर सकें।”
हालांकि कंपनी ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि इतनी बड़ी कटौती क्यों दिखाई गई थी।
ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला सिर्फ एक टिकट या एक ग्राहक तक सीमित नहीं है। भारत में हर दिन लाखों लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए फ्लाइट, होटल और ट्रेन टिकट बुक करते हैं। अगर कंपनियां छिपे हुए शुल्क या गलत फीस स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं, तो इससे करोड़ों उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार की इस कार्रवाई से आने वाले समय में ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर में ज्यादा पारदर्शिता देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
Agoda विवाद ने एक बार फिर ऑनलाइन टिकट बुकिंग इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साधारण टिकट कैंसिलेशन से शुरू हुआ मामला अब उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तक पहुंच गया है।
अगर जांच में कंपनियां दोषी पाई जाती हैं, तो आने वाले समय में ऑनलाइन टिकट बुकिंग के नियम और सख्त हो सकते हैं। वहीं ग्राहकों को भी टिकट बुक करते समय कैंसिलेशन पॉलिसी और अतिरिक्त शुल्क को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जा रही है।
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