पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने अपनी जनता को बड़ी राहत दी है। लगातार दूसरे हफ्ते वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की गई है। नई कीमतें 23 मई से लागू हो चुकी हैं। ऐसे समय में जब भारत समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है, पाकिस्तान का यह फैसला आम लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही महीने पहले पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। सरकार ने मार्च और अप्रैल के दौरान कई बार बड़ी बढ़ोतरी की थी, जिससे वहां महंगाई और ट्रांसपोर्ट लागत तेजी से बढ़ गई थी। अब लगातार दो हफ्तों से कीमतों में कटौती होने से वहां की जनता को थोड़ी राहत महसूस हो रही है।
Highlights
- पाकिस्तान में पेट्रोल 6 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा सस्ता हुआ
- डीजल की कीमत में 6.80 रुपये प्रति लीटर की कटौती
- लगातार दूसरे हफ्ते सरकार ने घटाए ईंधन के दाम
- भारत में पिछले दिनों पेट्रोल-डीजल और CNG महंगे हुए
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी
पाकिस्तान में अब कितने हुए पेट्रोल-डीजल के दाम?
पाकिस्तान सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत में 6 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इसके बाद वहां पेट्रोल की नई कीमत 403.78 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है।
वहीं हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत में 6.80 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 402.78 रुपये प्रति लीटर तय की गई है।
हालांकि भारतीय रुपये के हिसाब से तुलना करने पर ये कीमतें अभी भी काफी ज्यादा दिखाई देती हैं, लेकिन पाकिस्तान में लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के बीच यह कटौती आम जनता के लिए राहत मानी जा रही है।
किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
पेट्रोल की कीमत घटने से सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जो रोजमर्रा के सफर के लिए बाइक, ऑटो या छोटी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। पाकिस्तान में बड़ी आबादी टू-व्हीलर और लोकल ट्रांसपोर्ट पर निर्भर है, इसलिए ईंधन सस्ता होने से उनकी मासिक लागत कम हो सकती है।
वहीं डीजल सस्ता होने का असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा। भारी वाहन, ट्रक और माल ढुलाई की लागत घटने से खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की सप्लाई लागत में भी कुछ राहत मिल सकती है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले हफ्तों में भी कीमतों में कमी जारी रहती है, तो पाकिस्तान में महंगाई दर पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव हो सकता है।
कुछ हफ्ते पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे दाम
पाकिस्तान में फिलहाल कीमतें कम जरूर हुई हैं, लेकिन कुछ समय पहले हालात बिल्कुल उलट थे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने के बाद पाकिस्तान सरकार ने मार्च की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल पर लगभग 55 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी थी।
इसके बाद अप्रैल में भी ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरान पेट्रोल करीब 43 प्रतिशत और डीजल लगभग 55 प्रतिशत तक महंगा हो गया था।
तेजी से बढ़ती कीमतों का असर वहां की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
हर शुक्रवार क्यों बदल रही हैं कीमतें?
पाकिस्तान सरकार फिलहाल हर शुक्रवार को तेल की कीमतों की समीक्षा कर रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक बाजार में लगातार अस्थिरता है। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम तेजी से बदल रहे हैं।
पाकिस्तान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर वहां के घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की कमजोर मुद्रा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी वहां ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह है।
भारत में क्या है स्थिति?
एक तरफ पाकिस्तान में लगातार दूसरे हफ्ते कीमतें घटी हैं, वहीं भारत में बीते दिनों ईंधन की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। हालांकि भारत में बढ़ोतरी पाकिस्तान जितनी बड़ी नहीं रही, लेकिन कई शहरों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम बढ़े हैं।
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को पेट्रोल करीब 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल लगभग 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। वहीं CNG की कीमत में भी करीब 1 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारत में तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और टैक्स स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर कीमतें तय करती हैं। फिलहाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा अंतर क्या है?
भारत और पाकिस्तान दोनों ही बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करते हैं, लेकिन दोनों देशों की आर्थिक स्थिति और नीति में बड़ा अंतर है। भारत के पास बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार, मजबूत टैक्स सिस्टम, स्थिर सप्लाई चेन, बड़ी रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। इसी वजह से भारत में कीमतों में बदलाव अपेक्षाकृत नियंत्रित रहता है।
वहीं पाकिस्तान आर्थिक संकट, मुद्रा कमजोरी और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है। इसलिए वहां वैश्विक बाजार में हलचल का असर ज्यादा तेजी से दिखाई देता है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान दोनों में ईंधन की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि अगर वैश्विक बाजार स्थिर रहता है और कच्चे तेल में नरमी आती है, तो दोनों देशों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार की लगातार दूसरी कटौती वहां की जनता के लिए राहत की खबर जरूर मानी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ इसे स्थायी राहत मानने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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