नई दिल्ली: आयुष दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियामक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली आयुष दवाओं की निगरानी कड़ी करने के साथ-साथ भ्रामक विज्ञापनों पर रियल-टाइम नजर रखने के लिए ‘आयुष सुरक्षा पोर्टल’ शुरू किया है। इसके अलावा, दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, फर्जी दावों पर कार्रवाई करने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए प्रावधान भी लागू किए जा रहे हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए अलग से नियामक व्यवस्था मौजूद है। इन नियमों के अनुसार किसी भी निर्माता को दवाओं के उत्पादन और बिक्री से पहले निर्धारित लाइसेंसिंग शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
नियमित जांच से होगी गुणवत्ता की निगरानी
सरकार के मुताबिक, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्रग इंस्पेक्टर समय-समय पर दवा निर्माण इकाइयों और मेडिकल स्टोरों से आयुष दवाओं के नमूने एकत्र करते हैं। इन नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है।
यदि जांच के दौरान कोई दवा निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो संबंधित निर्माता या विक्रेता के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
CDSCO में बनाया गया विशेष आयुष वर्टिकल
आयुष दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) में एक विशेष आयुष वर्टिकल स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य आयुष दवाओं की नियामक निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया को मजबूत करना है।
‘आयुष स्टैंडर्ड’ और ‘आयुष प्रीमियम’ प्रमाणपत्र
सरकार ने बताया कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) की गुणवत्ता प्रमाणन योजना के तहत तृतीय पक्ष मूल्यांकन के बाद योग्य उत्पादों को ‘आयुष स्टैंडर्ड’ और ‘आयुष प्रीमियम’ प्रमाणपत्र दिए जाते हैं। इससे उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की पहचान करने में आसानी होगी और उद्योग में गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा मिलेगा।
‘आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना’ पर जोर
आयुष मंत्रालय ‘आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना’ भी संचालित कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य है:
- आयुष दवाओं का मानकीकरण
- गुणवत्ता आधारित उत्पादन को बढ़ावा देना
- परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करना
- नियामक ढांचे को सुदृढ़ बनाना
- दवाओं की सुरक्षा निगरानी बढ़ाना
- भ्रामक विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण
‘आयुष सुरक्षा पोर्टल’ करेगा रियल-टाइम निगरानी
भ्रामक विज्ञापनों और आयुष दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग एवं निगरानी के लिए मंत्रालय ने ‘आयुष सुरक्षा पोर्टल’ लॉन्च किया है। यह पोर्टल रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए संदिग्ध दावों और शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद करेगा।
इसके साथ ही अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) को डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों पर चल रहे भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में नोटिस जारी करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए सख्त निर्देश
सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां चिकित्सकीय पर्चे की आवश्यकता हो, वहां केवल पंजीकृत आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सक द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करने के बाद ही आयुष दवाओं की बिक्री की अनुमति दी जाए।
इस कदम का उद्देश्य बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
लोगों तक पहुंचाई जा रही प्रमाण-आधारित जानकारी
आयुष मंत्रालय ने बताया कि उसके अधीन कार्यरत सभी अनुसंधान परिषदें और राष्ट्रीय संस्थान आयुष पद्धतियों और उत्पादों से जुड़ी प्रमाण-आधारित (Evidence-Based) जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इसके लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियां, शोध पत्रिकाएं, जनजागरूकता अभियान, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य आयुष दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना, भ्रामक विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण करना और आयुष चिकित्सा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना है।


