नई दिल्ली: देश में डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है। करोड़ों लोग अब मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के जरिए अपने अधिकांश बैंकिंग काम मिनटों में पूरा कर रहे हैं। इसके बावजूद भारतीय बैंक आज भी पेन, पेपर और इंक (स्याही) जैसी स्टेशनरी पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 (FY2025) के आंकड़े बताते हैं कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI और निजी क्षेत्र के HDFC Bank ने प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर सबसे ज्यादा खर्च किया। वहीं IDFC First Bank ने अपने सालाना नेट प्रॉफिट का 8.05% केवल स्टेशनरी पर खर्च कर दिया।
Highlights
- डिजिटल बैंकिंग के बावजूद बैंक स्टेशनरी पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।
- SBI और HDFC Bank ने FY2025 में सबसे अधिक खर्च किया।
- IDFC First Bank ने अपने नेट प्रॉफिट का 8.05% स्टेशनरी पर खर्च किया।
- चेकबुक, पासबुक, KYC और कानूनी दस्तावेज अब भी खर्च की बड़ी वजह हैं।
डिजिटल बैंकिंग के बावजूद क्यों नहीं घट रहा खर्च?
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। आज अधिकांश ट्रांजैक्शन मोबाइल ऐप, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए हो रहे हैं। इसके बावजूद बैंक पूरी तरह पेपरलेस नहीं बन पाए हैं।
दरअसल, बैंकों को आज भी लाखों ग्राहकों के लिए चेकबुक, पासबुक, डिमांड ड्राफ्ट, KYC फॉर्म, लोन एग्रीमेंट, कानूनी दस्तावेज, शाखाओं के रिकॉर्ड, ऑडिट पेपर और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज तैयार करने पड़ते हैं। यही वजह है कि प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर उनका खर्च अब भी काफी अधिक बना हुआ है।
SBI और HDFC Bank ने खर्च किए सबसे ज्यादा रुपये
FY2025 के दौरान प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर सबसे अधिक खर्च स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने किया। बैंक ने इस मद में 986.4 करोड़ रुपये खर्च किए।
इसके बाद दूसरे स्थान पर HDFC Bank रहा, जिसने 922.5 करोड़ रुपये खर्च किए।
इसके अलावा Axis Bank और ICICI Bank जैसे बड़े निजी बैंकों ने भी इस मद में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए।
प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर खर्च (FY2025)
| बैंक | खर्च (करोड़ रुपये) | ऑपरेटिंग खर्च में हिस्सा |
|---|---|---|
| SBI | 986.4 | 0.42% |
| HDFC Bank | 922.5 | 0.52% |
| Axis Bank | 373.8 | 0.93% |
| ICICI Bank | 318.5 | 0.25% |
| Bank of Baroda | 211.9 | 0.58% |
| Punjab National Bank | 173.8 | 0.53% |
| Kotak Mahindra Bank | 167.0 | 0.36% |
| Canara Bank | 165.9 | 0.43% |
| Union Bank of India | 135.3 | 0.48% |
| IDFC First Bank | 122.7 | 0.65% |
| IndusInd Bank | 114.9 | 0.72% |
| Yes Bank | 70.0 | 0.65% |
| AU Small Finance Bank | 58.3 | 0.98% |
| Federal Bank | 56.2 | 0.71% |
मुनाफे के हिसाब से सबसे ज्यादा बोझ किस बैंक पर?
अगर केवल कुल खर्च देखा जाए तो SBI और HDFC Bank सबसे आगे हैं। लेकिन यदि खर्च की तुलना बैंकों के नेट प्रॉफिट से की जाए तो तस्वीर बदल जाती है।
IDFC First Bank ने स्टेशनरी पर 122.7 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसके पूरे साल के नेट प्रॉफिट का 8.05% है। यह सभी बैंकों में सबसे अधिक अनुपात है।
इसके बाद IndusInd Bank का नंबर आता है, जिसने 114.9 करोड़ रुपये खर्च किए। यह उसके नेट प्रॉफिट का 4.46% रहा।
वहीं Yes Bank के लिए यह खर्च उसके मुनाफे का 2.86% और AU Small Finance Bank के लिए 2.77% रहा।
दूसरी ओर, SBI ने भले ही सबसे ज्यादा रकम खर्च की हो, लेकिन यह उसके कुल नेट प्रॉफिट का केवल 1.22% था। ICICI Bank के मामले में यह अनुपात सिर्फ 0.58% रहा।
आखिर बैंक इतना खर्च क्यों करते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार बैंकिंग सेक्टर अभी पूरी तरह डिजिटल नहीं हुआ है। कई प्रक्रियाओं में आज भी फिजिकल दस्तावेज जरूरी हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- नए खाते खोलने के दस्तावेज
- KYC रिकॉर्ड
- चेकबुक और पासबुक की छपाई
- लोन एग्रीमेंट और कानूनी दस्तावेज
- शाखाओं के रिकॉर्ड और रजिस्टर
- ऑडिट एवं नियामकीय दस्तावेज
- ग्राहकों के लिए प्रिंटेड फॉर्म और अन्य सामग्री
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ग्राहक आज भी कागजी दस्तावेजों पर निर्भर हैं। इसलिए बैंकों के लिए इन खर्चों को पूरी तरह खत्म करना अभी संभव नहीं है।
भविष्य में क्या घटेगा यह खर्च?
बैंक लगातार डिजिटल सिग्नेचर, ई-केवाईसी, ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और पेपरलेस लोन प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल से प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर होने वाला खर्च धीरे-धीरे कम हो सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में पूरी तरह पेपरलेस बैंकिंग सिस्टम बनने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।
निष्कर्ष
डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के बावजूद भारतीय बैंक अभी भी प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। SBI और HDFC Bank कुल खर्च के मामले में सबसे आगे हैं, जबकि IDFC First Bank ने अपने नेट प्रॉफिट का सबसे बड़ा हिस्सा इस मद में खर्च किया। इससे साफ है कि डिजिटल बदलाव तेजी से हो रहा है, लेकिन बैंकिंग व्यवस्था अभी पूरी तरह कागज-मुक्त होने से काफी दूर है।


